राजनीति के नए सिद्धांत

भारत की राजनीति में नए सैद्धांतिक दर्शन हो रहे हैं. पता नहीं ये सैद्धांतिक दर्शन भविष्य में क्या गुल खिलाएंगे, पर इतना लगता है कि धुर राजनीतिक विरोधी भी एक साथ खड़े होने का रास्ता निकाल सकते हैं. लेकिन लोकसभा या राज्यसभा में क्या अब ऐसी ही बहसें होंगी, जैसी इस सत्र में देखने को मिली हैं. मानना चाहिए कि ऐसा ही होगा. ऐसा मानने का आधार है. दरअसल, अब इस बात की चिंता नहीं है कि हिंदुस्तान में आम जनता का हित भी महत्वपूर्ण है.

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सुशासन बाबू की कहानी

नीतीश कुमार की सरकार ने बिहार में अपने सुशासन के छह साल पूरे कर लिए. सूबे की जनता ने नीतीश के कामों को देखते हुए प्रचंड बहुमत से उन्हें दूसरी बार सूबे की सत्ता सौंप दी थी. नीतीश कुमार देश में एक ऐसे नेता के तौर पर उभरे, जो बिहार के विकास को लेकर न स़िर्फ गंभीर दिखाई दिया, बल्कि गंभीरता से काम भी करता दिखा.

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मेरी दुनिया

आपकी तारीफ?।
मैं हार्स ट्रेडर हूं घोडों को इधर—उधर करना मेरा काम है.
हार्स ट्रेडर? राजनीति में हार्स ट्रेडर का क्या काम?।
अरे, जब इलेक्शन में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिलता तो मेरा हुनर काम आता है.
खुल कर बताओ.
बहुमत जुटाने के लिए में नेताओं की ट्रेडिंग यानी उन्हें इधर—उधर करता हूं. पैसा और मिनिस्ट्री के बदले समर्थन दिलाता हूं.
समर्थन के टर्मस एण्ड कंडीशंस पर गुप्त समझौता कराता हूं नई सरकार का गठन कराता हूं.
राजनीति में आकर मेरी योग्यता में हार्स ट्रेंडिग के अतिरिक्त एक और तजुर्बा जुड गया है.
कौन सा तजुर्बा?
गधों की ट्रेडिंग का।।

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