शिरडी पहुंचने के प्रथम दिन ही बाला साहेब और हेमाड पंत के बीच गुरु की आवश्यकता पर वाद-विवाद छिड़ गया. हेमाड पंत इस वाक़िये को कुछ इस प्रकार बयां करते हैं. उस समय मेरा मत था कि स्वतंत्रता त्याग कर पराधीन क्यों होना चाहिए और जब कर्म करना ही पड़ता है, तब गुरु की आवश्यकता ही कहां रही. प्रत्येक को पूर्ण प्रयत्न कर स्वयं को आगे बढ़ाना चाहिए.
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जो विचार चाणक्य ने सूत्र के रूप में सदियों पहले दिए थे, वे आज भी जीवन प्रबंधन के मामले में बेहद प्रभावी हैं. इस मामले में संदेह करने वाले इसे आज़मा कर देख सकते हैं. आज हालत यह है कि जीवन प्रबंधन की राह बताने वाले तथाकथित आधुनिक मैनेजमेंट गुरु लोगों से मोटी रकम वसूल रहे हैं.
Tags: Chanakya, Management, life, master, चाणक्य, जीवन, प्रबंधन, महापुरुष Posted in जरुर पढें, साहित्य by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More... |
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जनता एक ज़िम्मेदार संसद का निर्माण करे |
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