सीतापुर ॠण घोटाला : चीनी मिल प्रबंधन और बैंक की मिलीभगत उजागर

उत्तर प्रदेश सीतापुर के हरगांव स्थित बिड़ला समूह की दी अवध शुगर मिल्स लिमिटेड ने धोखाधड़ी करके किसानों की ज़मीनें

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दो देशों के बीच पिसते बिहारी शरणार्थी

उर्दू के मशहूर और बदनाम कहानीकार सआदत हसन मंटो की एक कहानी है टोबा टेक सिंह जो वर्ष 1947 में

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दिल्ली का बाबू : केजरीवाल से सवाल

कुछ ही लोगों को याद अब याद होगा कि आम आदमी पार्टी के संयोजक और एक्टिविस्ट अरविंद केजरीवाल भारतीय राजस्व

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सरकारी अस्पताल में दवाई नहीं मिलती

देश के कुछ राज्यों में सरकारी अस्पताल का नाम लेते ही एक बदहाल सी इमारत की तस्वीर जेहन में आ

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जब तोप मुक़ाबिल हो : असंवेदनशील है उत्तराखंड सरकार

बारिश आ रही है और नदियां उफान पर हैं, लेकिन मंत्रियों, राजनेताओं और अफसरों को इसकी कोई चिंता नहीं है.

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समस्या और उसका निराकरण

राजनीतिक पार्टियों में अच्छे लोग नहीं हैं, यह बात नहीं है, पर सवाल अच्छे लोगों का नहीं, बल्कि नीतियों एवं

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गांव की आज की व्यवस्था एवं उपाय योजना

गांव में किए जा सकने वाले काम ग्रामसभा करे, ऐसा संविधान स्वराज्य के बाद बनाया जाना चाहिए था. दरअसल जो

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कब्रिस्तानों पर अवैध क़ब्ज़े : दफ़न के लिए दो गज़ ज़मीन भी मयस्सर नहीं

लोगों ने अपनी ज़मीन-जायदाद वक़्फ करते व़क्त यही तसव्वुर किया होगा कि आने वाली नस्लों को इससे फायदा पहुंचेगा, बेघरों को घर मिलेगा, ज़रूरतमंदों को मदद मिलेगी, लेकिन उनकी रूहों को यह देखकर कितनी तकली़फ पहुंचती होगी कि उनकी वक़्फ की गई ज़मीन-जायदाद चंद सिक्कों के लिए ज़रूरतमंदों और हक़दारों से छीनकर दौलतमंदों को बेची जा रही है.

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भजनपुर के मुसलमानों को इंसाफ़ कब मिलेगा

बिहार के फारबिसगंज के भजनपुर गांव में पुलिस फायरिंग में पांच लोगों के मारे जाने की घटना को एक साल पूरा हो गया है, लेकिन हैरत की बात यह है कि अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई. घटना के सूत्रधार खुलेआम घूम रहे हैं, वहीं जिन निर्दोष लोगों ने अन्याय के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपनी जान गंवा दी, उनके परिवारीजन इंसा़फ न मिलने से दु:खी हैं.

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दिल्‍ली का बाबूः उत्तर प्रदेश के बाबुओं की चिंता

अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तो बन गए, लेकिन अभी भी उनके प्रशासन में कई लोगों, जिनमें मुलायम सिंह भी शामिल हैं, का हस्तक्षेप है. इस कारण वह कोई फैसला नहीं ले पा रहे हैं. बाबुओं का स्थानांतरण किया गया, लेकिन उससे प्रशासन के सफल संचालन में परेशानी हो रही है. कुछ स्थानों पर तो अखिलेश यादव यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि किसे कहां रखा जाए.

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दिल्‍ली का बाबूः वित्त मंत्रालय के बाबू

वित्त मंत्रालय में कुछ नई चीज़ें हो रही हैं. अकसर देखा जाता है कि जो अधिकारी किसी मंत्री या सरकार के नज़दीकी होते हैं या फिर उनके व़फादार होते हैं, उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद कोई पद दे दिया जाता है. सामान्य तौर पर सचिव रैंक के अधिकारियों को सेवा विस्तार नहीं दिया जाता है, क्योंकि उनकी सेवानिवृत्ति के साथ कई लोग आस लगाए रहते हैं कि इस बार उनकी बारी आने वाली है.

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मध्‍य प्रदेशः अवैध खनन और राजनीति का अटूट गठजोड़

मध्य प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से सत्ता पक्ष एवं विपक्ष की भीतरी और बाहरी राजनीति से जुड़ा घटनाचक्र एकाएक काफी तेजी से घूमने लगा है. भाजपा के सत्ता में रहते हुए कटनी एवं जबलपुर ज़िलों के अंतर्गत भूगर्भ में मौजूद बॉक्साइड, मार्बल, आयरन और अन्य विभिन्न बेशक़ीमती खनिज संपदा का बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन चल रहा है.

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मनोज झलानी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालए गए

1987 बैच के आईएएस अधिकारी मनोज झलानी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में संयुक्त सचिव बनाए गए हैं. वह ब्रज किशोर प्रसाद की जगह लेंगे.

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किसानों की समस्याओं पर सरकारें कब संजीदा होंगी

हमारे देश में खेती को मानसून का जुआ कहा जाता रहा है. आधुनिकता से खेती में कई बदलाव आए, मगर खेती का जोखिम कम नहीं हुआ. अलबत्ता, आधुनिक खेती के चलते इसमें कई नए तरह के जोखिम ज़रूर जुड़ गए. अब भारत का किसान मौसम के जोखिम के अलावा सरकारी तंत्र और आधुनिक टेक्नोलॉजी के जोखिम भी एक साथ झेलता है. पश्चिम बंगाल के बर्दवान ज़िले में बीते 6 महीनों के भीतर 27 किसान अपनी जान दे चुके हैं.

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मध्य प्रदेश : अवैध खनन का काला कारोबार

कटनी और जबलपुर देश के उस केंद्रीय भू-भाग में स्थित हैं, जिसे राष्ट्र की हृदयस्थली कहा जाता है. इस इलाक़े को आज रौंदा, नोचा, खसोटा और लूटा जा रहा है. करोड़ों-अरबों की प्राकृतिक संपदा का मुना़फा मुट्ठी भर हाथों में क़ैद हो रहा है. कंपनियां, सरकार, प्रशासन एवं दलाल इस सीमा तक सक्रिय हैं कि शासकीय नियम-क़ानून तो दूर, मानवीय मूल्यों का भी मज़ाक़ उड़ाया जा रहा है.

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पंचायती राज व्यवस्था में सुधार की ज़रूरत

देश की बदक़िस्मती कहिए या व्यवस्था की खामी कि किसी भी उद्देश्य को हासिल करने से पहले ही उसमें भ्रष्टाचार के घुन पनपने लगते हैं. चाहे वह खेल के आयोजन का मामला हो, स्वास्थ्य, सीमा की रक्षा करने वाले सैनिकों या गोदामों में अनाज सड़ने का मसला हो, कोई विभाग या क्षेत्र नहीं बचा है, जहां भ्रष्टाचार हावी न हो.

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चिकित्सा अब समाजसेवा नहीं

कुछ दिनों पहले उत्तर प्रदेश के बिजनौर ज़िले के भोगनवाला गांव निवासी शमशाद (25) को उसके परिवारीजन इलाज के लिए ज़िला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसके फेफड़ों में पानी होने की बात कहते हुए भर्ती करने से इंकार कर दिया. मरीज के परिवारीजन डॉक्टरों से घंटों मिन्नतें करते रहे, मगर अस्पताल प्रशासन अपने रवैये पर अड़ा रहा.

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बिहारः आरटीआई कार्यकर्ता सुरक्षित नहीं

सूचना के अधिकार के सिपाही रामविलास सिंह अपनी जान की सुरक्षा की गुहार लगाते रहे, पर लखीसराय सहित बिहार का सारा पुलिस अमला आराम से सोता रहा. राज्य मानवाधिकार आयोग में भी उनकी फरियाद अनसुनी रह गई. अपराधी उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे थे और प्रशासन ने आंखें मूंद लेने में भलाई समझी.

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महंगी बड़ी शराब कि…

शराब जितनी पुरानी हो, उतनी बढ़िया होती है, इस जुमले को अमल में लाने वाले एक शख्स पेरिस से उड़ान भर चुके हैं, लेकिन फ्लाइट पर चढ़ने से पहले उस एशियाई वाइन प्रेमी ने चार्ल्स द गॉल एयरपोर्ट पर ऐसी ख़रीदारी की कि शहर में खुसफुसाहट शुरू हो गई.

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ये मुख़बिरों की बस्ती है

देश में आज भी धर्म और जाति के आधार पर बस्ती, पारा और मोहल्लों का बसना और इनकी पहचान न स़िर्फ मौजूद है, बल्कि स्वीकार्य भी है. परंतु इसी देश में मु़खबिरों की एक बस्ती भी है, यह सुनकर कोई भी चौंक सकता है.

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केन्द्रीय विशिष्ट वनाधिकार कानून : वन विभाग और पुलिस की मनमानी जारी

उत्तर प्रदेश में वन विभाग एवं पुलिस-प्रशासन द्वारा वनाश्रित समाज पर लगातार हो रहे हमलों में बीते 22 अक्टूबर को एक नया अध्याय तब जुड़ गया, जब जनपद गोंडा की तहसील मनकापुर के वनक्षेत्र में बसे बुटाहनी टांगिया गांव में रहने वाले दलितों पर एसडीएम के नेतृत्व में जमकर लाठियां बरसाई गईं, जिसमें विशेष रूप से महिलाओं को निशाना बनाया गया.

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अवैध खनन को सरकारी संरक्षण

मिर्ज़ापुर का प्रशासन शायद भूल चुका है कि पत्थर के अवैध खनन के आरोप में जनपद के एक सेवानिवृत्त आईएएस को जेल जाना पड़ा था, तत्कालीन प्रभागीय वनाधिकारी को निलंबित होना पड़ा था, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित टीम ने कई पत्थर माफियाओं को चिन्हित किया था और करोड़ों रुपये के इमारती पत्थर ज़ब्त किए थे.

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बच्चों ने किया कमाल

दिल्ली के पब्लिक स्कूलों में गरीब बच्चों का दाखिला टेढ़ी खीर है, लेकिन सरकारी स्कूल भी इस मामले में कम नहीं हैं. दिल्ली सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली छात्रवृत्तियां भी कई बार जरूरतमंद छात्र-छात्राओं तक नहीं पहुंच पाती हैं

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उत्तर प्रदेशः उत्‍पीड़न के खिलाफ वन गूजरों का आंदोलन

बीते 15 अगस्त को जब पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा था, उसी दिन उत्तर प्रदेश के जनपद गोंडा में वन टांगिया महिलाओं ने एक बार फिर प्रशासन के जोर-जुल्म के खिलाफ जोरदार आंदोलन करके उन चार मजदूरों को रिहा करा लिया, जिन्हें डिप्टी रेंजर की फर्जी-झूठी तहरीर के आधार पर पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया था.

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गढ़वाल का पशु बलि मेलाः जनहित याचिका से जागा प्रशासन

उत्तराखंड के गढ़वाल ज़िले के थैलीसैण विकास खंड के बुंखाल मेले में पशु बलि रुकवाने को लेकर पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री मेनका गांधी द्वारा उच्च न्यायालय नैनीताल में दायर जनहित याचिका पहली बार प्रशासन की मुस्तैदी का सबब बनी.

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प्रशासन की उदासीनता से पान की खेती को लगा ग्रहण

महोबा जनपद कभी पान कृषि का एक बड़ा गढ़ रह चुका है. कुछ दशक पूर्व तक यहां बड़े पैमाने पर पान की खेती आबाद थी. सैकड़ों बीघा भूमि में पैदा होने वाला यहां का देशावरी पान बिक्री हेतु देश के कोने-कोने में भेजा जाता था, लेकिन अब इस पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं.

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विकीलीक्‍स और कूटनीति

कूटनीति का कारोबार वैसे ही काफी संवेदनशील होता है और जब निजी एवं गोपनीय संवाद सार्वजनिक होने लगे तो यह और भी ज़्यादा मुश्किलें पैदा करता है. लेकिन विकीलीक्स द्वारा गोपनीय दस्तावेजों को लीक करने की ताजा घटना में जो चीज सबसे ज़्यादा ध्यान खींचती है और भरोसा भी दिलाती है, वह यह कि इसमें दस्तावेजों के साथ कोई चालबाज़ी नहीं की गई है.

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डूबे तो किस्‍सा खत्‍म, बचे तो गम ही गमः बाढ़ में डूब गए प्रशासन के वादे

कोसी नदी के घटते-बढ़ते जलस्तर ने तटबंध के अंदर निर्वासित ग्रामीणों को अभी से तबाह करना शुरू कर दिया है, लेकिन प्रशासन एवं जल संसाधन विभाग का रवैया इस क़दर ढीला है कि जैसे उन्होंने ठान ली है कि जब तक नदी के विकराल रूप धरने और लोगों के डूब मरने की नौबत नहीं आती है, तब तक वे बचाव, राहत एवं सुरक्षा कार्य शुरू नहीं करेंगें.

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चार धाम यात्रा अव्‍यवस्‍था का शिकार

देवभूमि उत्तराखंड में धर्म एवं आस्था की मिसाल पेश कर पर्यटन को एक पहचान देने वाली चार धाम यात्रा सरकारी उपेक्षा और अव्यवस्था की भेंट चढ़ कर राम भरोसे चल रही है. इसमें प्रत्येक वर्ष लाखों श्रद्धालु यमुनोत्री-गंगोत्री सहित केदारनाथ एवं बद्रीनाथ धाम की यात्रा करते हैं.

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माफियाओं से जूझते बालू मजदूर

नाव से लोगों को नदी पार ले जाते, कंधों और पतवारों की जुगलबंदी से नाव खेते, बिखेर कर मछली का जाल फेंकते और शाम के धुंधलके में वापस लौटते मछुवारों की लयबद्ध छवियां बहुत सुहानी लगती हैं. लहरों की धुन पर हिचकोले खाते उनके गीत इस दृश्य को और अधिक दिलकश बनाते हैं.

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