कैसे बचेगी गंगा-जमुनी तहजीब

गंगा की निर्मलता तभी संभव है, जब गंगा को अविरल बहने दिया जाए. यह एक ऐसा तथ्य है, जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती है, लेकिन गंगा की स़फाई के नाम पर पिछले 20 सालों में हज़ारों करोड़ रुपये बहा दिए गए और नतीजे के नाम पर कुछ नहीं मिला. एक ओर स़फाई के नाम पर पैसों की लूटखसोट चलती रही और दूसरी ओर गंगा पर बांध बना-बनाकर उसके प्रवाह को थामने की साजिश होती रही.

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छत्तीसगढ़ः हवाओं में प्रदूषण का ज़हर

छत्तीसगढ़ ने राज्य बनने के बाद पिछले दस सालों में खूब तरक्क़ी की है. आज छत्तीसगढ़ की कई योजनाएं राष्ट्रीय स्तर पर सराही जा रही हैं. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार के पीडीएस सिस्टम को सभी राज्यों में लागू करने की सलाह दी है, लेकिन दूसरी ओर प्रदूषण के मामले में भी छत्तीसगढ़ धीरे-धीरे अव्वल नंबर पर पहुंचता जा रहा है.

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गंगोत्री में ही गंगा मैली

हर धर्म की अपनी मान्यताएं-परंपराएं होती हैं. आस्था को विज्ञान की कसौटी पर नहीं कसा जा सकता, किंतु ऐसा भी नहीं कि उसमें कोई तर्क न हो. यदि धर्म न हो तो समाज में समरसता, भाईचारा और उल्लास देखने को न मिले.

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अब सरयू नदी भी खतरे में

नदियों में लगातार ब़ढते प्रदूषण के कारण आज तमाम नदियों का अस्तित्व खतरे में है. गंगा यमुना जैसी बड़ी नदियों के साथ ही छोटी नदियों की हालत तो और भी खराब है. इन छोटी नदियों की सा़फ स़फाई की तऱफ तो किसी का ध्यान भी नहीं है.

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कानकुन जलवायु सम्मेलन :दो कदम पीछे

मेक्सिको के कानकुन में हुआ 16वां जलवायु परिवर्तन विषयक सम्मेलन अमेरिका और विकसित मुल्कों के अड़ियल रवैये के चलते बिना किसी ठोस नतीजे के ख़त्म हो गया. बीते साल कोपेनहेगन में हुए सम्मेलन की तरह यहां भी ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती को लेकर विकसित और विकासशील मुल्कों के बीच कोई आम सहमति नहीं बन पाई. सम्मेलन शुरू होने के पहले हालांकि यह उम्मीद की जा रही थी कि विकसित मुल्क इस मर्तबा उत्सर्जन कटौती संबंधी कोई क़ानूनी बाध्यकारी समझौते पर अपनी राय बना लेंगे, लेकिन दो हफ्ते की लंबी कवायद के बाद भी कार्बन उत्सर्जन में कटौती के लिए कोई वाजिब समझौता आकार नहीं ले सका. अलबत्ता सम्मेलन का जो आख़िरी मसौदा सामने निकल कर आया, उसमें कार्बन उत्सर्जन कम करने की बात ज़रूर कही गई है, मगर इसे कैसे हासिल किया जाएगा, इस पर साफ-साफ कुछ नहीं कहा है.

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संकट में फल्‍गू का अस्तित्‍व

माता सीता के शाप से शापित होने के बावजूद पौराणिक काल से पितरों को मोक्ष दिलाती आ रही गया की पवित्र फल्गू नदी का वजूद आज ख़तरे में है. देश-विदेश से लाखों लोग प्रति वर्ष इसे नमन करने आते हैं.

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सरकार ही प्रदूषित कर रही है नर्मदा

धार्मिक दृष्टि से अति पवित्र और प्रदेश की जीवन रेखा कही जाने वाली नर्मदा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए भारत सरकार ने मध्य प्रदेश को 15 करोड़ रुपयों की सहायता दी है. इसके अलावा राज्य सरकार भी नर्मदा जल को प्रदूषण से बचाने के लिए कई प्रकार के खर्चीले उपाय कर रही है, लेकिन इस सबके बाद भी नर्मदा में जल प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है. कारण, सरकार स्वयं नर्मदा को गंदा कर रही है.

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ओ गंगा बहती हो क्‍यों

गंगा प्रतीक है एक सभ्यता की, हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी तक. इसी से मिलकर बनती है गंगा-जमुनी संस्कृति. करोड़ों लोगों के जीवन की आशा है गंगा. उनकी रोजी और रोटी का सहारा भी है गंगा. लाखों वर्ग किलोमीटर खेतों की प्यास भी बुझाती है गंगा. लेकिन अब गंगा का पानी पीने तो दूर, नहाने लायक़ भी नहीं रहा.

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बीटी बैगन पर रोक के वैज्ञानिक और लोकतांत्रिक पहलू

बीटी बैगन के इस्तेमाल पर पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने फिलहाल रोक की घोषणा की तो मीडिया में उसके ख़िला़फ आलोचनाओं का अंबार लग गया. कई लोगों ने तर्क दिए कि ऐसे फैसले वैज्ञानिकों के लिए छोड़ दिए जाने चाहिए. लेकिन यह मामला विज्ञान और विज्ञान विरोध का नहीं है.

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