जब महबूबा मुफ्ती ने अपनी बात मनवाई

जम्मू-कश्मीर में मार्च 2015 में भाजपा-पीडीपी के बेमेल गठबंधन की सरकार बनने के बाद से पीडीपी लगातार नुकसान उठती रही

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न आना इस देश में लाडो

‘यत्र नार्यास्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’ की बात करने वाले जिस समाज में हर घंटे 40 बलात्कार होते हों, ‘बेटी

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नॉएडा में नाबालिग ने किया 5 साल की बच्ची से बलात्कार

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के नॉएडा से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है दरअसल यहाँ 5 साल की मासूम

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भाई-बहन के रिश्ते को शर्मसार करने वाली घटना, पहले अगवा किया फिर…

नई दिल्ली, (राज लक्ष्मी मल्ल) : आय दिन हमे ऐसे मामले सुनने को मिलते हैं जिसमें रिश्ते नातों को भुलाकर

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गलत ट्रेन में चढ़कर दिल्ली आई लड़की को बलात्कार के बाद बेचा, दो गिरफ्तार

नई दिल्ली: भूलवश गलत ट्रेन में चढ़कर दिल्ली पहुंच गई एक लड़की को अगवा कर के बलात्कार करने का मामला

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आधार कार्ड-एक विशिष्ट घोटाला

यूरोप और अमेरिका सहित हर विकसित देश ने बायोमैट्रिक डाटा पर आधारित विशिष्ट परिचय पत्र देने का ़फैसला किया, लेकिन

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बांग्लादेश : गृहयुद्ध के हालात

बांग्लादेश में हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनमें 80 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. एक तरफ़ विपक्षी

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आदिवासी छात्राओं के साथ दुष्कर्म : कांकेर कई सवालो को जन्म देता है

कांकेर कई सवालो को जन्म देता है क्या आदिवासी होना इस मुल्क में गुनाह है? शायद हां, क्योंकि अगर शासन

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सबक छोड़ गया भारत बंद

आज़ाद भारत के इतिहास में शायद पहली मर्तबा ऐसा हुआ, जब छात्र, नौजवान, महिलाएं एवं सामाजिक संगठनों ने अपने स्तर पर भारत बंद और काला दिवस मनाने का फैसला किया. हालांकि राजनीतिक दलों द्वारा आयोजित किए जाने वाले भारत बंद की तरह इस बंद का असर यातायात और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर नहीं पड़ा.

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प्रजातंत्र बना लाठीतंत्र

एक बार लखनऊ में मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर जबरदस्त प्रदर्शन हुआ. प्रदर्शनकारी पूर्वांचल के अलग-अलग शहरों से लखनऊ पहुंचे थे, उनकी संख्या क़रीब 1500 रही होगी, उनमें किसान, मज़दूर एवं छात्रनेता भी थे, जो अपने भाषणों में मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ आग उगल रहे थे. वे सब अपने भाषणों में सीधे मुख्यमंत्री पर निशाना साध रहे थे. उस प्रदर्शन का नेतृत्व समाजवादी नेता चंद्रशेखर कर रहे थे.

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दक्षिण कोरिया से सबक़ लें

हमारे देश के छोटे-छोटे गांवों से लेकर महानगर तक जंगल बनते जा रहे हैं, जहां महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं. हालत यह है कि अ़खबारों के पन्ने बलात्कार और सामूहिक बलात्कार की खबरों से भरे रहते हैं. इससे निपटने के लिए सरकार को दक्षिण कोरिया की तरह सख्त क़दम उठाने होंगे.

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समाज को आईना दिखाती रिपोर्ट

हाल में यूनीसेफ द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत में 22 फीसदी लड़कियां कम उम्र में ही मां बन जाती हैं और 43 फीसदी पांच साल से कम उम्र के बच्चे कुपोषण का शिकार हैं. रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकतर बच्चे कमज़ोर और एनीमिया से ग्रसित हैं. इन क्षेत्रों के 48 प्रतिशत बच्चों का वज़न उनकी उम्र के अनुपात में बहुत कम है. यूनिसेफ द्वारा चिल्ड्रन इन अर्बन वर्ल्ड नाम से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरी ग़रीबों में यह आंकड़ा और भी चिंताजनक है, जहां गंभीर बीमारियों का स्तर गांव की तुलना में अधिक है.

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जस्टिस काटजू की बातों पर हंगामा क्यों

आखिर जस्टिस काटजू ने ऐसा क्या कह दिया कि दिल्ली में तू़फान खड़ा हो गया. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जितने महान सरदार हैं, वे सब तन कर खड़े हो गए, जैसे लगा कि उनका बलात्कार होने वाला है और उन्हें अपनी इज्ज़त की रक्षा करनी है.

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मणिपुर और शर्मिला को अन्ना का इंतज़ार

अन्ना हजारे के आंदोलन ने संसद को हिला दिया. सरकार अन्ना की आवाज़ अनसुना नहीं कर पाई, उसने अन्ना की मांग को गंभीरता से लिया और उस पर अमल भी करना शुरू कर दिया. पूरे देश की जनता ने अन्ना का साथ दिया. दो सप्ताह तक पूरा देश अन्नामय रहा. दूसरी तऱफ इरोम शर्मिला चनु हैं

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निराशा से भरा संपादकीय

मीडिया पर वह यहीं नहीं रुकते, उसी में आगे कहते हैं-देश की राजधानी में हर रोज दर्जनों हत्याएं, बलात्कार और लूटपाट की घटनाएं आम हो चुकी हैं. ग़रीबी-अमीरी के बीच की खाई अपराधों और हत्याओं से पाटी जा रही है.

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मां-बेटे के रिश्ते की नई इबारत

चंद साल पहले की बात है, आस्ट्रिया से एक ऐसी ख़बर आई थी, जिसने पूरे विश्व को झकझोर कर रख दिया था. एक ऐसी क्राइम स्टोरी, जो दुनिया भर के अख़बारों में कई दिनों तक सुर्ख़ियां बनी. आस्ट्रिया निवासी एक पापी पिता जोश फ्रिट्ज ने अपनी बेटी को चौबीस साल तक बंधक बनाकर रखा और इस दौरान उसके साथ बलात्कार करता रहा.

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आदिवासी लड़की से बलात्कारः रसू़खदारों के आगे पुलिस कमज़ोर

सरकार के सारे क़ायदे क़ानून और नियम केवल आम लोगों को ही प्रताड़ित करने के लिए होते हैं. जब एक आदिवासी लड़की किसी मंत्री के भतीजे पर शारीरिक उत्पीड़न का आरोप लगाए तो पुलिस भी मौन हो जाती है.

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दलित, अल्पसंख्यक सशक्तीकरण का दस्तावेज़

एक जमाने में पत्रकारिता समाज के उन लोगों के साथ खड़ी होती थी, जो वंचित और शोषित कहे जाते थे और पत्रकार उनके हक़ के लिए खड़े हो जाते थे. पिछड़ों और दलितों को न्याय दिलाने की पत्रकारिता अब समाचार माध्यमों से विलुप्त होती दिख रही है. टेलीविज़न ने इस तरह की पत्रकारिता का बड़ा नुक़सान किया.

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स्‍कूलों में बच्‍चों की सुरक्षा का सवाल

हाल में उड़ीसा विधानसभा में एक ऐसे मुद्दे को लेकर गहमागहमी बढ़ गई, जिसका सीधा संबंध ग़रीब आदिवासियों की बेबसी और लाचारी की आड़ में उनके शोषण से जुड़ा था. राज्य सरकार द्वारा संचालित जनजातीय विद्यालय, जो ग़रीब एवं पिछड़े आदिवासी छात्रों को शिक्षा का उजाला दिखाने के लिए खोले गए थे, उनके उत्पीड़न का केंद्र बन गए.

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बढ़ रही हैं दुष्‍कर्म की घटनाएं

सरकार बालिकाओं को संरक्षण देने और उनके सर्वांगीण विकास के लिए अनेक कार्यक्रमों पर अमल कर रही है, लेकिन यह एक कटु सत्य है कि इस राज्य में बालिकाएं सुरक्षित नहीं हैं. प्रदेश में मासूम बच्चियों के उत्पीड़न की घटनाएं तेज़ी से बढ़ रही हैं. महज़ 100 दिन में तीस नाबालिग लड़कियां दुष्कर्म की शिकार हुई हैं. इससे सा़फ है कि हर तीसरे दिन एक लड़की दरिंदों की शिकार हो रही हैं.

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दो अधिकारी, एक आरोप, एक को सज़ा, दूसरे को इनाम

झारखंड में कई वर्षों से जारी है आईपीएस अधिकारियों के दो गुटों की जंग. एक-दूसरे को फंसाने और बचाने का खेल वर्षों से चल रहा है. इसके लिए वे किसी को मोहरा बनाने में संकोच नहीं करते. राज्य के पूर्व डीजीपी वीडी राम करोड़ों रुपये के एसएस फंड घोटाले के आरोपी हैं. उनके विरुद्ध तीन पीआईएल हाईकोर्ट में लंबित हैं.

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महिला और बाल व्यापार आदिवासी बालिकाओं की तस्‍करी

मध्य प्रदेश के बालाघाट, छिन्दवाड़ा, मण्डला, डिण्डौरी आदि आदिवासी जनसंख्या बहुल ज़िलों में आए दिन आदिवासी बालिकाओं के अचानक ग़ायब हो जाने की खबरें अब सामान्य घटना हो गई हैं. पुलिस ज़्यादातर घटनाओं की रिपोर्ट दर्ज़ नहीं करती और मजबूरी में यदि रिपोर्ट दर्ज की जाती है तो गुमशुदगी के मद में रिपोर्ट दर्ज़ कर उसे काग़ज़ों में ही द़फन कर दिया जाता है.

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महिलाओं को समान दर्जा समाज की हक़ीक़त नहीं

आज हर कोई भारतीय समाज में महिलाओं को समानता की बात करता है, लेकिन जो बातें की जा रही हैं या जिस बात की वकालत की जा रही है, हक़ीक़त उससे का़फी अलग है. पुरुष प्रधान भारतीय समाज में सामाजिक-आर्थिक प्रतिबंधों के चलते महिलाएं हाशिए पर हैं.

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पुस्‍तक अंश: मुन्‍नी मोबाइल- 9

शाहआलम राहत शिविर में यह कथा स़िर्फ खालिद की ही नहीं है. यहां रहने वाले हर आदमी की कहानी कुछ ऐसी है कि जानने वाले लोगों की नींद उड़ जाए. शिविर में कोई भी मर्द औरत साबुत नहीं है. किसी की टांग कटी है. किसी को गोली लगी है. कोई आधा जला है तो कोई पूरा.

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यह कैसा सुशासन?

ग्‍यारह फीसदी से ज़्यादा की विकास दर हासिल कर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फूले नहीं समा रहे हैं. राज्य की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए तमाम पुरस्कार पाकर वह इतरा रहे हैं. देश भर में इस बात को लेकर उनकी ज़बरदस्त प्रशंसा हो रही है कि बिहार को पटरी पर लाकर उन्होंने ऐतिहासिक काम किया है.

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पुस्‍तक अंशः मुन्‍नी मोबाइल- 6

गुजरात का मीडिया दो भागों में बंट गया था. एक दंगों के ग़ुनहगारों की पहचान कर रहा था, तो दूसरा दंगाइयों की हौसलाअफजाई करने में मशगूल था. मीडिया का यह हिस्सा आग में घी डालने का काम पूरी शिद्दत से कर रहा था. अफवाहें फैलाने में दंगाइयों से बड़ी भूमिका स्थानीय मीडिया की थी. गुजराती लोक समाचार और जनसंदेश में प्रतिस्पर्धा थी. यदि गुजराती लोक समाचार एक दिन यह छापता कि मुसलमानों ने छह हिंदू लड़कियों के वक्ष काट लिए, तो जन संदेश एक दर्ज़न हिंदू लड़कियों के साथ बलात्कार की ख़बर छाप देता था. हिंदू ब्रिगेड के मुखपत्र बन गए थे ये अख़बार. दंगा उनके व्यवसायिक हितों को बख़ूबी पूरा कर रहा था. इनकी प्रसार संख्या भी बढ़ रही थी. सरकार का भी इन्हें समर्थन प्राप्त था. इनकी ख़बरों की सत्यता पर सवालिया निशान लगाते हुए इन अख़बारों के ख़िला़फ दंतविहीन संस्था प्रेस काउंसिल में भी शिक़ायतें की गईं. लेकिन कुछ नहीं हुआ.

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