खैरा में फ्लोराइड का क़हर : जीवन की बजाय अभिशाप बना जल

बिहार के मुंगेर ज़िले के नक्सल प्रभावित हवेली खड़गपुर प्रखंड का खैरा गांव फ्लोराइड युक्त जल के इस्तेमाल से हो

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बालू की नीलामी, किसानों की तबाही : एक बड़े ख़तरे का संकेत

मुंगेर और बांका ज़िले में जहां एक ओर बालू की नीलामी के कारण सरकारी राजस्व ब़ढ रहा है, वहीं दूसरी

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बिहार : नरसंहार की आशंका से सहमी जिंदगी

खगड़िया-मुंगेर सीमा स्थित बरियारपुर बहियार में अपराधी मुरारी सिंह ने दर्जनों नक्सलियों को मौत के घाट उतार कर उनके अत्याधुनिक हथियार लूट लिए. उसने पहले नक्सलियों को आमंत्रित किया और फिर भोजन में ज़हर मिला दिया. इसके बाद मुरारी सिंह एवं उसके साथियों ने अचेत नक्सलियों को काट डाला और उनके शव के टुकड़े नदी में फेंक दिए.

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मुंगेर की अर्थव्यवस्था का आधार-अवैध हथियार

चाहे दक्षिण के तमिलनाडु या कर्नाटक में हथियारों का जखीरा पकड़ा जाए अथवा मुंबई, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल में हथियारों की बरामदगी हो, मुंगेर का नाम ज़रूर आता है. देसी कट्टे, बंदूक एवं राइफल से लेकर अत्याधुनिक पिस्टल, कारबाइन और एके-47 तक मुंगेर में बनाई जा रही हैं.

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मुंगेर में धरे रह गए विकास के वादे

राज्य की सुशासन सरकार अब अपने पांचवें वर्ष अर्थात चुनावी वर्ष में पहुंच चुकी है. लिहाज़ा अपने कार्यों को लेकर लोगों का विश्वास प्राप्त करने के लिए सुशासन के मुखिया नीतीश कुमार विश्वास यात्रा पर निकल पड़े हैं. साढ़ चार वर्ष के कार्यकाल में विकास की क्या रूप-रेखा बनी, सरकार की कितनी योजनाएं सरज़मीं पर उतरीं और मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर कितना अमल हुआ.

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अरुण कुमार को जदयू में लाने की तैयारी

बिहार की राजनीति में मौक़ा और लाभ-हानि के हिसाब से दल-परिवर्तन नेताओं का पुराना शगल रहा है. हालात यह हैं कि दलबदल, अवसरवादिता और मौक़ापरस्ती से शायद ही कोई अछूता रहा हो. इस इतिहास और परंपरा को फिर से दोहराया जा रहा है. इस परंपरा के नए ध्वजवाहक बने हैं जहानाबाद के पूर्व सांसद डॉ. अरुण कुमार.

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मुंगेर, जमालपुर एवं तारापुर विधानसभा क्षेत्र खेमेबा़जी जारी, निशाना चूकने का अंदेशा

बिहार चुनावी वर्ष में प्रवेश कर चुका है, लिहाज़ा राजनीतिक दलों ने विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है. सत्तारूढ़ जदयू एवं भाजपा सहित विपक्षी दल राजद, लोजपा एवं कांग्रेस अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं. प्रमंडलीय मुख्यालय मुंगेर में भी राजनीतिक तापमान सा़फ दिखाई दे रहा है.

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मुंगेर का अभेद्य किला ढहने लगा

अंग जनपद की ऐतिहासिक धरोहर मुंगेर किला अनेक उत्थान-पतन का साक्षी है. यह किला आज सरकारी उपेक्षा के कारण ढहने के कगार पर है. जिस किले पर कभी नौबत बजती थी, वहीं अब सन्नाटा पसरा है. इसकी दीवारें ढहनी शुरू हो गई हैं, लेकिन इसकी फिक्र न तो पुरातत्व विभाग को है और न ही राज्य सरकार को.

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