सौर ऊर्जा का लक्ष्य विदेशी कंपनियों से नहीं हासिल होगा

केंद्र सरकार ने सौर ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में लक्ष्य तो निर्धारित कर लिए, लेकिन इस लक्ष्य को सिर्फ विदेशी

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हर गांव पहुंची बिजली, लेकिन हर घर रौशन होना बाक़ी

नीतीश कुमार के बिहार की सत्ता संभालने से पहले और उसके कुछ समय बाद तक दिल्ली से जब भी कोई

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खीरी में ख़राब स्वास्थ्य सेवाएं, झूठ के आसरे सीएमओ

चुनावी बिगुल बज चुका है, लेकिन सच मानिए, पूरे प्रदेश की जनता विभिन्न मुद्दों जैसे बिजली, पानी, कानून, रोजगार, शिक्षा

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दिल्ली का बाबू : जीएसटी परिषद में कौन जाएगा

भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के बाबू नए नवेले वस्तु एवं सेवा कर परिषद सचिवालय में महत्वपूर्ण पदों पर जाने वाले

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सांसद ने गोद लिया और फिर अनाथ छोड़ दिया : अच्छे दिनों पर भारी आदर्श ग्राम पठारी

महोबा के इस गांव में आजादी के बाद से अब तक पानी, बिजली, सड़क नदारद मोदी का नाम आते ही

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हास्यास्पद दावे करना बंद कीजिए

मौजूदा केंद्र सरकार के दो साल बीत चुके हैं. व्यक्तिगत तौर पर मैं मानता हूं कि केंद्र सरकार को जो

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प्रचार नहीं, लोगों का सपना पूरा कीजिए

मोदी सरकार के दो साल पूरे हो गए. दो साल पूरे होने पर जश्न मनाना एक परंपरा भी है और

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नीतीश बजट पर नीतीश निश्चय

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चयों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बिहार की महा-गठबंधन सरकार ने अपना पहला बजट पेश

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सत्ता क्या गई, सारी रौनक चली गई

गोपालगंज का फुलवरिया गांव उस समय चर्चा में आया, जब 1990 में लालू प्रसाद पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने.

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ऐसे साथियों के होते दुश्मनों की क्या ज़रूरत

सभी राजनीतिक दलों को वैचारिक रूप से सहमति रखने वाली अपनी छोटी-छोटी इकाइयों से परेशानी रहती है. उक्त लोग पार्टी

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मोदी का रथ रोकेंगे नीतीश

कहते हैं, सियासत और सांप-सीढ़ी का खेल एक ही तरह का होता है. दोनों खेलों के नियम भले ही अलग-

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भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ पूरे देश को लड़ना होगा

दस सालों के बाद भारत के प्रधानमंत्री को लोगों के बीच भाषण करते देखना सुखद लगता है और खासकर तब,

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कठोर निर्णय लेने होंगे!

उन्नीस सौ तीस के दशक के दौरान अर्जेंटीना दुनिया के पांच सबसे अमीर देशों में शामिल हुआ करता था, लेकिन

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बिजली के लिए जिम्मेदार कौन

गर्मियों का मौसम आते ही देश में बिजली आपूर्ति में कमी कोई असामान्य बात नहीं है. पिछले दिनों जैसे-जैसे मौसम

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नारी की कहानी है नोरा

स्त्री विरोधी धारणाओं की बुनियाद पर बने समाज की परतों को कुरेदती नोरा बेहद सिलसिलेबार ढंग से अपनी कहानी कहती है.

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पानी का महत्व समझना होगा

जम्मू-कश्मीर का जिला पुंछ सरहद पर होने की वजह से हमेशा सुर्खियों में रहता है. यह जिला सीमावर्ती होने की

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15वीं लोकसभा और उपेक्षा का सिलसिला जारी

पूर्वोत्तर के लोग सड़क, शिक्षा, बिजली, पानी एवं रोज़गार के मामले में आज भी सौ साल पीछे हैं. गांवों में

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पीएम कि कुर्सी के काबिल कौन

पांच राज्यों के चुनाव संपन्न हो चुके हैं और अब लोकसभा चुनाव होने हैं. इसके लिए सभी राजनीतिक दल अपने-अपने

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ज़बानी जमा-खर्च पर लड़े जा रहे चुनाव

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं. कहने को इन चुनावों में हर पार्टी ने अपना घोषणा-पत्र जारी

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राष्ट्रीय संकट का निवारण कैसे हो

यह संघर्ष राष्ट्र के वर्तमान संकट से उबरने की अनुक्रिया का एक अविच्छिन्न भाग होगा. यह संघर्ष स्थानीय, क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय

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बिजली की टेंशन को बॉय बॉय

अगर अचानक बिजली चली जाए, तो हम बिजली आने का इंतज़ार करते हैं, क्योंकि बिजली आएगी तो हम फोन, कैमरा, टॉर्च

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केजरीवाल का असहयोग आंदोलन : …ताकि राजनीति जनता के लिए हो

बिजली और पानी के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने पिछले दिनों दिल्ली के सुंदरनगरी इला़के

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ग्रामसभा के अधिकार!

हमने देखा कि पंचायती राज की वर्तमान योजना के अंतर्गत आज जो पंचायतें हैं, वे गांधी जी की कल्पना की

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क्या करें ऐसे प्रधानमंत्री का?

एक फिल्म आई थी, जिसका एक बहुत मशहूर संवाद था, तारीख़ पर तारीख़, तारीख़ पर तारीख़, तारीख़ पर तारीख़. दरअसल,

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एक नहीं, देश को कई केजरीवाल चाहिए

साधारण पोशाक में किसी आम आदमी की तरह दुबला-पतला नज़र आने वाला शख्स, जो बगल से गुजर जाए तो शायद उस पर किसी की नज़र भी न पड़े, आज देश के करोड़ों लोगों की नज़रों में एक आशा बनकर उभरा है. तीखी बोली, तीखे तर्क और ज़िद्दी होने का एहसास दिलाने वाला शख्स अरविंद केजरीवाल आज घर-घर में एक चर्चा का विषय बन बैठा है. अरविंद केजरीवाल की कई अच्छाइयां हैं तो कुछ बुराइयां भी हैं. उनकी अच्छाइयों और बुराइयों का विश्लेषण किया जा सकता है, लेकिन इस बात पर दो राय नहीं है कि देश में आज भ्रष्टाचार के खिला़फ जो माहौल बना है, उसमें अरविंद केजरीवाल का बड़ा योगदान है.

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लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ मत कीजिए

सरकार का संकट उसकी अपनी कार्यप्रणाली का नतीजा है. सरकार काम कर रही है, लेकिन पार्टी काम नहीं कर रही है और हक़ीक़त यह है कि कांग्रेस पार्टी की कोई सोच भी नहीं है, वह सरकार का एजेंडा मानने के लिए मजबूर है. सरकार को लगता है कि उसे वे सारे काम अब आनन-फानन में कर लेने चाहिए, जिनका वायदा वह अमेरिकन फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशंस या अमेरिकी नीति निर्धारकों से कर चुकी है.

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जनता को चिढ़ाइए मत, जनता से डरिए

शायद सरकारें कभी नहीं समझेंगी कि उनके अनसुनेपन का या उनकी असंवेदनशीलता का लोगों पर क्या असर पड़ता है. फिर चाहे वह सरकार दिल्ली की हो या चाहे वह सरकार मध्य प्रदेश की हो या फिर वह सरकार तमिलनाडु की हो. कश्मीर में हम कश्मीर की राज्य सरकार की बात इसलिए नहीं कर सकते, क्योंकि कश्मीर की राज्य सरकार का कहना है कि वह जो कहती है केंद्र सरकार के कहने पर कहती है, और जो करती है वह केंद्र सरकार के करने पर करती है.

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इतिहास कभी मा़फ नहीं करता

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पंद्रह अगस्त को लाल क़िले से देश को संबोधित किया. संबोधन से पहले लोग आशा कर रहे थे कि वह उन सारे सवालों का जवाब देंगे, जो देश के सामने हैं या जिन्हें उनके सामने उठाया जा रहा है. विरोधी दल तो कोई सवाल उठा नहीं रहे हैं, सवाल स़िर्फ अन्ना हजारे और बाबा रामदेव उठा रहे हैं. उन सवालों को जनता का समर्थन भी हासिल है, जिनका जवाब प्रधानमंत्री को लाल क़िले से देना चाहिए था.

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उत्तराखंडः पिंडरगंगा घाटी, ऐसा विकास किसे चाहिए

पिंडरगंगा घाटी, ज़िला चमोली, उत्तराखंड में प्रस्तावित देवसारी जल विद्युत परियोजना के विरोध में वहां की जनता का आंदोलन जारी है. गंगा की सहायक नदी पिंडरगंगा पर बांध बनाकर उसे खतरे में डालने की कोशिशों का विरोध जारी है. इस परियोजना की पर्यावरणीय जन सुनवाई में भी प्रभावित लोगों को बोलने का मौक़ा नहीं मिला. आंदोलनकारी इस परियोजना में प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका पर भी सवाल उठा रहे हैं.

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उत्तर प्रदेश : नई औधोगिक नीति से बनेगी नई तस्वीर

हाल के कुछ वर्षों में राज्य में औद्योगिक विकास की गति पूरी तरह अवरुद्ध हो गई है. मायावती के शासनकाल में न तो कोई नया उद्योग लगा और न चालू उद्योगों को पनपने का कोई मौका दिया गया. अखिलेश सरकार के सामने औद्योगिक विकास एक बड़ी चुनौती है. इसके लिए वह चिंतित भी हैं. उनकी यह चिंता विधानसभा सत्र के दौरान सा़फ-सा़फ दिखाई पड़ रही थी.

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