बैंकों का राष्ट्रीयकरण

पिछले कुछ वर्षों से एक और क़िस्म की बैंकिंग प्रणाली भारत में चालू हुई है. यह है सहकारिता बैंक. कुछ किसान, मज़दूर अथवा उपभोक्ता अपने-अपने सीमित दायरे में सहकारिता बैंक खोल लेते हैं. सारे सदस्य थोड़ा-थोड़ा करके अपना फंड जमा करते हैं. शासन से मान्यता मिलने पर सरकार का सहकारी विभाग उस बैंक को पर्याप्त आर्थिक मदद दे देता है.

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मुद्रा की शक्ति और उसकी मान्यता

भारत को आज़ाद हुए 12 साल बीत गए. इन 12 वर्षों में 5 या 6 वित्त मंत्री बदल चुके हैं. हर मंत्री की मुद्रा नीति भिन्न-भिन्न थी.

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