ज़िंदगी से रूबरू कराती एक किताब

अभिनेता अनुपम खेर किसी परिचय के मोहताज नहीं है. उन्होंने सा़ढे चार सौ से ज़्यादा फ़िल्मों में अनेक किरदार निभाए हैं.

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प्रेम से ज़िंदगी में रंग भरें

शिशिर श्रीवास्तव की पुस्तक-आपके भीतर छिपी सफलता पाने की आठ शक्तियां निराशा में डूबे लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है. इसमें बताया गया कि किस तरह ज़िंदगी से मायूस व्यक्ति अपने जीवन में इंद्रधनुषी रंग भर सकता है. लेखक का कहना है कि उज्ज्वल एवं सफल भविष्य की राह आपके अपने हाथों में है. ईश्वर भी आपको मार्गदर्शन देंगे और राह दिखाएंगे, पर आधा रास्ता तय होने के बाद.

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विवाद मिलकर सुलझाएं

अदालत ने हॉकी इंडिया और इंडियन हॉकी फेडरेशन (आईएचएफ) से कहा है कि उनकी लड़ाई में खिलाड़ियों के हितों को नुक़सान नहीं होना चाहिए. अदालत ने कहा कि घरेलू सीरीज़ के भविष्य और खिलाड़ियों के हितों को देखते हुए दोनों संस्थाएं मिलकर विवाद सुलझाएं.

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डायस्पोरस या डायस्प्रोवेस : मातृभूमि का गौरव या कलंक कहना काफ़ी नहीं है

हाल में पिछले दशक में भारतीय प्रवासियों पर उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट-2001 आने के बाद से और भारतीय नीति के परिप्रेक्ष्य में मील का पत्थर साबित होने वाले कुछ संक्रमणों के साथ भारत सरकार दुनिया भर में फैले अनिवासी भारतीयों और भारतीय मूल के अत्यंत कुशल भारतीय प्रवासियों को अपनी पहुंच के भीतर लाने का प्रयास कर रही है.

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सर्वश्रेष्ठ पत्र लेखकों का सम्मान

चौथी दुनिया उर्दू में प्रकाशित होने वाले पत्रों में से हर सप्ताह एक सर्वश्रेष्ठ पत्र को पुरस्कृत किया जाता है. पुरस्कार के रूप में उक्त पत्र के लेखक को क़ौमी काउंसिल बराए फ़रोग उर्दू द्वारा एक हज़ार रुपये की पुस्तकें प्रदान की जाती हैं.

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रॉकेट कार सोडा ईंधन से चलेगी

फार्मूला वन रेस में इस्तेमाल होने वाली कारें अगर भविष्य में सोडा-कैंडी के मिश्रण से तैयार ईंधन से दौड़ें तो आश्चर्य नहीं होगा. जी हां, कुछ ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है फ्रिट्ज ग्रोब और स्टीफन वोल्ट्ज ने.

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मेढ़क ज़हरीला रसायन उगलते हैं

एक नए अध्ययन के मुताबिक़ समुद्री मेंढक अपना वजूद बचाने के लिए अपनी बिरादरी के अन्य मेंढकों के खिला़फ एक खास तरह का ज़हरीला रसायन उगलते हैं, क्योंकि उनके बीच भी अस्तित्व की लड़ाई होती है. अपना वजूद बचाने के लिए मेंढक एक-दूसरे की जान ले लेते हैं.

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बिहारः राजनीतिक फंदे मे फंसा स्टील प्लांट

बिहार में महनार के सहदेई खुर्द, रामपुर कुमरकोल और कुमरकोल बुज़ुर्ग के किसानों ने इलाक़े के विकास के लिए चार साल पहले एक सपना देखा था. सपना ऐसा कि उनकी कई पीढ़ियां उन पर नाज़ करतीं और उनका भविष्य संवर जाता, लेकिन राजनीति की बिसात पर पड़े कुछ क़दमों ने उनके सपनों को चूर-चूर कर दिया.

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स्कूल की इमारत ख़स्ताहाल क्यों है

सरकारी स्कूल देश के करोड़ों बच्चों के भविष्य निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण जगह है. यह छात्रों के लिए किसी लाइफ लाइन से कम नहीं है. वजह, निजी स्कूलों का ख़र्च उठा पाना देश की उस 70 फीसदी आबादी के वश की बात नहीं, जो रोजाना 20 रुपये से कम की आमदनी पर जीवनयापन करती है.

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दिल्ली बम विस्फोट: ग़लती किसी की सज़ा किसी को

मरने वाला अकेला नहीं मरता. उसके साथ मरती हैं कई और ज़िंदगियां. ताउम्र, तिल-तिलकर. दिल्ली बम धमाके में जिन 13 लोगों की मौत हुई, उनके परिवार वालों की आंखों से निकलते आंसू देखकर किसी का भी कलेजा मुंह को आ जाए. पीएम से लेकर भविष्य में होने वाले पीएम तक अस्पताल पहुंचे

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आप भी देखते हैं भविष्य!

अभी तक स़िर्फ कहानियों एवं फिल्मों में ही इसे सुना-देखा जाता रहा है कि लोगों के अंदर भविष्य देखने की क्षमता होती है, पर हक़ीक़त में ऐसा होता शायद ही किसी ने देखा हो. हालांकि इस बारे में लंबी बहस हो सकती है और इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से खारिज भी किया जा सकता है.

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ओबामा भविष्य की ज़रूरत हैं

एक साल में कितना कुछ बदल जाता है. पिछले साल जब भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह वाशिंगटन पहुंचे थे और राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उनकी अगवानी की थी तो हर भारतीय का दिल उत्साहित हो उठा था. कुछ बहुत बड़ा हासिल होने की भावना से नई उम्मीदें अंगड़ाइयां ले रही थीं.

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वर्ल्‍ड कप पर भारी बाबा पॉल

स्‍पेन फीफा विश्व कप 2010 का चैंपियन भले ही बना हो, पर स्टार बनकर उभरा ऑक्टोपस पॉल. आलम यह रहा कि दुनिया भर के मीडिया ने मैच की सटीक भविष्यवाणियों के लिए ऑक्टोपस पॉल की जितनी चर्चा की, उतनी तो किसी खिलाड़ी, टीम या उसके प्रदर्शन को लेकर भी नहीं की.

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कोइराला के बाद नेपाली कांग्रेस का भविष्य

आर्य सभ्यता की एक ख़ासियत है, किसी इंसान की मृत्यु हो जाने के बाद हम उसकी अच्छाइयों और उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करने की कोशिश में अक्सर उसे भगवान के समतुल्य खड़ा कर देते हैं. वास्तव में हमारी संस्कृति में मृत्यु सभी बुराइयों और पापों को धोने वाली कारक बन जाती है.

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