बहुरेंगे बरौनी रिफाइनरी के दिन

बिहार की पहचान माने जाने वाले बरौनी रिफाइनरी के दिन बहुरने वाले हैं. मोदी सरकार बनने के बाद ही इसकी

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संकट में मानपुर का वस्त्र उद्योग

बिहार में पिछले ढाई दशक में कोई नए कारखाने नहीं लगे, लेकिन इतना हुआ कि पहले से जो कारखाने थे,

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हमें कश्मीरियों की बात ध्यान से सुननी चाहिए

हमारे देश का राजनीतिक जगत या तो भ्रमित हो गया है या फिर असंवेदनशील हो गया है. कश्मीर में लोग

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अन्ना हजारे ने देश को धोखा दिया

अन्ना को किसी ने धोखा नहीं दिया, बल्कि अन्ना ने देश की जनता के साथ धोखा किया है. वह लोगों

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स्यापा नहीं पहल की ज़रूरत

यह बात लंबे समय से कही जाती रही है कि हिंदी में पाठकों की कमी है. साहित्य अकादमी में हिंदी

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कश्मीरी झेल रहे हैं विभाजन का दंश

जवाहर लाल नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह तक भारत के सभी प्रधानमंत्री आपसी विवादों को हल कर पाकिस्तान से अच्छे

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जब तोप मुक़ाबिल हो : अब पार्टी उम्मीदवार नहीं, जन उम्मीदवार

लोकसभा चुनावों के बाद की स्थिति की बात करें, तो कांग्रेस का नेता कौन होगा, यह तय है. राहुल गांधी

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थाली पर सियासत

योजना आयोग ने 27 और 33 रुपये से अधिक ख़र्च करने वाले लोगों को अति निर्धन की श्रेणी से बाहर

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महाबोधि मंदिर प्रबंधन में बदलाव के प्रस्ताव पर : हिंदुओं और बौद्धों में टकराव

महाबोधि मंदिर में सीरियल बम ब्लास्ट की घटना के बाद बिहार सरकार ने बोधगया टेंपल मैनेजमेंट कमिटि एक्ट-1949 में संशोधन

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रामकृष्ण का जन्म

उनका नाम था खुदीराम चटर्जी, जहां इनका जन्म हुआ था, उस जगह का नाम था कामारपुकुर. कामारपुकुर बंगाल का एक

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परिवर्तन की राह पर पाकिस्तान

1971 में पाकिस्तान को फिर इस प्रश्‍न का सामना करना पड़ा कि वह एक राष्ट्र है या दो. जिन्ना मुसलमानों

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मिराती से राष्ट्रपति भवन तक की गाथा

महापुरुषों की ज़िंदगी एक रौशन चिराग़ की तरह होती है, जो दूसरों को रास्ता दिखाने का काम करता है. तभी

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रणबीर बने लुटेरे

अपनी पहली फिल्म बैंड बाजा बारात की सफलता के बाद रणबीर सिंह के पास फिल्मों की लाइन लग गई, लेकिन उन्होंने ख़ुद को संयमित रखते हुए फिल्मों का चयन प्रभावित नहीं होने दिया. हाल में आई उनकी फिल्म लेडीज वर्सेस रिकी बहल पर्दे पर आई, जिसमें वह दिलों के साथ-साथ हसीनाओं के पैसे भी लूटकर ले जाते हैं.

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सरकार ग़रीबों को तमाचा मारना बंद करे

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद कई बच्चों की मौत हो गई है, यूपीए-1 की तुलना में यूपीए-2 के कार्यकाल में रेल दुर्घटनाएं बढ़ गई हैं, पर इस तऱफ तृणमूल कांगे्रस के रेल मंत्री का ध्यान नहीं है, लेकिन शरद पवार को लगा एक थप्पड़ सबका ध्यान आकर्षित कर रहा है.

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ममता का फैसला

पश्चिम बंगाल के बाबुओं के बीच कुछ अच्छा नहीं चल रहा है. ममता बनर्जी ने गौतम सान्याल को अपना प्रधान सचिव नियुक्त किया है. ममता के इस फैसले से वहां के कई वरिष्ठ बाबू खुश नहीं हैं. उनका मानना है कि सान्याल सीएसएस कैडर के अधिकारी हैं

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देश का राजनीतिक ढांचा बचाने की ज़रूरत

सारे देश में अपने अपहरण से मशहूर हुए देश के प्रथम आईएएस अधिकारी विनील कृष्णा ने बयान दिया है कि अगर विकास का ढांचा नहीं सुधारा गया और लोगों तक विकास का नाम नहीं पहुंचा तो वह दिन दूर नहीं, जब अधिकारी या सत्ता में बैठे लोग, जनता के गुस्से का शिकार होंगे.

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बंगाल ने बढ़ाई चुनाव आयोग की चिंता

बंगाल की लड़ाई के मैदान में आजकल मेडिकल टीमों के दौरे तो ख़ूब हो रहे हैं, पर युद्ध विराम का कोई संकेत नहीं मिल रहा है. हत्याओं के बाद परिजनों के आंसू पोछने के लिए सत्तारूढ़ एवं विपक्षी दलों के नुमाइंदे तांता लगाए हुए हैं तो संवैधानिक प्रमुख राज्यपाल यह जान रहे हैं कि हालात कैसे हैं? उधर चुनावी चिंता में दुबले हो रहे चुनाव आयोग की टीमें भी गांवों की धूल फांक रही हैं.

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और लाल होगी बंगाल की धरती

कविता-नया साल मैंने कई साल पहले लिखी थी. ये उसी की शुरुआती लाइनें हैं. वह कोई साल होगा, जब नए साल कासूरज हिंसा एवं रक्तपात से गीली हुई धरती के क्षितिज पर उगा होगा. बंगाल के मौजूदा हालात पर यह कविता बिल्कुल फिट बैठती है.

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राहुल के बंगाल दौरे से राजनीति गरमाईः कांग्रेस और तृणमूल के बीच जंग छिड़ी

क्‍या मैं आपको चिड़िया जैसा दिखता हूं? कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी ने कोलकाता में ख़बरनवीसों से जब यह बात पूछी तो सभी सकपका गए. हालांकि इशारा समझते उन्हें देर नहीं लगी. 15 से 17 सितंबर तक बंगाल में राहुल के तूफानी दौरे के ठीक एक दिन पहले सिलीगुड़ी में ममता बनर्जी ने कहा था, हम वसंत की कोयल नहीं हैं.

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बंगाल को खाक कर देगी नानूर की चिंगारी

बंगाल के माथे पर देश की सांस्कृतिक राजधानी होने का ताज है, पर हाल के वर्षों में इसने कई और रिकार्ड बनाए हैं. किसी दल के लगातार 33 साल शासन में रहने का रिकॉर्ड इसके नाम है तो राजनीतिक हत्याओं के मामले में भी यह देश का सबसे कुख्यात राज्य बन गया है.

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बदलता बंगाल

यह महज़ एक संयोग था कि जिस दिन बंगाल के स्थानीय निकाय चुनावों उर्फ सेमी फाइनल के परिणाम आ रहे थे, उसी दिन गुजरात के साणंद में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी नैनो की पहली खेप को फीता काटकर रवाना कर रहे थे.

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पश्चिम बंगाल बना दुल्‍हनों का बाजार

बंगाल के सीमावर्ती ज़िलों में ओ पार यानी बांग्लादेश से लाई जाने वाली लड़कियां कटी पतंग की तरह होती हैं, जिन्हें लूटने के लिए कई हाथ एक साथ उठते हैं. इनमें होते हैं दलाल, पुलिस, स्थानीय नेता और पंचायत प्रतिनिधि. अवैध रूप से सीमा पार से आने वाली इन लड़कियों की मानसिक हालत बलि के लिए ले जाई जा रही गाय की तरह होती है.

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नक्‍सल क्रांति का एक जनक हताशा से हार गया

हताशा ने न जाने कितनी जानें ली हैं, पर अभी हाल में इसने एक ऐसे नेता को अपना शिकार बनाया है, जिसने आज से 43 साल पहले हथियारों के बल पर उस व्यवस्था को बदलने का सपना देखा था, जो किसानों व मज़दूरों का शोषण करती है, उनका हक़ मारती है. इस हताशा के ताजा शिकार हैं, कानू सान्याल.

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मुख्‍यमंत्री की कुर्सी अभी दूर है

रेलवे परियोजनाओं के उद्घाटन की हड़बड़ी के कारण एक रोचक वाकया हो गया. 20 मार्च को महाराजा एक्सप्रेस के उद्घाटन समारोह के लिए अख़बारों को जो विज्ञापन जारी किया गया, उसके ऩक्शे में दिल्ली को पाकिस्तान और कोलकाता को बंगाल की खाड़ी में दिखाया गया.

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भारत में नया बांग्‍लादेश गढ़ रहे हैं घुसपैठिए

बंगाल में एक फीलगुड कहावत है, ए पार बांग्ला, ओ पार बांग्ला. आम जनता की बात छोड़िए, मुख्यमंत्री एवं राज्य के दूसरे बड़े नेताओं को यह कहावत उचरते सुना जाता रहा है. संकेत सा़फ है, ओ पार बांग्ला के निवासी भी अपने बंधु हैं. भाषा एक है, संस्कृति एक है, फिर घुसपैठ को लेकर चिल्ल-पों काहे की. राज्य में भाजपा के अलावा कोई भी दूसरी पार्टी इस मुद्दे को नहीं उठाती.

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स्‍वायत परिषद पर गोरखा मान जाएंगे?

गोरखा जन मुक्ति मोर्चे के मुखिया विमल गुरुंग अपने आंदोलन को गांधीवादी करार देते हैं, पर ज़रूरत पड़ने पर वह

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कामरेड, बसु की विरासत संभालिए

उस कामरेड ने अपनी आंखें दान कर दीं और अपना शरीर भी अस्पताल को दे दिया. वे आम कम्युनिस्ट होंगे, जो आख़िरी दम तक रिटायर नहीं होते. लेकिन, ज्योति बसु नाम का कामरेड तो दम निकलने के बाद तक रिटायर नहीं हुआ. विरासत में इतना कुछ दे गया कि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी अगर अमल करे तो वह मौजूदा संकट से उबर जाएगी और आइंदा फिर इतनी ग़रीब नहीं होगी. बसु के जाने से ऐसा लगता है कि समय के साथ बदलने का संदेश देने वाला आख़िरी कामरेड चला गया.

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ज्योति बसु प्रधानमंत्री क्यों नहीं बन सके?

वर्ष 1997 में ज्योति बसु को प्रधानमंत्री बनाने से उनकी पार्टी ने ही इंकार कर दिया, तो बसु ने इसे क्यों भारतीय मार्क्सवाद की ऐतिहासिक भूल करार दिया? उन्हें अपने रुतबे से ज्यादा लगाव नहीं था.

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उत्तर बंगाल के आदिवासी टकराव के मूड में

उत्तर बंगाल की हरे सोने वाली धरती डुआर्स में बवाल मचा है. गोरखालैंड की आग से निकलती चिंगारियां हरी पत्तियों को झुलसाने लगी हैं. विमल गुरुंग इस आदिवासी बहुल इलाक़े को गोरखालैंड के ऩक्शे में शामिल करना चाहते हैं, जबकि यहां के बहुसंख्यक आदिवासी जैसे हैं-जहां हैं के आधार पर बंगाल में ही रहना चाहते हैं. बंद चाय बागानों की वजह से इस इलाक़े में पहले से ही भुखमरी के हालात हैं, उस पर गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (गोजमुमो)के पथावरोध आंदोलन ने जले पर नमक रगड़ने का सिलसिला शुरू किया है. इस आंदोलन से चाय की ढुलाई भी ठप है और पर्यटन के साथ-साथ तमाम आर्थिक गतिविधियां रुक गई हैं.

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हम नहीं बदलेंगे — वामदल

पहले सिंगुर, अब लालगढ…बुद्धदेव जी, लोग अब कहने लगे हैं कि यदि सारे कम्यूनिस्टों को बंगाल की खाडी में फेक दिया जाए तो बंगाल की स्थिति में सुधार आ जाएगा.
उई दादा ऐसा कहा क्या?
ये भी कहते हैं कि पिछले 40 वर्षो से तमाम गरीब मजदूरों का खून चूस चूस कर पार्टी नेताओं के गाल लाल लाल होते जा रहे है.
मौका दो तो मैं कुछ कहूं
गरीबी की विकृति में ही कम्यूनिज्म का सृजन हुआ. गरीबी में ही पार्टी का जीवन है. इसीलिए हमने छल, बल और दल से वह सबकुछ किया जिससे गरीबो की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार न हो क्योंकि…
यदि उनकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी तो वह धनी होंगे. सुख—सुविधा आएगी वह पूंजीवाद की तरफ आकर्षित हो जाएंगे. और हमारी दुकान बंद हो जाएगी.
यानि कि आप गरीबी की समस्या का हिस्सा है…
….शायद इसीलिए लोग कम्यूनिस्टों को बंगाल की खाडी में फेंकने की बात अब सोचने लगे हैं.
ओह, गंभीर बात है ऐसी परिस्थिति से तुरतं कुछ सीख लेना पडेगा
क्या सीख लेना पडेगा?
स्वीमिंग।।

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