जनसमस्याओं के समाधान की इच्छाशक्ति किसी भी राजनीतिक दल में नहीं है

अभी भी देश में ऐसे लोगों की बड़ी संख्या है, जो चुनाव में किस पार्टी ने क्या किया और कौन

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भाजपा सांसद श्यामाचरण गुप्ता का बयान नोटबंदी से बेरोज़गारी बढ़ी है

नोटबंदी के एक वर्ष पूरे होने पर केन्द्र में सत्ताधारी भाजपा और केन्द्रीय मंत्री कालाधन से निपटने के लिए नोटबंदी

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मोदी सरकार ने भी स्वीकार किया, अभी तक तो नहीं आए अच्छे दिन

नई दिल्ली। अच्छे दिनों का वादा करके सत्ता में आई मोदी सरकार को 3 साल से ज्यादा का वक्त बीत

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सभी पार्टियों में अम्बेडकर को अपना दिखाने की रेस : हित नहीं, वोट हथियाने की होड़

कांग्रेस से लेकर भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी से लेकर समाजवादी पार्टी तक सब में दलितवाद की होड़

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क्या इस समर्पण से शांति आएगी

यूं तो पूर्वोत्तर में कार्यरत अधिकतर अलगाववादी संगठन धीरे-धीरे शांति के रास्ते पर आने के लिए तैयार हो रहे हैं

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जनरल वी के सिंह और अन्‍ना हजारे की चुनौतियां

भारत में लोकतंत्र की इतनी दुर्दशा आज़ादी के बाद कभी नहीं हुई थी. संसदीय लोकतंत्र में राजनीतिक दलों का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है, लेकिन विडंबना यह है कि आज संसदीय लोकतंत्र को चलाने वाले सारे दलों का चरित्र लगभग एक जैसा हो गया है. चाहे कांग्रेस हो या भारतीय जनता पार्टी या अन्य राजनीतिक दल, जिनका प्रतिनिधित्व संसद में है या फिर वे सभी, जो किसी न किसी राज्य में सरकार में हैं, सभी का व्यवहार सरकारी दल जैसा हो गया है.

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बापू की वस्तुओं की नीलामी पर तीखी प्रतिक्रियाः कांग्रेस गांधी की गुनहगार है

मोहनदास करम चंद गांधी यानी महात्मा गांधी के निधन को 65 वर्षों से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज भी वह पूरी दुनिया के लिए उतने ही प्रासंगिक नज़र आते हैं, जितने वह जीते जी हुआ करते थे. गांधी जी की समकालीन कई महान हस्तियां इतिहास के पन्नों तक सिमट कर रह गई हैं, लेकिन गांधी दर्शन आज भी जीने की कला बना हुआ है. कुछ मामलों में तो लगता है कि आज उनकी प्रासंगिकता ज़्यादा बढ़ गई है.

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पाकिस्‍तान : अर्थव्‍यवस्‍था पटरी पर कैसे लौटेगी

मौजूदा समय में पाकिस्तान आर्थिक दुश्वारियों के सबसे खराब दौर से गुजर रहा है. हालांकि स्थिति से निपटने के लिए सरकार हरसंभव कोशिश कर रही है, अर्थव्यवस्था में स्थिरता और मंदी से बचने के लिए तमाम नीतियां बनाई जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अभी भी काफी खराब हैं.

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आओ बनाएं अपना मध्‍यप्रदेश बढ़ती बेरोजगारी घटते रोजगार

गरीबी और पिछड़ेपन की समस्याओं से त्रस्त मध्य प्रदेश को खुशहाल और संपन्न राज्य बनाने का सुनहरा सपना दिखाने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेक इरादों की सराहना की जानी चाहिए, लेकिन नेक इरादों के बावजूद उनमें और उनकी सरकार में संकल्प शक्ति नहीं दिखती है, इसीलिए राज्य के विकास और जनकल्याण की तमाम योजनाएं भारी भरकम खर्च के बावजूद प्रभावशून्य और परिणामशून्य ही नज़र आती हैं.

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बुंदेलखंड बेबस और बदहाल है

बुंदेलखंड में लोग ज़िंदगी जीते नहीं, ढोते हैं. प्रकृति और व्यवस्था दोनों ही उनकी कड़ी परीक्षा लेती हैं. ब़ंजर जमीन, पानी की कमी, बेरोजगारी, विकास योजनाओं का अभाव और सरकारी-प्रशासनिक उपेक्षा ने यहां लोगों का जीना मुहाल कर रखा है. हद तो यह कि उन्हें मिलने वाली मदद भी सियासी दांवपेंच में उलझ कर रह जाती है.

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