प्रजातंत्र बना लाठीतंत्र

एक बार लखनऊ में मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर जबरदस्त प्रदर्शन हुआ. प्रदर्शनकारी पूर्वांचल के अलग-अलग शहरों से लखनऊ पहुंचे थे, उनकी संख्या क़रीब 1500 रही होगी, उनमें किसान, मज़दूर एवं छात्रनेता भी थे, जो अपने भाषणों में मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ आग उगल रहे थे. वे सब अपने भाषणों में सीधे मुख्यमंत्री पर निशाना साध रहे थे. उस प्रदर्शन का नेतृत्व समाजवादी नेता चंद्रशेखर कर रहे थे.

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राजनीतिक दलों का रवैया गुस्सा दिलाता है

महाभारत शायद आज की सबसे बड़ी वास्तविकता है. इस महाभारत की तैयारी अलग-अलग स्थलों पर अलग तरह से होती है और लड़ाई भी अलग से लड़ी जाती है, लेकिन 2013 और 2014 का महाभारत कैसे लड़ा जाएगा, इसका अंदाज़ा कुछ-कुछ लगाया जा सकता है, क्योंकि सत्ता में जो बैठे हुए लोग हैं या जो सत्ता के आसपास के लोग हैं, वे धीरे-धीरे इस बात के संकेत दे रहे हैं कि वे किन हथियारों से लड़ना चाहते हैं.

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यह जनता की जीत थी

संजय सिंह अन्ना के सहयोगी हैं और इंडिया अगेंस्ट करप्शन के अहम कार्यकर्ता भी. 26 अगस्त को जब दिल्ली की सड़कों पर पुलिस से इंडिया अगेंस्ट करप्शन के कार्यकर्ताओं और आम जनता की भिड़ंत हुई, तब उसके कई दिनों बाद पुलिस ने अरविंद केजरीवाल समेत उनके कई सहयोगियों के खिला़फ मामले दर्ज किए. गंभीर आरोपों के तहत एफआईआर दर्ज की जाती है.

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अन्‍ना की हार या जीत

अन्ना हजारे ने जैसे ही अनशन समाप्त करने की घोषणा की, वैसे ही लगा कि बहुत सारे लोगों की एक अतृप्त इच्छा पूरी नहीं हुई. इसकी वजह से मीडिया के एक बहुत बड़े हिस्से और राजनीतिक दलों में एक भूचाल सा आ गया. मीडिया में कहा जाने लगा, एक आंदोलन की मौत. सोलह महीने का आंदोलन, जो राजनीति में बदल गया. हम क्रांति चाहते थे, राजनीति नहीं जैसी बातें देश के सामने मज़बूती के साथ लाई जाने लगीं.

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बिहारः सेवा यात्रा में सुशासन की पोल खुली

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चार दिवसीय चंपारण सेवा यात्रा ने सुशासन की पोल खोल दी है. मुख्यमंत्री के मोतिहारी पहुंचते ही पंचायत शिक्षकों द्वारा मानदेय भुगतान के लिए किया गया हंगामा, पुतला दहन, बिजली का ग़ायब होना, पंचायती राज के जन प्रतिनिधियों का आंदोलन एवं अभियंत्रण महाविद्यालय में व्याप्त कुव्यवस्था को लेकर छात्रों का हंगामा तथा सभाओं में जनता के बीच उत्साह न होना साबित करता है कि लोग सरकार से खुश नहीं हैं.

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सबसे लंबी ड्रेस

शादी की ड्रेस बहुत ही सुंदर लगती है. उसकी लंबाई अन्य पोशाकों के मुक़ाबले अधिक लंबी होती है, लेकिन रोम के एक फैशन हाउस ने शादी की ऐसी ड्रेस बनाई है, जो लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.

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बेआबरु होकर बर्लुस्कोनी को जाना

कई मसलों पर उदाहरण स्वरूप एक पुरानी कहावत कही जाती है- रोम जल रहा था और नीरो बंसी बजा रहा था. यह जुमला इटली के पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी पर कुछ ज़्यादा ही फिट बैठता है. वरना, शायद इतने बेआबरू होकर उन्हें सत्ता के गलियारे से नहीं जाना पड़ता.

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जनता की ताक़त सबसे बड़ा हथियार है

मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में आए ख़ास सुनामी (जनांदोलन) का परिणाम अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसका असर गहरा होगा. अब तक ट्यूनीशिया और मिस्र ख़ुद को बदल चुके हैं. अब हम यमन, बहरीन और सीरिया में परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे हैं. ओमान से भी ऐसी ही ख़बर आ रही है और सऊदी अरब में भी इसकी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता.

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वालीवुड की ट्रेड सेटिंग फिल्में

हिंदी फिल्मों में ढेर सारी चीजें बदल कर भी नहीं बदलतीं. भले ही नई तकनीक, नई लोकेशंस और बढ़े हुए बजट से सिनेमा के प्रदर्शन में भारी बदलाव आया हो. लेकिन कुछ चीजें एक ट्रेंड की तरह तबसे चली आ रही हैं, जबसे इनका प्रयोग हुआ है और ये बार-बार पर्दे पर आकर नई फिल्मों के ज़रिए अपने प्रयोग की याद दिलाती है

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मिस्र का सत्‍ता परिवर्तनः तानाशाही नहीं चलेगी

मिस्र के इतिहास में 11 फरवरी, 2011 का दिन उस समय दर्ज हो गया, जब देश की सत्ता पर 30 वर्षों तक क़ाबिज रहने वाले 82 वर्षीय राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को भारी जनाक्रोश के चलते राजधानी काहिरा स्थित अपना आलीशान महल अर्थात राष्ट्रपति भवन छोड़कर शर्म-अल-शेख़ भागना पड़ा. तमाम अन्य देशों के स्वार्थी, क्रूर एवं सत्तालोभी तानाशाहों की तरह मिस्र में भी राष्ट्रपति होस्नी मुबारक ने अपनी प्रशासनिक पकड़ बेहद मज़बूत कर रखी थी.

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यह पाकिस्तान के लिए शोक का समय है

लाहौर एक ऐतिहासिक शहर है. यह भारत और पाकिस्तान दोनों की जन्मस्थली है. लाहौर में ही रावी के तट पर जवाहर लाल नेहरू ने कांग्रेस सदस्यों को भारत की स्वतंत्रता के लिए शपथ दिलाई थी. लाहौर ही वह जगह थी, जहां जिन्ना ने अपना ऐतिहासिक भाषण दिया था, जिसमें पहली बार पाकिस्तान नामक एक देश की अवधारणा सामने आई थी.

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सेना सेवा कोर स्‍थानांतरणः गया के लिए खतरे की घंटी

गया में 35 साल पहले स्थापित सेना सेवा कोर केंद्र (उत्तर) को बंगलूर स्थानांतरित किए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है. इस पर राजनीति भी गर्म हो गई है. सेना सेवा कोर केंद्र (उत्तर) बचाव संघर्ष समिति तथा शहर के कथित बुद्धिजीवियों की ओर से नवगठित आर्मी सेंटर (नॉर्थ) बचाओ अभियान समिति की ओर से विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है.

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जम्‍मू- कश्‍मीरः क्‍यों बिगड़े हालात?

तीन माह से हिंसा की भट्ठी में जल रही कश्मीर घाटी में हर गुज़रने वाले दिन के साथ हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं. जब कश्मीर के हालात पर नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में बैठक चल रही थी, तब भी घाटी के विभिन्न क्षेत्रों में हिंसा जारी थी. इस दिन पुलिस और सेना की फायरिंग में 17 लोग मारे गए और 100 घायल हो गए.

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कश्मीर की तकली़फ समझिए

कोई क्यों न सरकार पर गुस्सा हो. अगर ईद पर भी एक-दूसरे को बधाई न दे पाएं तो ईद मनाना बेकार हो जाता है. ईद त्योहार ही प्यार, मोहब्बत और भाईचारे का है. सारी दुनिया में इसे हर्ष- उल्लास के साथ मनाया गया, लेकिन कश्मीर में लोग घरों से बाहर नहीं निकल पाए.

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सरकार प्रॉपर्टी डीलर बन गई है

विरोध के बदले गोली. बच्चे, बूढ़े, जवान, महिलाएं यानी समाज का हर तबका लाठी-डंडों के साथ एक साथ खड़ा था. किसान आंदोलन की यह आग आगरा, मथुरा और अलीगढ़ के रास्ते पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फैल गई. किसानों के इस उग्र विरोध के पीछे सरकार का अक्खड़ रवैया है, जो 10,000 करोड़ रुपये के यमुना एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट के लिए उनकी ज़मीनों को औने-पौने दामों पर अधिग्रहीत करना चाहती है, लेकिन यह तो केवल शुरुआत है.

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दम तोड़ता लोकतंत्र

देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत के सामान्य निर्वाचन-2010 का शंखनाद हो चुका है. ये चुनाव 15 सितंबर से लेकर 31 अक्टूबर के बीच होंगे. उधर सूबे के आदिवासियों में केंद्र और राज्य सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है.

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पहले बसाओ फिर उजाड़ो

समस्तीपुर ज़िले के शिवाजी नगर प्रखंड में मुसहर समुदाय के लोग बसने को ज़मीन नहीं, रहने को घर नहीं, पर सारा जहां हमारा है, के तर्ज़ पर ज़िंदगी गुजार रहे हैं. वे तीन एकड़ जमीन पर किसी तरह झुग्गी-झोपड़ी में रहकर ज़िंदगी की गाड़ी आगे ब़ढा रहे हैं, लेकिन विडंबना देखिए कि इन मुसहर परिवारों की शासन-प्रशासन ने अब तक कोई खबर नहीं ली है.

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