हिंदुस्तान की जनता के ख़िलाफ़ नहीं हैं कश्मीरी

मैं  पिछले दिनों दिल्ली में था. वहां मेरी एक थिंक टैंक से बात हो रही थी. उस थिंक टैंक के

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आपदा, आंदोलन और अर्थव्यवस्था

हाल में हरियाणा में हुए जाट आंदोलन ने समाज, देश एवं अर्थव्यवस्था की रीढ़ व्यापार और व्यापारियों के लिए एक

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ऐसे साथियों के होते दुश्मनों की क्या ज़रूरत

सभी राजनीतिक दलों को वैचारिक रूप से सहमति रखने वाली अपनी छोटी-छोटी इकाइयों से परेशानी रहती है. उक्त लोग पार्टी

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देर से मिले न्याय का कोई अर्थ नहीं

जस्टिस डिलेड, जस्टिस डिनाइड, यानी देर से मिले न्याय का कोई अर्थ नहीं रह जाता. प्रस्तावित सिटीजन चार्टर बिल के

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फालतू धन की माया

ज़मीन या मकान ही ऐसी निजी संपत्ति नहीं थी जिसकी आय पर आदमी बिना कुछ करे घर बैठे खाता-पीता रहे. किराये के धन से भी कहीं ज़्यादा जो फालतू धन लोगों के पास पड़ा है, उसका किराया पूंजीवादियों की दूसरी निजी संपत्ति है. फालतू धन के किराये को हम ब्याज़ के नाम से पुकारते हैं.

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