RSS के कार्यक्रम को लेकर बोले प्रणब, 7 जून को दूंगा जावाब

पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यक्रम में जाने को लेकर विवाद जारी

Read more

प्रणब मुखर्जी के RSS के कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस में रोष

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नागपुर में चल रहे संघ शिक्षा वर्ग के समापन समारोह में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को

Read more

पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की नई किताब में है ममता बनर्जी के व्यक्तित्व का जिक्र

देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लेकर को ‘जन्मजात विद्रोही’ बताया है.

Read more

प्रधानमंत्री विदेशी पूंजी लाएंगे

विदेशी पूंजी निवेश के बारे में पिछली बार सरकार ने फैसला ले लिया था, लेकिन संसद के अंदर यूपीए के सहयोगियों ने ही ऐसा विरोध किया कि सरकार को पीछे हटना पड़ा. खुदरा बाज़ार में विदेशी निवेश का विरोध करने वालों में ममता बनर्जी सबसे आगे रहीं. सरकार ने कमाल कर दिया. भारत दौरे पर आई अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ममता से मिलने सीधे कोलकाता पहुंच गईं.

Read more

विद्वान प्रधानमंत्री विफल प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ईमानदार हैं, सौम्य हैं, सभ्य हैं, मृदुभाषी एवं अल्पभाषी हैं, विद्वान हैं. उनके व्यक्तित्व की जितनी भी बड़ाई की जाए, कम है, लेकिन क्या उनकी ये विशेषताएं किसी प्रधानमंत्री के लिए पर्याप्त हैं? अगर पर्याप्त भी हैं तो उनकी ये विशेषताएं सरकार की कार्यशैली में दिखाई देनी चाहिए. अ़फसोस इस बात का है कि मनमोहन सिंह के उक्त गुण सरकार के कामकाज में दिखाई नहीं देते.

Read more

असफल वित्त मंत्री सक्रिय राष्‍ट्रपति

वर्ष 2008 में ग्लोबल इकोनॉमी स्लो डाउन (वैश्विक मंदी) आया. उस समय वित्त मंत्री पी चिदंबरम थे. हिंदुस्तान में सेंसेक्स टूट गया था, लेकिन आम भावना यह थी कि इस मंदी का हिंदुस्तान में कोई असर नहीं होने वाला है. उन दिनों टाटा वग़ैरह का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा था और एक धारणा यह बनी कि भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व की अर्थव्यवस्था की ज़रूरत नहीं है.

Read more

फैसले न लेने की कीमत

मनमोहन सिंह की बुनियादी समस्या यह है कि वह खुद फैसले नहीं लेना चाहते, लेकिन प्रधानमंत्री हैं तो फैसले तो लेने ही थे. जब उनके पास फाइलें जाने लगीं तो उन्होंने सोचा कि वह क्यों फैसले लें, इसलिए उन्होंने मंत्रियों का समूह बनाना शुरू किया, जिसे जीओएम (मंत्री समूह) कहा गया. सरकार ने जितने जीओएम बनाए, उनमें दो तिहाई से ज़्यादा के अध्यक्ष उन्होंने प्रणब मुखर्जी को बनाया.

Read more

बिगड़े रिश्‍ते, बिगड़ी अर्थव्‍यवस्‍था

अब प्रणब मुखर्जी के दूसरे मंत्रियों और प्रधानमंत्री से रिश्ते की बात करें. वित्त मंत्री माना जाता है कि आम तौर पर कैबिनेट में दूसरे नंबर की पोजीशन रखता है. वित्त मंत्रालय इन दिनों मुख्य मंत्रालय (की मिनिस्ट्री) हो गया है, क्योंकि हर पहलू का महत्वपूर्ण पहलू वित्त होता है, इसलिए बिना वित्त के क्लीयरेंस के कोई भी फैसला हो ही नहीं सकता.

Read more

ओमिता पॉल महान सलाहकार

प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं. ऐसे में उनके चार दशक पुराने राजनीतिक करियर की समीक्षा की जा रही है. देश की वर्तमान खराब आर्थिक हालत और उसमें प्रणब बाबू की भूमिका पर भी खूब चर्चा हो रही है, लेकिन इस सबके बीच एक और अहम मसला है, जिस पर ज़्यादा बात नहीं हो रही है. खासकर ऐसे समय में, जबकि बिगड़ी आर्थिक स्थिति को न सुधार पाने के लिए प्रणब मुखर्जी को ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा हो. यह सवाल सीधे-सीधे वित्त मंत्री के सलाहकार से जुड़ा हुआ है.

Read more

प्रणब मुखर्जी सफल राष्ट्रपति साबित होंगे

हिंदुस्तान की राजनीति में इंदिरा जी की हत्या के बाद प्रणब मुखर्जी का एक विशेष स्थान रहा. जब इंदिरा जी की हत्या हुई तो प्रणब मुखर्जी और राजीव गांधी दोनों दिल्ली से बाहर थे. न केवल बाहर थे, बल्कि दोनों साथ थे. वापस लौटते हुए जब बातचीत हुई कि अगला प्रधानमंत्री कौन बनेगा, क्योंकि इंदिरा जी की हत्या हो गई है और उनकी लाश दिल्ली में रखी हुई है तो प्रणब मुखर्जी ने लोगों से कहा कि मैं ही सबसे वरिष्ठ हूं और मुझे ही प्रधानमंत्री बनना चाहिए.

Read more

प्रणब मुखर्जी बधाई के पात्र हैं

प्रणब मुखर्जी को बधाई देनी चाहिए. उन्हें बधाई इसलिए नहीं देनी चाहिए कि वह कांग्रेस के उम्मीदवार हैं, बल्कि उन्हें इसलिए बधाई देनी चाहिए, क्योंकि वह देश में जीवित उन चंद लोगों में से हैं, जिन्हें राजनीतिज्ञ कह सकते हैं.

Read more

यह बजट खतरनाक है

16 मार्च को प्रणब मुखर्जी लोकसभा में भाषण दे रहे थे. यह आम भाषण नहीं था, बल्कि 2012-13 का बजट भाषण था. सारा देश इस भाषण को ध्यान से सुन रहा था. हम भी इस भाषण को सुन रहे थे. इस भाषण को जब हमने सुनना शुरू किया तो हमें बहुत आशा थी कि प्रणब मुखर्जी इस देश के सामने आने वाली तकलीफ़ों को ध्यान में रखकर अपना बजट भाषण रखेंगे.

Read more

बजट 2011 इसमें गरीबों के लिए कुछ भी नहीं है

प्रणब मुखर्जी के बजट में दबे-कुचलों, ग़रीबों, अल्पसंख्यकों, मज़दूरों, महिलाओं, बच्चों और किसानों के लिए धेले भर की जगह नहीं दिखाई पड़ती. बहुत पहले ही देश में बजट का स्वरूप बदल गया था. आज स्थिति यह है कि बजट सरकार की आमदनी और खर्च का ब्योरा नहीं, बल्कि जनता को आंकड़ों में उलझा कर बेवक़ूफ़ बनाने की एक सोची समझी साज़िश बनकर रह गया है.

Read more

कांग्रेस और तृणमूलः टूट गया गठबंधन

कोलकाता नगर निगम चुनावों में महज़ 10 सीटों को लेकर तृणमूल और कांग्रेस के बीच गठबंधन टूट गया है. इसके साथ ही बाक़ी 80 नगर पालिकाओं पर भी तिकोनी-चौकोनी लड़ाई तय है. आगामी विधानसभा चुनावों की हवा बनाने के लिए इन चुनावों के परिणाम काफी अहम होंगे.

Read more

थरूर का इस्ती़फा कहानी का अंत नहीं है

भारतीय मीडिया में अब तक के सबसे अनोखे सोप ओपेरा एवं सनसनीखेज क्राइम थ्रिलर से अचंभित और रोमांचित हो रहे लोगों के बारे में यही कहा जा सकता है कि उन्होंने शायद अगाथा क्रिस्टी की लिखी मर्डर ऑन द ओरिएंट एक्सप्रेस नहीं पढ़ी. उन्होंने इसके फिल्मी रूपांतरण में अल्बर्ट फिनी और पीटर उस्तीनोव को हरक्यूल पॉयरट के किरदार में भी नहीं देखा है.

Read more

गृहमंत्री जी, आप अपनी ज़िम्मेदारियों से भाग नहीं सकते

अधिकतर ग़लतियां अक्सर दिमाग़ से शुरू होती हैं. यह सभी जानते हैं कि सुरक्षा मामलों में गृहमंत्री पी चिदंबरम अमेरिकी नीति के बड़े हिमायती हैं. इस नीति में अपनी कमियों पर ख़ास ध्यान नहीं दिया जाता, लेकिन सुरक्षा का यह फार्मूला अमेरिका में मुख्य रूप से विदेशी चुनौतियों से निबटने के लिए तैयार किया गया था, न कि अंदरूनी समस्याओं से मुक़ाबला करने के लिए.

Read more

निजी स्टाफ पर गिरेगी गाज

कैबिनेट की अप्वायंटमेंट्‌स कमिटी ने मंत्रियों के निजी स्टाफ के रूप में काम करने वाले नौकरशाहों के लिए अधिकतम समय सीमा निर्धारित करने का फैसला किया है. नए नियम के मुताबिक़, कोई भी अधिकारी, चाहे वह किसी भी ओहदे पर क्यों न हो, अधिकतम 10 वर्षों तक ही किसी मंत्री के निजी स्टाफ के रूप में काम कर सकता है.

Read more

अब भारत में भी इंडिया फर्स्ट लाइ़फ इंश्योरेंस

भारत के दो प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों-बैंक ऑफ बड़ौदा एवं आंध्रा बैंक के साथ यूके की अग्रणी जोखिम, संपदा एवं निवेश कंपनी लीगल एवं जनरल के एक संयुक्त उद्यम इंडिया फर्स्ट इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने इसकी शुरुआत करने की घोषणा की है.

Read more

आम आदमी पर दादा का डंडा

हालांकि बजट के बारे में जब आप पढ़ रहे होंगे, तब तक दादा के डंडे से आम आदमी की कमर पर अनेक वार हो चुके होंगे और दादा विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब भी दे चुके होंगे. लेकिन, तब तक यह बात सा़फ हो जाएगी कि दादा के जिस बजट से पूरा देश बहुत उम्मीद लगाए बैठा था, उसने कुल मिलाकर आम आदमी को एक बार फिर निराश कर दिया.

Read more