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Breast Cancer
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Azadi Ki Doosri Ladai Part-6
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करों द्वारा प्राप्त सरकारी आय
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Posts Tagged ‘बैंक’
एक साधारण बजट
एक साधारण बजट

अमेरिका का एक कलाकार था हाउदनी, जो लोगों को मोहित करने की कला जानता था. वह लोगों को वास्तविकता का पता नहीं लगने देता था. पी चिदंबरम ने अपना आठवां बजट पेश करते हुए हाउदनी वाली कला का प्रदर्शन किया है. हालांकि, परिस्थितियां अच्छी नहीं हैं, क्योंकि जीडीपी ग्रोथ पांच प्रतिशत के आसपास है और [...]

Tags: अमेरिका, करोड़, कांग्रेस, ग़रीबों, चुनाव, चुनौतियां, पी चिदंबरम, प्रणब मुखर्जी, बजट, बजट पेश, बाज़ीगरी, बैंक, महंगाई, महंगाई एवं विकास, महंगाई दर, महिलाओं, यशवंत सिन्हा, युवाओं, यूपीए, राजकोष एवं कल्याणकारी, राजकोषीय घाटा, राजस्व विकास, राष्ट्रपति भवन, लोकप्रियता, वित्त मंत्रालय, वित्त मंत्री, विदेशी निवेश, साधारण, हाउदनी
Posted in चुनाव, राजनीति, स्टोरी-6 by Author: मेघनाद देसाई | No Comments » | Read More...
यूपीए सरकार का नया कारनामा : किसान कर्ज माफी घोटाला
यूपीए सरकार का नया कारनामा : किसान कर्ज माफी घोटाला

आने वाले दिनों में यूपीए सरकार की फिर से किरकिरी होने वाली है. 52,000 करोड़ रुपये का नया घोटाला सामने आया है. इस घोटाले में ग़रीब किसानों के नाम पर पैसों की बंदरबांट हुई है. किसाऩों के ऋण मा़फ करने वाली स्कीम में गड़बड़ी पाई गई है. इस स्कीम का फायदा उन लोगों ने उठाया, जो पात्र नहीं थे. इस स्कीम से ग़रीब किसानों को फायदा नहीं मिला. आश्चर्य इस बात का है कि इस स्कीम का सबसे ज़्यादा फायदा उन राज्यों को हुआ, जहां कांग्रेस को 2009 के लोकसभा चुनाव में ज़्यादा सीटें मिली. इस स्कीम में सबसे ज़्यादा खर्च उन राज्यों में हुआ, जहां कांग्रेस या यूपीए की सरकार है.

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Posted in आंदोलन, आर्थिक, कवर स्टोरी, कानून और व्यवस्था, चुनाव, पर्यावरण, पहला पन्ना, राजनीति, राज्य, विधि-न्याय, समाज by Author: डा. मनीष कुमार | No Comments » | Read More...
भारतीय बीज जीन बैंक पर खतरा : निजी कृषि कंपनियों के हाथों बेचने की साजिश
भारतीय बीज जीन बैंक पर खतरा : निजी कृषि कंपनियों के हाथों बेचने की साजिश

यूनेस्को ने भारत के कई स्थानों की जैव विविधता को विश्व के लिए महत्वपूर्ण कृषि विरासत एवं खाद्य सुरक्षा के लिए उपयोगी मानते हुए उन्हें संरक्षित करने की बात कही है. 12वीं शताब्दी में ही रूस के प्रसिद्ध वनस्पति विज्ञानी निकोलाई वाविलो ने भारत को कई फसलों का उत्पत्ति केंद्र (ओरिजिन ऑफ क्रोप) बताया था. फिर भी जैव विविधताओं से भरे इस देश में जब एक किसान को विदेशी कंपनियों से बीज खरीदने पड़ें तो इसे क्या कहेंगे?

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Posted in कवर स्टोरी, कानून और व्यवस्था, पहला पन्ना, राजनीति, विदेश, विधि-न्याय, समाज by Author: शशि शेखर | 2 Comments » | Read More...
असफल वित्त मंत्री सक्रिय राष्‍ट्रपति
असफल वित्त मंत्री सक्रिय राष्‍ट्रपति

वर्ष 2008 में ग्लोबल इकोनॉमी स्लो डाउन (वैश्विक मंदी) आया. उस समय वित्त मंत्री पी चिदंबरम थे. हिंदुस्तान में सेंसेक्स टूट गया था, लेकिन आम भावना यह थी कि इस मंदी का हिंदुस्तान में कोई असर नहीं होने वाला है. उन दिनों टाटा वग़ैरह का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा था और एक धारणा यह बनी कि भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व की अर्थव्यवस्था की ज़रूरत नहीं है.

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Posted in आर्थिक, कवर स्टोरी, कानून और व्यवस्था, पहला पन्ना, राजनीति, विधि-न्याय, समाज by Author: संतोष भारतीय | No Comments » | Read More...
बिगड़े रिश्‍ते, बिगड़ी अर्थव्‍यवस्‍था
बिगड़े रिश्‍ते, बिगड़ी अर्थव्‍यवस्‍था

अब प्रणब मुखर्जी के दूसरे मंत्रियों और प्रधानमंत्री से रिश्ते की बात करें. वित्त मंत्री माना जाता है कि आम तौर पर कैबिनेट में दूसरे नंबर की पोजीशन रखता है. वित्त मंत्रालय इन दिनों मुख्य मंत्रालय (की मिनिस्ट्री) हो गया है, क्योंकि हर पहलू का महत्वपूर्ण पहलू वित्त होता है, इसलिए बिना वित्त के क्लीयरेंस के कोई भी फैसला हो ही नहीं सकता.

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Posted in आर्थिक, कवर स्टोरी-2, कानून और व्यवस्था, राजनीति, विधि-न्याय, समाज by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | 1 Comment » | Read More...
बैंकों का राष्ट्रीयकरण
बैंकों का राष्ट्रीयकरण

पिछले कुछ वर्षों से एक और क़िस्म की बैंकिंग प्रणाली भारत में चालू हुई है. यह है सहकारिता बैंक. कुछ किसान, मज़दूर अथवा उपभोक्ता अपने-अपने सीमित दायरे में सहकारिता बैंक खोल लेते हैं. सारे सदस्य थोड़ा-थोड़ा करके अपना फंड जमा करते हैं. शासन से मान्यता मिलने पर सरकार का सहकारी विभाग उस बैंक को पर्याप्त आर्थिक मदद दे देता है.

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Posted in आर्थिक, जरुर पढें, विधि-न्याय, समाज by Author: महावीर प्रसाद आर मोरारका | No Comments » | Read More...
मुद्रास्फीति और बैंकिंग
मुद्रास्फीति और बैंकिंग

स्टेट बैंक से किसी भी शहर या क़स्बे में आर्थिक सहायता प्राप्त हो सकती है. हालांकि अभी तक स्टेट बैंक का संचालन पूर्ण रूप से राष्ट्रीयकरण की पद्धति पर हुआ नहीं है. अब भी सब ओहदेदार ऑफिसर वर्ग या कर्मचारीगण उसी पुराने साम्राज्य के प्यादे ही हैं, जो पूंजीपतियों के अधीन था. अतएव वर्षों से चली आ रही अपनी आदतों को वे सहसा छोड़ नहीं सकते.

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Posted in जरुर पढें, समाज by Author: महावीर प्रसाद आर मोरारका | No Comments » | Read More...
टकसाल का राष्ट्रीयकरण
टकसाल का राष्ट्रीयकरण

आपको ज्ञात होगा कि बैंक, नोट अथवा सिक्के (करेंसी)आज के युग में कितने आवश्यक हैं. किसी भी सभ्य देश का काम इनके बिना चल ही नहीं सकता. सिक्कों में किस अनुपात में कौन सी धातु मिलाई जाए और इस पर कौन से राष्ट्रीय चिन्ह (अशोक स्तंभ) आदि की छाप लगाई जाए, ये सब काम सरकारी टकसाल के हैं.

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Posted in जरुर पढें, समाज by Author: महावीर प्रसाद आर मोरारका | No Comments » | Read More...
दुनिया का सबसे अमीर बैंक
दुनिया का सबसे अमीर बैंक

आपको पता है कि दुनिया का सबसे अमीर बैंक कौन है, किस देश में है, उसकी संपत्ति कितनी है और वह कब खुला था? चलिए, हम आपको बताते हैं. दुनिया का सबसे अमीर बैंक होने का दर्जा अमेरिका के फानी माए बैंक को हासिल है.

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Posted in जरुर पढें by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More...
गुस्से में लाखों का नुक़सान
गुस्से में लाखों का नुक़सान

इंसान गुस्से में न जाने क्या-क्या कर बैठता है. उसे यह नहीं पता होता कि वह क्या कर रहा है और अपना ही नुक़सान कर बैठता है. अगर आपकी पत्नी गुस्से में है तो अपने नोटों को बचाने की जुगत लगाना शुरू कर दीजिए. चीन में पति-पत्नी की आपसी अनबन में एक महिला ने 4 लाख रुपये के नोट चिंदी-चिंदी कर डाले. जब उसका पति उन फटे हुए नोटों को लेकर बैंक पहुंचा तो वहां के कर्मचारियों के हाथ-पांव फूल गए.

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Posted in जरुर पढें by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More...
रुपयों के किराए का नियंत्रण
रुपयों के किराए का नियंत्रण

अर्थशास्त्रियों की गणना अजीब है. उनका कल्पनातीत हिसाब है. जमा पूंजी का हिसाब लगाने के उनके तरीक़े को अगर आप ग़ौर से देखें तो यही लगेगा कि ऐसी बातें करने वालों को क्यों न जल्दी से पागलखाने भिजवा दिया जाए. उदाहरण स्वरूप, अगर एक बैंक के पास लोगों के खातों में जमा रुपये, मान लीजिए 5 करोड़ हैं तो वे अर्थशास्त्री कहते हैं कि 5 करोड़ जमा हैं. ऐसा होने से 5 करोड़ उस बैंक की साख बन गए.

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Posted in जरुर पढें, समाज by Author: महावीर प्रसाद आर मोरारका | No Comments » | Read More...
बैंक व्यवस्था
बैंक व्यवस्था

शेयर बाज़ार तो पूंजी बाज़ार का एक विभाग मात्र है. असली जगह बैंक हैं, जहां फालतू रुपये लिए-दिए जाते हैं. बैंक में आप अपना खाता खोल लीजिए और जब आवश्यकता हो, बैंक के मैनेजर के पास जाकर रुपये उधार लेने की व्यवस्था कर लीजिए. बैंक तुरंत ही आपको रुपये उधार दे देगा.

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Posted in जरुर पढें, समाज by Author: महावीर प्रसाद आर मोरारका | No Comments » | Read More...

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