अंतराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2012 सशक्‍त कृषि नीति बनाने की जरूरत

संसद द्वारा सहकारिता समितियों के सशक्तिकरण के लिए संविधान संशोधन (111) विधेयक 2009 को मंज़ूरी मिलने के बाद भारत की सहकारी संस्थाएं पहले से ज़्यादा स्वतंत्र और मज़बूत हो जाएंगी. विधेयक पारित होने के बाद निश्चित तौर पर देश की लाखों सहकारी समितियों को भी पंचायतीराज की तरह स्वायत्त अधिकार मिल जाएगा. हालांकि इस मामले में केंद्र एवं राज्य सरकारों को अभी कुछ और पहल करने की ज़रूरत है, ख़ासकर वित्तीय अधिकारों और राज्यों की सहकारी समितियों में एक समान क़ानून को लेकर.

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प्रधानमंत्री विदेशी पूंजी लाएंगे

विदेशी पूंजी निवेश के बारे में पिछली बार सरकार ने फैसला ले लिया था, लेकिन संसद के अंदर यूपीए के सहयोगियों ने ही ऐसा विरोध किया कि सरकार को पीछे हटना पड़ा. खुदरा बाज़ार में विदेशी निवेश का विरोध करने वालों में ममता बनर्जी सबसे आगे रहीं. सरकार ने कमाल कर दिया. भारत दौरे पर आई अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ममता से मिलने सीधे कोलकाता पहुंच गईं.

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ममता-हिलेरी की मुलाकात के मायने

अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन भारत आईं. उनके आने से पहले ही उनकी यात्रा के उद्देश्यों की जानकारी दे दी गई. उनकी यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारतीय खुदरा बाज़ार में विदेशी निवेश को मंजूरी दिलाने के लिए भारत सरकार पर दबाव बनाना और ईरान से भारत में किए जा रहे तेल आयात को कम करके ईरान पर दबाव बनाना था.

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शेयर बाज़ार का जुआ

अब मान लीजिए कि आप थोड़े-बहुत जुआरी भी हैं. आप जुए से अत्यंत नफरत करते हों तो भी वर्तमान आर्थिक व्यवस्था के ढांचे को समझने के लिए जुए की जानकारी भी आवश्यक है. शेयर बाज़ार में व्यापार के अलावा एक विशेष खेल खेला जाता है, जिसे सट्टा कहते हैं. इसमें खयाली शेयरों की खयाली क़ीमतें दी-ली जाती हैं.

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अतिरिक्त धन का मायाचक्र

अब राष्ट्र के लिए महत्व की बात है-कि नई-नई कंपनियां खोलकर नए-नए काऱखाने या फैक्टरियां लगाई जाएं, उत्पादन बढ़ाया जाए, उसमें ही फालतू पड़े सब रुपयों का उपयोग होना चाहिए. मान लीजिए आपके पास 5 लाख रुपये फालतू पड़े हैं. आप शेयर बाज़ार में किसी कंपनी के शेयर ख़रीदते हैं.

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पूंजी बाज़ार

फिर भी, मान लीजिए आपके पास थोड़े रुपये फालतू पड़े हुए हैं, तो आप उनका किस तरह से इंवेस्टमेंट करते हैं, इसकी चालू प्रणाली कैसी है, इसका ज़रा अवलोकन कर लें. जहां आपका रुपया काम में लाया जाता है या इंवेस्ट होता है, उस संस्था को पूंजी बाज़ार कहते हैं. कहते हैं, फिर भी यह कोई इस तरह का बाज़ार नहीं है जहां हाट लगी हो.

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शेखावटीः जैविक खेती और बाजार प्रणाली

कुछ व़क्त पहले तक लोग ऑर्गेनिक फूड की ख़ूबियों से वाक़ि़फ नहीं थे. यह विदेशियों की पसंद ज़्यादा हुआ करता था, पर अब हालात बदल चुके हैं. अब भारतीय बाज़ार न स़िर्फ ऑर्गेनिक उत्पादों से भरे पड़े हैं, बल्कि बड़े पैमाने पर जैविक खेती भी की जा रही है. भारत में जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने का श्रेय देश के मशहूर उद्योगपति कमल मोरारका द्वारा संचालित मोरारका फाउंडेशन को जाता है.

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बाज़ार में अब गे बियर

खूब जमेगा रंग, जब मिल बैठेंगे तीन यार… यह पंच अब स़िर्फ आप ही नहीं, बल्कि समलैंगिक भी मार सकते हैं. आस्ट्रेलिया की एक प्रमुख शराब निर्माता कंपनी मेक्सिकन ब्रेबरी ने दुनिया में पहली बार समलैंगिकों के लिए ख़ास बियर बाज़ार में उतारी है.

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ग्राम स्‍वराज की ओर बढ़ते कदम

कहते हैं कि जब सरकारी तंत्र पूरी तरह से सड़ने लगे और लोकतंत्र स़िर्फ नाम का ही रह जाए तो ऐसे में विकास का रास्ता ज़डों की ओर लौटने से ही मिलता है. किसी भी देश के विकास की इमारत में उस देश के गांव और किसान नींव का काम करते हैं.

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ऐतिहासिक विक्टोरिया मार्केट अग्निकांड में स्वाहा

ग्वालियर का ऐतिहासिक विक्टोरिया मार्केट 105 वर्ष का स़फर पूरा करने के बाद शॉर्ट सर्किट के कारण अपना अस्तित्व खो चुका है. इस बाज़ार में व्यवसाय कर रहे 116 परिवार आज रोज़ी-रोटी के लिए मोहताज है.

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जोश है बातें करने का

आधुनिक युग में तकनीक ने लोगों का जीवन आसान बना दिया है. इस क्रम में सबसे पहला नंबर है मोबाइल का. मोबाइल के प्रति युवाओं का क्रेज देखकर कई कंपनियां खुद को भारतीय बाज़ार में साबित करने के लिए नए-नए लुभावने ऑफर ला रही हैं.

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उत्तर भारत बांग्‍लादेशी दुल्‍हनों का बड़ा बाजार

मां तुम मुझे अब कभी नहीं देख सकोगी. मुझे भूल जाओ. सोच लो कि तुम्हारी बेटी नज़मा अब मर गई. मैं अपने बच्चों को नहीं छोड़ सकती और वे यहां आ नहीं सकते. वे तुम्हें कभी नानी नहीं कह पाएंगे. मेरी ज़िंदगी नर्क हो गई है, पर मैं कुछ नहीं कर सकती, उक्त उद्गार हैं उत्तर प्रदेश के बरेली ज़िले में ब्याही तहमीना नामक दुल्हन के, जो सात साल पहले अपनी मां से मिलने बांग्लादेश लौटी थी.

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सार–संक्षेप : मछलियों की पचास प्रजातियां विलुप्त

मध्य प्रदेश की जीवनरेखा कही जाने वाली पवित्र नदी नर्मदा में प्रदूषण का स्तर घातक स्थिति में पहुंच चुका है. पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि नर्मदा नदी में बढ़ते प्रदूषण और छोटे-बड़े बांधों से पानी में ठहराव के कारण कई स्थानों पर मछलियों के जीवन पर संकट मंडरा रहा है. यह जानकारी नर्मदा समग्र बांद्राभान (होशंगाबाद) में आयोजित अंतरराष्ट्रीय नदी महोत्सव में आए विशेषज्ञों ने दी.

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