मोदी का रथ रोकेंगे नीतीश

कहते हैं, सियासत और सांप-सीढ़ी का खेल एक ही तरह का होता है. दोनों खेलों के नियम भले ही अलग-

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राष्ट्रीय संकट का निवारण कैसे हो

यह संघर्ष राष्ट्र के वर्तमान संकट से उबरने की अनुक्रिया का एक अविच्छिन्न भाग होगा. यह संघर्ष स्थानीय, क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय

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भारतीय बीज जीन बैंक पर खतरा : निजी कृषि कंपनियों के हाथों बेचने की साजिश

यूनेस्को ने भारत के कई स्थानों की जैव विविधता को विश्व के लिए महत्वपूर्ण कृषि विरासत एवं खाद्य सुरक्षा के लिए उपयोगी मानते हुए उन्हें संरक्षित करने की बात कही है. 12वीं शताब्दी में ही रूस के प्रसिद्ध वनस्पति विज्ञानी निकोलाई वाविलो ने भारत को कई फसलों का उत्पत्ति केंद्र (ओरिजिन ऑफ क्रोप) बताया था. फिर भी जैव विविधताओं से भरे इस देश में जब एक किसान को विदेशी कंपनियों से बीज खरीदने पड़ें तो इसे क्या कहेंगे?

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बिहारः क़िस्मत के मारे क़िसान

राज्य सरकार के कृषि विभाग के अधिकारियों ने आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र से बड़ी-बड़ी कंपनियों के मूंग के बीज मंगवा कर किसानों के बीच उनका मुफ्त वितरण कराया. साथ ही खाद, कीटनाशक एवं खरपतवार नाशक भी वितरित किए गए. पौधे ख़ूब लहलहाए, उन्हें देखकर किसान हर्षित थे, लेकिन उन पौधों में दाने नहीं आए.

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बिना पकाए चावल खाओ

यह खबर उन लोगों के लिए है, जो खाना पकाने के मामले में ज़बरदस्त आलसी हैं. वैज्ञानिकों ने चावल की ऐसी क़िस्म विकसित करने का दावा किया है, जिसे खाने से पहले पकाना आवश्यक नहीं होगा. इस चावल को केवल पानी में भिगोना ज़रूरी होगा. चावल की यह क़िस्म कटक (उड़ीसा) स्थित केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) ने विकसित की है.

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बीटी बीज यानी किसानों की बर्बादी

संप्रग सरकार की जो प्रतिबद्धता किसान और खेती से जुड़े स्थानीय संसाधनों के प्रति होनी चाहिए, वह विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रति दिखाई दे रही है. इस मानसिकता से उपजे हालात कालांतर में देश की बहुसंख्यक आबादी की आत्मनिर्भरता को परावलंबी बना देने के उपाय हैं.

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नकली बीज की मार से बेहाल किसानः पसीने की जगह माथे से रिसने लगा खून

अच्छी पैदावार के लिए खेतों में पसीना बहाने वाले किसानों के माथे से इस बार पसीने की शक्ल में खून बह रहा है. दरअसल नकली बीजों का काला कारोबार करने वालों ने किसानों को असली बीज के पैकेट में मक्के के नकली बीज बेच दिए, जिसके कारण पैदावार सही नहीं हुई.

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