भ्रष्टाचार का अड्‌डा बना यूपी का उड्‌डयन महकमा, घोटाले भर रहे ऊंची उड़ान, सरकारी विमान से सेना की जासूसी!

उत्तर प्रदेश का नागरिक उड्‌डयन निदेशालय लंबे अर्से से भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और संदेहास्पद गतिविधियों का अड्‌डा रहा है. प्रदेश के

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परिवार में सिमटता मुलायम सिंह का समाजवाद

अगले दो-तीन साल भारतीय राजनीति के लिए काफी महत्वपूर्ण होंगे. इस दौरान कई राज्यों में विधानसभा चुनाव के अलावा 2014 में आम चुनाव भी होने हैं. सबसे अहम चुनाव देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के माने जा रहे हैं, जो आगामी छह माह के भीतर संपन्न हो जाएंगे.

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उत्तर प्रदेश: दागी,दबंग और पिटे मोहरों पर दांव

देश का सबसे बड़ा सूबा उत्तर प्रदेश वर्ष 2012 और नए मुख्यमंत्री के इंतज़ार में आंखें बिछाए बैठा है. कोई कहता है कि मायावती की वापसी होगी तो किसी का विश्वास मुलायम सिंह के प्रति अडिग हो रहा है. भाजपा जो लंबे समय से सत्ता से दूर है, उसे भी चमत्कार की उम्मीद कम नहीं है. कॉंग्रेस को स़िर्फ अपने युवराज पर भरोसा है.

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प्रतिशोध का लोकतंत्र

लोकतंत्र में सरकारें तो आती-जाती रहती हैं लेकिन इसका असर विकास कार्यों पर नहीं पड़ता. विकास कार्य अपनी गति से चलते रहते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के राजनीतिक संदर्भ और हालात में यह बात सही नहीं है. उत्तर प्रदेश में एक मुख्यमंत्री के कुर्सी से उतरते ही नया मुख्यमंत्री अपने पूर्ववर्ती के पसंदीदा ज़िलों पर ही सबसे पहले सत्ता की चाबुक चलाता है. इस कटुता और प्रतिद्वंद्विता का खामियाजा आम जनता और क्षेत्र विशेष को भुगतना पड़ रहा है. मुलायम सिंह यादव और मायावती की राजनीतिक दुश्मनी के बीच फंसा मैनपुरी इस कटु सच को उजागर करता है. मुगलकालीन भव्य किलों के लिए प्रसिद्ध मैनपुरी अब राजनीतिक किलेबंदी का शिकार है. यहां के लोग आज भी उस दिन को याद करते हैं जब पांच दिसंबर, 1989 को मुख्यमंत्री के रूप में मुलायम सिंह यादव ने शपथ ली. फिर मैनपुरी में विकास का पहिया तेजी से घूमा. शासन प्रशासन के अधिकारियों की प्राथमिकता में इटावा के साथ मैनपुरी भी शामिल हो गया. जून, 1991 में मुलायम सरकार का पतन हो गया. फिर कल्याण सिंह की सरकार बनी, राष्ट्रपति शासन लगा. कल्याण राज में मैनपुरी शासन की प्राथमिकता में नहीं रहा. दिसंबर, 1993 में मुलायम सिंह ने फिर सरकार की बागडोर संभाली. इस बार उनके साथ सरकार में सहयोगी थी बहुजन समाज पार्टी. बसपा को भी मैनपुरी का विकास भाया, लेकिन यह रिश्ता ज़्यादा दिनों तक नहीं चला और दोस्ती दुश्मनी में तब्दील हो गई. जून, 1995 में भाजपा के सहयोग से बसपा की सरकार बनी और मायावती ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. इस बार मायावती को मैनपुरी के विकास कार्य नहीं भा रहे थे. अधिकारी भी सत्ता का इशारा समझ गए और मैनपुरी में विकास का चक्का रुक गया.

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