इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकारिता – 1

भारतीय सेना की एक यूनिट है टेक्निकल सर्विस डिवीजन (टीडीएस), जो दूसरे देशों में कोवर्ट ऑपरेशन करती है. यह भारत की ऐसी अकेली यूनिट है, जिसके पास खुफिया तरीके से ऑपरेशन करने की क्षमता है. इसे रक्षा मंत्री की सहमति से बनाया गया था, क्योंकि रॉ और आईबी जैसे संगठनों की क्षमता कम हो गई थी. यह इतनी महत्वपूर्ण यूनिट है कि यहां क्या काम होता है, इसका दफ्तर कहां है, कौन-कौन लोग इसमें काम करते हैं आदि सारी जानकारियां गुप्त हैं, टॉप सीक्रेट हैं, लेकिन 16 अगस्त, 2012 को शाम छह बजे एक सफेद रंग की क्वॉलिस गाड़ी टेक्निकल सर्विस डिवीजन के दफ्तर के पास आकर रुकती है, जिससे दो व्यक्ति उतरते हैं. एक व्यक्ति क्वॉलिस के पास खड़े होकर इंतज़ार करने लगता है और दूसरा व्यक्ति यूनिट के अंदर घुस जाता है.

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बड़ी कठिन है न्‍याय की डगर

सब मानते हैं कि देर से मिला इंसा़फ भी नाइंसा़फी के बराबर होता है. इसके बावजूद हमारे देश में म़ुकदमे कई पीढि़यों तक चलते हैं. हालत यह है कि लोग अपने दादा और परदादा के म़ुकदमे अब तक झेल रहे हैं. इंसान खत्म हो जाता है, लेकिन म़ुकदमा बरक़रार रहता है. इसकी वजह से बेगुनाह लोग अपनी ज़िंदगी जेल की सला़खों के पीछे गुज़ार देते हैं. कई बार पूरी ज़िंदगी क़ैद में बिताने या मौत के बाद फैसला आता है कि वह व्यक्ति बेक़सूर है.

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जेलों में बढ़ती मुसलमानों की आबादी

आज से 65 वर्ष पूर्व जब देश स्वतंत्र हुआ था तो सबने सोचा था कि अब हम विकास करेंगे. आज़ाद देश में नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा की जाएगी. छुआछूत, जाति-पांत और भेदभाव का अंत होगा. हर धर्म से जुड़े लोग एक भारतीय के रूप में आपस में भाईचारे का जीवन व्यतीत करेंगे. धार्मिक घृणा को धर्मनिरपेक्ष देश में कोई स्थान प्राप्त नहीं होगा. यही ख्वाब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देखा था और यही आश्वासन संविधान निर्माताओं ने संविधान में दिया था, लेकिन आज 65 साल बीत जाने के बाद यह देखकर पीड़ा होती है कि जाति-पांत की सियासत हमारे देश की नियति बन चुकी है.

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दहेज प्रथा की शिकार बेटियां

हिंदुस्तानी मुसलमानों में दहेज का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है. हालत यह है कि बेटे के लिए दुल्हन तलाशने वाले मुस्लिम अभिभावक लड़की के गुणों से ज़्यादा दहेज को तरजीह दे रहे हैं. एक तऱफ जहां बहुसंख्यक तबक़ा दहेज के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद कर रहा है, वहीं मुस्लिम समाज में दहेज का दानव महिलाओं को निग़ल रहा है. दहेज के लिए महिलाओं के साथ मारपीट करने, उन्हें घर से निकालने और जलाकर मारने तक के संगीन मामले सामने आ रहे हैं.

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प्रधानमंत्री विदेशी पूंजी लाएंगे

विदेशी पूंजी निवेश के बारे में पिछली बार सरकार ने फैसला ले लिया था, लेकिन संसद के अंदर यूपीए के सहयोगियों ने ही ऐसा विरोध किया कि सरकार को पीछे हटना पड़ा. खुदरा बाज़ार में विदेशी निवेश का विरोध करने वालों में ममता बनर्जी सबसे आगे रहीं. सरकार ने कमाल कर दिया. भारत दौरे पर आई अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ममता से मिलने सीधे कोलकाता पहुंच गईं.

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नए सेनाध्‍यक्ष की नियुक्ति पर विवादः प्रधानमंत्री की अग्नि परीक्षा

चौथी दुनिया को कुछ ऐसे दस्तावेज़ हाथ लगे हैं, जिनसे हैरान करने वाली सच्चाई का पता चलता है. कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका की सुनवाई हुई, जिसमें लेफ्टिनेंट जनरल बिक्रम सिंह को अगले सेनाध्यक्ष के रूप में नियुक्ति पर सवाल खड़े किए गए.

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बोफोर्स का पूरा सच

बोफोर्स का जिन्न एक बार फिर बाहर आया है, लेकिन स़िर्फ धुएं के रूप में. चौथी दुनिया ने बोफोर्स कांड की एक-एक परत को खुलते हुए क़रीब से देखा है और हर एक परत का विश्लेषण पाठकों के समक्ष रखा है. अभी स्वीडन के पूर्व पुलिस प्रमुख का एक बयान आया है, जिसमें कहा गया है कि अमिताभ बच्चन और राजीव गांधी ने बोफोर्स में रिश्वत नहीं ली थी.

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यूरोप को अपनी मानसिकता बदलनी चाहिए

यूरोप में मुस्लिमों के साथ भेदभाव किए जाने का मामला किसी न किसी स्तर पर उठता रहता है. इस बीच एमनेस्टी इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जो मुसलमान सार्वजनिक तौर पर अपने धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल करते हैं, उनके साथ यूरोप में भेदभाव किया जाता है.

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इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शनः अन्‍ना चर्चा समूह, सच बोलना अपराध नहीं है

सेवा में,

श्री वीरभद्र सिंह जी,

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री

1, जंतर मंतर रोड,

नई दिल्ली-110001

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आरटीआई का इस्तेमाल ऐसे करें

हमारे पास पाठकों के ऐसे कई पत्र आए, जिनमें बताया गया कि आरटीआई के इस्तेमाल के बाद किस तरह उन्हें परेशान किया गया या झूठे मुक़दमे में फंसाकर उनका मानसिक और आर्थिक शोषण किया गया. यह एक गंभीर मामला है और आरटीआई क़ानून के अस्तित्व में आने के तुरंत बाद से ही इस तरह की घटनाएं सामने आती रही हैं.

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जल संसाधन मंत्रालयः एनपीसीसी में यह क्‍या हो रहा है

जल, थल और नभ, भ्रष्टाचार के कैंसर ने किसी को नहीं छोड़ा. जहां उंगली रख दीजिए, वहीं भ्रष्टाचार का जिन्न निकल आता है. बड़े घोटालों की बात अलग है. ऐसे सरकारी संगठन भी हैं, जिनके बारे में अमूमन आम आदमी नहीं जानता और इसी का फायदा उठाकर वहां के बड़े अधिकारी वह सब कुछ कर रहे हैं, जिसे संस्थागत भ्रष्टाचार की श्रेणी में आसानी से रखा जा सकता है.

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मैच फिक्सिंग का जिन्न

अभी हाल में मैच फिक्सिंग को लेकर पाकिस्तान के तीन प्रमुख खिलाड़ियों को सज़ा मिलने का मामला पूरी तरह से ठंडा भी नहीं पड़ा कि फिक्सिंग से जुड़े और भी कई विवाद जन्म लेने लग गए हैं.

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अब यमुना एक्स्प्रेस-वे के खिलाफ शंखनाद

ग्रेटर नोएडा मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा किसानों को राहत मिलने के बाद अब यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण से प्रभावित किसानों ने भूमि अधिग्रहण को लेकर आंदोलन का शंखनाद कर दिया है. नतीजतन नोएडा विस्तार की तरह यमुना एक्सप्रेस-वे पर बसाई जा रही एशिया की सबसे बड़ी शहरी बस्ती पर ख़तरे के बादल मंडराने लगे हैं.

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महाराष्‍ट्रः हर्षवर्द्धन को हाईकोर्ट की फटकार

मुंबई हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एस सी धर्माधिकारी ने सहकारिता मंत्री हर्षवर्धन पाटिल के होश उड़ा दिए हैं. स़िर्फ हर्षवर्धन पाटिल ही ऐसे मंत्री नही हैं. अगर आप मंत्रियों के वातानुकूलित कक्ष के पास से गुजरें तो आपको हर जगह एक जैसा अनुभव होगा. अधिकतर मंत्री विलासी प्रवृत्ति के होते हैं. उनकी इस प्रवृत्ति से आम आदमी अचंभित और हैरान-परेशान होता है, परंतु सत्ताधीशों को इस संदर्भ में कोई अफसोस नहीं होता.

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जनरल वी के सिंह को सुप्रिम कोर्ट जाना चाहिए

केंद्र सरकार सरासर झूठ बोल रही है. भारत के थल सेनाध्यक्ष जनरल वी के सिंह की जन्मतिथि 10 मई, 1951 है, यह बात भारत सरकार और सेना द्वारा दिए गए आधिकारिक उत्तर में है. जिन अधिकारियों ने जवाब दिया है, उनके दस्त़खत हैं. इसके बावजूद भारत सरकार झूठ बोल रही है कि जनरल वी के सिंह की जन्मतिथि 10 मई, 1950 है.

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दिल्ली का बाबू: काम के बोझ के मारे

प्रवर्तन निदेशालय की जांच की गति कुछ शिथिल होती दिख रही है. इसका कारण हाई प्रोफाइल मुकदमों से निपटने का दबाव अथवा काम की अधिकता हो सकता है. निदेशालय पर हसन अली मनी लांड्रिंग, 2-जी स्पेक्ट्रम, आईपीएल, कॉमनवेल्थ और हाल में चर्चा में आए 400 करोड़ के बैंक घोटाले की जांच का भार है.

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फांसी और दया याचिका: विशेषाधिकार के गले में सियासी फंदा

राजस्थान के बंसवाड़ा ज़िले की एक घटना है. 6 मई, 1993 को गढ़ी तहसील के नोखला गांव का राव जी उर्फ रामचंद्र अपनी पत्नी, तीन बच्चों और एक पड़ोसी की हत्या कर देता है. मामला ज़िला अदालत पहुंचता है, जहां उसे फांसी की सज़ा सुनाई जाती है. फिर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी यह सज़ा बरक़रार रहती है. दो से ढाई सालों के बीच राव जी का मामला ज़िला अदालत से लेकर उच्चतम न्यायालय तक पूरा हो जाता है.

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कब करें द्वितीय अपील और शिकायत

पिछले अंक में हमने आपको प्रथम अपील के बारे में बताया था, साथ ही उसका एक प्रारूप भी प्रकाशित किया था. इस अंक में हम आपको बता रहे हैं कि किन परिस्थितियों में द्वितीय अपील एवं शिकायत की जा सकती है. अगले अंक में हम शिकायत एवं द्वितीय अपील का प्रारूप भी प्रकाशित करेंगे.

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एडसिल में सीएमडी की नियुक्ति का मामलाः सिब्बल जी, यह भी भ्रष्टाचार है

लोकपाल विधेयक बनाने के लिए गठित ज्वाइंट ड्राफ्ट कमेटी में सरकारी नुमाइंदे के तौर पर मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल भी शामिल हैं. यह कमेटी एक ऐसी संस्था के गठन का रास्ता निकाल रही है, जो भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा सके.

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युवाओं को सड़क पर उतरना होगा

संसद में नोट फॉर वोट का मामला फिर से इसलिए गरमाया, क्योंकि विकीलीक्स ने अमेरिकी राजनयिक के एक संदेश को सार्वजनिक कर दिया. संसद में न्यूक्लियर डील को लेकर विवाद चल रहा था.

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राजा का एक और कारनामा

दूरसंचार मंत्रालय और घोटालों का मानो चोली-दामन का साथ है. टू जी स्पेक्ट्रम घोटाले की आंच से अभी दूरसंचार विभाग उबरा भी नहीं था कि एक और नया मामला सामने आ गया.

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युवाओं को सड़क पर उतरना होगा

23 मार्च, 1931 की सुबह सात बजे लाहौर जेल में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दे दी गई. ये जांबाज़ स्वतंत्रता संग्राम के महानायक थे. इनकी आंखों में आज़ाद भारत का सपना था. एक ऐसा भारत, जो दुनिया भर में लोकतंत्र की एक मिसाल बनेगा.

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दिल्‍ली का बाबूः बड़े बदलाव का इंतजार

हाल में कैबिनेट में हुए फेरबदल को देखकर ऐसा लगा, जैसे उक्त फेरबदल बेमन से किए गए थे और उत्साहविहीन थे. अब बड़े पदों पर बैठे बाबुओं में फेरबदल, जो लंबे समय से लंबित है, की प्रतीक्षा की जा रही है.

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आम आदमी और न्यायपालिका-2

लंबित मुकदमों की लंबी कतार और साथ ही जजों की ईमानदारी पर सवालिया निशान एक बहुत बड़ी समस्या है. ऐसा न हो कि इसकी वजह से भारतीय लोकतंत्र के इस अंतिम गढ़ की प्रतिष्ठा धूमिल हो जाए. अन्य दो संस्थाएं, विधायिका और नौकरशाही तो पहले से ही कमज़ोर हो चुकी हैं.

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भारतीय राजनीति में धर्म निरपेक्षता एक छलावा

प्रसिद्ध गीतकार जावेद अख्तर ने पिछले दिनों एक बड़े मार्के की बात कही. उन्होंने कहा कि एक मुसलमान होने के चलते वह कभी धर्म निरपेक्ष हो ही नहीं सकते. धर्म निरपेक्षता का मामला तो केवल हिंदुओं तक सीमित है, मुसलमान तो बस मुसलमान हैं. मेरे नज़रिए से उन्हें एक और बात इसमें जोड़ देनी चाहिए थी.

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इलाहाबाद हाईकोर्ट का निर्णय: ग़ैर वैज्ञानिक सोच और अंधविश्वास को बढ़ावा

भारत का संविधान लागू होने के बाद से आज तक न्यायपालिका के किसी निर्णय पर शायद ही इतनी परस्पर विरोधी प्रतिक्रियाएं हुई हों, जितनी हाल में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच द्वारा अयोध्या मामले में दिए गए निर्णय पर हुईं. जहां अनेक लोग निर्णय का स्वागत कर रहे हैं, वहीं ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं है, जो उसे ग़लत ठहरा रहे हैं.

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अल्पसंख्यक आयोग के प्रति सरकारों की बेरुख़ी

मध्य प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग के सभी काम अर्से से रुके पड़े हैं. शिक़ायतें और मामले दर्ज होना सभी कुछ बंद है. शिक़ायतें अगर दर्ज भी हो रही हैं तो उनका निराकरण व़क्त पर नहीं हो पा रहा है. शिक़ायती आवेदनपत्र तो किसी तरह जमा हो जाते हैं, लेकिन उनके निराकरण के लिए बेंच गठित करने और उन पर फैसला लेने का काम फिलवक्त बंद है.

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कैमूर की आशाओं पर खरे नहीं उतरे राहुल

वाराणसी-शक्ति नगर मार्ग पर स्थित मिर्ज़ापुर जनपद के अहरौराडीह गांव के लोग उस दिन ख़ासे उत्साहित थे. वजह भी ऐसी-वैसी नहीं थी, क्योंकि वहां कांग्रेस के युवराज एवं सांसद राहुल गांधी आने वाले थे. क़रीब बीस बीघे खेत में दो मंच और पंडाल बनाए गए थे. चिलचिलाती धूप में पारा 46 डिग्री सेल्सियस की हद पार कर चुका था.

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दिल्‍ली का बाबूः सीसीआई ने कसी कमर

कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) के गठन को एक साल से ज़्यादा समय गुज़र चुका है, लेकिन किसी भी विचाराधीन मामले पर वह अब तक अपना फैसला नहीं दे पाया है. आलोचनाओं के बढ़ते शोर के बीच हालांकि ऐसा लगता है कि सीसीआई अब कमर कस रहा है.

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