मर रहे हैं उत्तर प्रदेश के सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्योग- धंधे : उद्योग धंधों को ले डूबी सिडबी

उत्तर प्रदेश के करीब-करीब सभी बड़े कारखाने बंद हो चुके हैं. जिन मझोले और लघु उद्योग-धंधों पर यूपी को कभी

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मध्य प्रदेश: लोगों के घरों के बाहर लिखा जा रहा है ‘मेरा घर भाजपा का घर’

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को एक इलाके में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। यहां के एक

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व्यापमं घोटाला : शिवराज की अग्नि परीक्षा

मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाले का स्वरूप दिन-ब-दिन व्यापक होता जा रहा है. राज्यपाल, मुख्यमंत्री और कई आलाधिकारियों

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जनतंत्र यात्रा : सरकार को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे : अन्ना

अन्ना हज़ारे की जनतंत्र यात्रा का चौथा चरण बीते 5 जुलाई को मध्य प्रदेश के रीवा से शुरू हुआ, जहां

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ओलंपिक 2012 : डाओ प्रायोजक बना, विवाद शुरू

जैसे ही यह खबर आई कि डाओ कंपनी को भी लंदन ओलंपिक का प्रायोजक बनाया गया है, भारत में इस बात को लेकर भोपाल गैस पी़ड़ित संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया, लेकिन एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि भारत सरकार की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई भी बयान नहीं आया है.

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एंडरसन ने भारतीय कानून और व्यवस्था का म़जाक उड़ाया

भोपाल गैस कांड पर पिछले दिनों अदालत के फैसले के बाद 7 दिसंबर 1984 को यूनियन कार्बाइड के मुखिया वारेन एंडरसन को देश से बाहर भेजने का मुद्दा गरमाया, तो सरकार एक विश्वसनीय बहाना तलाश करने लगी.

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मध्‍यप्रदेश आर्थिक उपनिवेश बन गया है

दुनिया में 1990 का दशक एक परिवर्तनकारी दौर रहा है. इसी समय में समाजवादी सोवियत संघ का विखंडन हुआ और कई समाजवादी देशों ने खुशी-खुशी पूंजीवाद को अपना लिया. चीन भी इस प्रक्रिया से अछूता नहीं रहा. दुनिया के मज़दूरों, एक हो जाओ का नारा लगाने वाले समाजवादी, कम्युनिस्ट संगठन और देश कमज़ोर हो गए,

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इंसानियत सबसे ऊपरः शंकराचार्य और इमाम एक मंच पर

राजधानी भोपाल में हाल ही में हिंदू-मुस्लिम भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए इमाम मुअज्जिन का एक दिवसीय सम्मेलन संपन्न हुआ. इसमें कांची पीठ के शंकराचार्य स्वामी जयेन्द्र सरस्वती और इमाम अब्दुल रज़्ज़ाक खान ने एक मंच से कहा कि इंसानियत सबसे ऊपर हैं और धर्म सभी मनुष्यों को जोड़ने का काम करता आया हैं.

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बहुराष्ट्रीय कंपनियों का दानवी चरित्र

यूनियन कार्बाइड कारखाने से हुई दुर्घटना और उसके बाद इस बहुराष्ट्रीय कंपनी की अमानवीय करतूतों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है. एक रात में 15 हज़ार से ज़्यादा मासूम नागरिकों को मौत की नींद सुलाने वाली इस कंपनी को हमारी प्रशासनिक-न्यायिक व्यवस्था ने आसानी से कैसे छोड़ दिया?

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भोपाल न्‍यायिक त्रासदी

पच्चीस साल पहले विश्व की भीषणतम औद्योगिक त्रासदी झेलने वाले भोपाल के लाखों पीड़ितों को आ़िखर क्या मिला? इस पर बहस तो चलेगी पर पीड़ितों को क्या मिलेगा? भोपाल हादसे में 15274 मौतों के बाद लाखों लोगों को तिल-तिल कर मरने के लिए बाध्य करने वाली यूनियन कार्बाइड और उसके अमेरिकन अध्यक्ष वारेन एंडरसन सहित आठ अन्य सज़ायाफ्ता मुजरिम भारतीय न्याय प्रक्रिया की कमज़ोरियों का लाभ उठाकर आज भी आज़ाद हैं.

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भोपाल गैस पीड़ितों के दर्द का व्यापार

आज अर्जुन सिंह मीडिया के, राजनीतिक दलों के, ख़ुद उनके अपने दल कांग्रेस के निशाने पर हैं. दो दशक से ज़्यादा बीत गए, मीडिया को भोपाल गैस त्रासदी महज़ एक खानापूर्ति की तरह याद थी. दिसंबर की तीन तारीख़ को, दरअसल दो और तीन दिसंबर की रात साढ़े तीन बजे के बाद गैस रिसी थी, जिसने लगभग बीस हज़ार से ज़्यादा जानें ले लीं.

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प्रभात झाः कांटों भरा ताज

तीस साल पहले रोज़गार की तलाश में बिहार से ग्वालियर आए प्रभात झा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से जुड़े दैनिक समाचारपत्र स्वदेश में एक पत्रकार के रूप में काम करना शुरू किया. थोड़े ही समय में वह भारतीय जनता पार्टी और संघ परिवार के दिग्गज नेताओं के संपर्क में आ गए.

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सांस्‍कृतिक धरोहरों पर हमला

मध्य प्रदेश में भू-माफिया और खदान माफिया स्वार्थवश भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहरों को किस तरह से बर्बाद कर रहे हैं, इसका एक उदाहरण विदिशा ज़िले में देखने को मिला है. अब पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित कई शैलचित्र भू-माफियाओं की अवैध खुदाई के चलते नष्ट हो रहे हैं. विदिशा ज़िला प्राचीन भारतीय संस्कृति के वैभवशाली युग का साक्षी रहा है.

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प्रदूषण के कारण गिद्ध प्रजाति खतरे में

गिद्ध भले ही डरावने और बदसूरत दिखाई देते हों, लेकिन ये जीव प्रकृति के सबसे बड़े स़फाई कर्मचारी हैं, जो धरती पर पड़े लावारिश पशु-पक्षियों के शवों को खाकर अपना पेट भरते हैं. इतना ही नहीं, ये गिद्ध शाकाहारी भोजन का कचरा भी मज़े से खा लेते हैं. लेकिन अब गिद्ध प्रजाति संकट में हैं. शहरों में तथा बड़ी आबादी वाले गांव में तो गिद्ध के दर्शन भी दुर्लभ हो चुके हैं.

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सौंदर्य की मिसाल भेड़ाघाट

रूप तेरा ऐसा दर्पण में न समाए, पलक बंद कर लूं कहीं छलक ही न जाए. ये पंक्तियां यदि प्रकृति की एक मनोहारी स्वप्न भूमि भेड़ाघाट के लिए कही जाएं तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. जबलपुर से भोपाल की ओर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर जबलपुर नगर से लगभग 21 किलोमीटर की दूरी पर भेड़ाघाट नाम का एक छोटा सा गांव है.

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जल संकट से जनता बेहाल

मध्य प्रदेश में भीषण जानलेवा गर्मी पड़ रही है. दोपहर में तो लगता है जैसे हवा आग बरसा रही हो. राज्य में इन दिनों कहीं भी दिन का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से कम नहीं है. निमाड़, मालवा और बुंदेलखंड में तो कहीं-कहीं तापमान 45 डिग्री से ऊपर तक पहुंच जाता है. ऐसे गर्म मौसम में पूरे राज्य में जल संकट जनता के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गया है.

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सार–संक्षेप: तीस करोड़ रुपयों का चावल गोदामों में ख़राब हो रहा है

मध्य प्रदेश में सरकारी गोदामों में लगभग 20 हज़ार टन चावल पिछले डेढ़ वर्ष से पड़ा है. उचित रखरखाव के अभाव में इस चावल की गुणवत्ता दिनों-दिन ख़राब हो रही है. इस चावल का मूल्य लगभग 30 करोड़ बताया जाता है. यह चावल दिसंबर 2008 से जून 2009 के बीच समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान से तैयार किया गया था. उस समय ज़्यादा खरीदी होने के कारण चावल का़फी मात्रा में एकत्रित किया गया.

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महिला-बाल व्‍यापार का बढ़ता जाल

बाज़ारवाद के इस युग में मनुष्य भी बिकाऊ माल बन गया है. बाज़ार में पुरूष की ज़रूरत श्रम के लिए है, तो वहीं स्त्री की ज़रूरत श्रम और सेक्स दोनों के लिए है. इसलिए व्यापारियों की नज़र में पुरूष की तुलना में स्त्री कहीं ज़्यादा क़ीमती और बिकाऊ है. राजधानी भोपाल की 66 बालिकाएं और 70 बालक ऐसे हैं जिनका पिछले एक साल से कोई अता-पता नहीं है.

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सार-संक्षेप

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्वाचन क्षेत्र बुदनी के वनग्राम खटपुरा के 200 वनवासी परिवारों को एक भाजपा नेता के इशारे पर वन विभाग के अफसर प्रताड़ित कर रहे हैं. 25 वर्षों से वनभूमि पर रहने वाले वनवासियों का आरोप हैं कि उन्हें खेती के लिए पट्टे देना तो दूर, वन अधिकारी उनकी फसल चौपट कर उनके खिला़फ झूठे मुकदमे दर्ज करा रहे हैं.

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सीहोर : घर की सुध तो ले लो भैया!

राजधानी भोपाल का पड़ोसी ज़िला सीहोर मध्य प्रदेश के अति पिछड़े और ग़रीब ज़िलों में शुमार है, लेकिन इसे गर्व है कि इसने प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व मुख्यमंत्री सुंदर लाल पटवा एवं वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपना जनप्रतिनिधि चुनकर देश और प्रदेश का भाग्य विधाता बनाया.

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सार-संक्षेप

मध्य प्रदेश सरकार की इंडस्ट्री फे्रंडली नीति कितनी बोगस है, इसका पता इसी से चलता है कि लघु और मध्यम उद्योगों को बैंकों से ऋृण उपलब्ध कराने में राज्य सरकार का वित्त निगम सफल नहीं हो पा रहा है. जानकारी के अनुसार, राज्य में वित्त निगम द्वारा 337 उद्योगों के लिए 230 करोड़ रुपये का ऋृण स्वीकृत किया गया था, लेकिन उद्योगों को केवल 161 करोड़ रुपये ही मिल सके.

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विवाह उत्‍सव बने चोरी के केंद्र

भोपाल शहर में विवाह जैसा पावन उत्सव चोरियों का केंद्र बन गया है. दरअसल पिछले कुछ व़क्त से यहां विवाहोत्सवों में स़फाई से चोरी करने वाला एक गिरोह सक्रिय है. यह गिरोह न केवल चोरियां करता है बल्कि बेहद शांत और शालीन तरीक़े से चोरी करने की कला भी सिखाता है.

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राजा भोज के असली चेहरे की तलाश

इतिहास में गर्भ में न जाने कितने राज़ द़फन हैं. राजा महाराजाओं की विरासत से लेकर विलुप्त हो चुकी संस्कृतियों की जानकारी इसी गर्भ से हासिल होती है. लेकिन कुछ गुत्थियां ऐसी होती हैं जो अनसुलझी ही रह जाती हैं. ऐसी ही एक गुत्थी है राजा भोज की. दसवीं-ग्याहरवीं सदी के इतिहास प्रसिद्ध लोकमान्य राजा भोज के असली चेहरे की तलाश की जा रही है, अब तक भोज के अनेक चित्र और उनकी अनेक मूर्तियां बनाई जा चुकी हैं, लेकिन पुरातत्व विद्वान अब तक किसी एक चित्र या मूर्ति को प्रामाणिक और सर्वमान्य नहीं मान सकें हैं.

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सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नामांकन का फर्ज़ीवाड़ा

मध्य प्रदेश में चारो ओर भ्रष्टाचार का बोलबाला है. निजी मेडिकल और डेंटल कॉलेज भी इससे अछूते नहीं हैं. केपीटेशन शुल्क या दान के नाम पर वहां घड़ल्ले से प्रवेश का कारोबारचल रहा है. इस बात को लेकर सरकार भी चिंतित रही है.

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आंकड़ेबाज़ी नहीं, विकास कीजिए

किसी भी राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले आंकड़े हमेशा विकास की एक अकल्पनीय कहानी होते हैं. इनमें सत्यता का प्रतिशत यह तय करता है कि सरकार की नीयत नागरिकों के प्रति कितनी सा़फ है. मध्य प्रदेश सरकार द्वारा करोड़ों रुपये के विज्ञापनों के माध्यम से अब तक जारी किए गए आंकड़े ज़मीनी हक़ीक़त से कहीं दूर हैं.

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