जस्टिस डिलेड, जस्टिस डिनाइड, यानी देर से मिले न्याय का कोई अर्थ नहीं रह जाता. प्रस्तावित सिटीजन चार्टर बिल के प्रावधान भी कुछ ऐसे ही हैं. यहां सरकारी सेवा पाने के अधिकार के लिए एक आम आदमी को एक नहीं, दो नहीं, बल्कि तीन जगहों पर अपील करनी पड़ेगी. और अपीलों की हालत क्या होती [...]
Tags: आम आदमी, आरटीआई क़ानून, औरंगाबाद, क़ानून, केंद्र सरकार, ज़िला अदालतों, ज़िला निबंधक, जिलाधिकारी, देश, नागरिक माल, न्याय, बिहार, मकान, लखनऊ, शहरी, शिक्षित, सरकारी सूचना, सलाहुद्दीन, सुप्रीम कोर्ट Posted in Crousel1, कवर स्टोरी, पहला पन्ना, राजनीति by Author: शशि शेखर | No Comments » | Read More... |
ज़मीन या मकान ही ऐसी निजी संपत्ति नहीं थी जिसकी आय पर आदमी बिना कुछ करे घर बैठे खाता-पीता रहे. किराये के धन से भी कहीं ज़्यादा जो फालतू धन लोगों के पास पड़ा है, उसका किराया पूंजीवादियों की दूसरी निजी संपत्ति है. फालतू धन के किराये को हम ब्याज़ के नाम से पुकारते हैं.
Tags: Land, Surplus, System, capitalism, houses, property, ज़मीन, पूंजीवाद, फालतू, मकान, व्यवस्था, संपत्ति Posted in जरुर पढें, समाज by Author: महावीर प्रसाद आर मोरारका | No Comments » | Read More... |
|
जनता एक ज़िम्मेदार संसद का निर्माण करे |
|