पांडुलिपियों में छिपे हैं मिथिला के कई रहस्य

मिथिला के कई अनसुलझे प्राचीन रहस्य आज भी उन पांडुलिपियों में छिपे हुए हैं, जो अभी भी शिक्षण संस्थाओं के

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बाबा की महिमा अपरंपार

जब वेद और पुराण ही ब्रह्मा या सद्गुरु का वर्णन करने में असमर्थता प्रगट करते हैं, तब हम एक अल्पज्ञ प्राणी अपने सद्गुरु श्री साई बाबा का वर्णन कैसे कर सकते हैं. सच पूछा जाए तो मूक रहना ही सद्गुरु की विमल पताकारूपी विरुदावली का उत्तम प्रकार से वर्णन करना है, परंतु उनमें जो उत्तम गुण हैं, वे हमें मूक कहां रहने देते हैं. यदि स्वादिष्ट भोजन बने और मित्र एवं संबंधी आदि साथ बैठकर न खाएं तो वह नीरस सा प्रतीत होता है और जब वही भोजन सब एक साथ बैठकर खाते हैं, तब उसमें एक विशेष प्रकार की सुस्वादुता आ जाती है.

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