जनता के सवालों पर बहस की उम्मीद करना बेमानी है

कर्नाटक चुनाव बीत गया. कर्नाटक का कोई भी असल मुद्दा किसी भी भाषण में न भारतीय जनता पार्टी ने उठाया

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मुसलमानों को समझा जा रहा है देशद्रोही : नसीरुद्दीन शाह

नई दिल्ली : बॉलीवुड एक्टर नसीरुद्दीन शाह ने देश के मुश्लिम वर्ग के लोगों की स्थिति को लेकर एक इंटरव्यू

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ट्रिपल तलाक पर बोले सैफ- मैंने भी निकाह किया है और कानूनन तलाक भी

नई दिल्ली, (राज लक्ष्मी मल्ल) : बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान ने ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर अपनी राय देते

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आजम खान का विवादित बयान : रोज़गार नहीं है इसलिए ज्यादा बच्चे पैदा करते हैं मुसलमान

नई दिल्ली, (विनीत सिंह) : समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान और विवादों का चोली दामन साथ है. आजम

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जनता को विकल्प की तलाश है

नरेंद्र मोदी की विजय ने संघ और भारतीय जनता पार्टी में एक चुप्पी पैदा कर दी है. संघ के प्रमुख लोगों में अब यह राय बनने लगी है कि नरेंद्र मोदी को देश के नेता के रूप में लाना चाहिए, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के नेता इस सोच से सहमत नहीं हैं. भारतीय जनता पार्टी के लगभग सभी नेताओं का मानना है कि नरेंद्र मोदी को देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तुत करते ही देश के 80 प्रतिशत लोग भारतीय जनता पार्टी के ख़िला़फ हो जाएंगे, क्योंकि मोदी की सोच से देश के 16 प्रतिशत मुसलमान और लगभग 80 प्रतिशत हिंदू सहमत नहीं हैं.

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कांग्रेस और मुस्लिम संगठनों को सबक़ लेना चाहिए

गुजरात का चुनाव भारतीय जनता पार्टी के लिए एक अलग तरह का सबक़ है और कांग्रेस के लिए दूसरी तरह का. भारतीय जनता पार्टी न अपनी जीत से कुछ सीखती है और न कांग्रेस अपनी हार से. एक और वर्ग है, जो सबक़ नहीं सीखता और वह है हमारे देश का मुस्लिम समाज. मैं शायद ग़लत शब्द इस्तेमाल कर रहा हूं. मुझे मुस्लिम समाज नहीं, मुस्लिम संगठन और मुस्लिम नेता शब्द का इस्तेमाल करना चाहिए.

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भविष्य के भ्रष्टाचारियों के कुतर्क

बहुत चीजें पहली बार हो रही हैं. पूरा राजनीतिक तंत्र भ्रष्टाचार के समर्थन में खड़ा दिखाई दे रहा है. पहले भ्रष्टाचार का नाम लेते थे, तो लोग अपने आगे भ्रष्टाचारी का तमगा लगते देख भयभीत होते हुए दिखाई देते थे, पर अब ऐसा नहीं हो रहा है. भ्रष्टाचार के ख़िला़फ जो भी बोलता है, उसे अजूबे की तरह देखा जाता है. राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े हुए लोग चाहते हैं कि यह आवाज़ या इस तरह की आवाज़ें न निकलें और जो निकालते भी हैं, उनके असफल होने की कामना राजनीतिक दल करते हैं और राजनीतिक दल से जुड़े हुए लोग इसका उपाय बताते हैं कि भ्रष्टाचार के खिला़फ आवाज़ उठाने वाले लोग कैसे असफल होंगे.

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गुजरात चुनाव मुसलमान और कांग्रेस

अगले लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो गई है. कांग्रेस पार्टी ने अगले चुनाव की कमान राहुल गांधी को सौंप दी है. राहुल गांधी को 2014 के लोकसभा चुनाव की समन्वय समिति का प्रमुख बनाया गया है. राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे, यह बात पहले से ही तय है. इसमें कोई नई बात नहीं है. इस समिति में वही पुराने चेहरे हैं, जो अब तक कांग्रेस की रणनीति बनाते आए हैं. इसलिए कुछ नया होगा, इसकी उम्मीद नहीं है. लेकिन सवाल यह है कि मुसलमानों के लिए इसमें नया क्या है? सवाल यह है कि जिस तरह उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने मुसलमानों को धोखा देकर वोट लेने की कोशिश की, क्या फिर से वही खेल खेला जाएगा?

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जेलों में बढ़ती मुसलमानों की आबादी

आज से 65 वर्ष पूर्व जब देश स्वतंत्र हुआ था तो सबने सोचा था कि अब हम विकास करेंगे. आज़ाद देश में नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा की जाएगी. छुआछूत, जाति-पांत और भेदभाव का अंत होगा. हर धर्म से जुड़े लोग एक भारतीय के रूप में आपस में भाईचारे का जीवन व्यतीत करेंगे. धार्मिक घृणा को धर्मनिरपेक्ष देश में कोई स्थान प्राप्त नहीं होगा. यही ख्वाब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देखा था और यही आश्वासन संविधान निर्माताओं ने संविधान में दिया था, लेकिन आज 65 साल बीत जाने के बाद यह देखकर पीड़ा होती है कि जाति-पांत की सियासत हमारे देश की नियति बन चुकी है.

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दहेज प्रथा की शिकार बेटियां

हिंदुस्तानी मुसलमानों में दहेज का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है. हालत यह है कि बेटे के लिए दुल्हन तलाशने वाले मुस्लिम अभिभावक लड़की के गुणों से ज़्यादा दहेज को तरजीह दे रहे हैं. एक तऱफ जहां बहुसंख्यक तबक़ा दहेज के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद कर रहा है, वहीं मुस्लिम समाज में दहेज का दानव महिलाओं को निग़ल रहा है. दहेज के लिए महिलाओं के साथ मारपीट करने, उन्हें घर से निकालने और जलाकर मारने तक के संगीन मामले सामने आ रहे हैं.

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आम चुनाव 2014 की तैयारी

अमेरिका में राष्ट्रपति के लिए चुनाव अभियान उसी दिन से शुरू हो जाता है, जिस दिन नया राष्ट्रपति शपथ लेता है. भारत में राष्ट्रपति और लोकसभा के चुनाव के बीच दो साल का अंतराल है और अभी से प्रधानमंत्री पद के लिए अभियान शुरू हो गया है. राष्ट्रपति पद के किसी एक उम्मीदवार को समर्थन देने के मुद्दे पर एनडीए का राज़ी होना मुश्किल है. भाजपा 2014 के आम चुनाव की तैयारी में जुट गई है.

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ममता के बंगाल में मुसलमान

पश्चिम बंगाल के मुसलमानों की बात करनी ज़रूरी इसलिए है, क्योंकि देश में जम्मू-कश्मीर और असम के बाद मुसलमानों की तीसरी सबसे बड़ी आबादी पश्चिम बंगाल में रहती है. राज्य की लगभग साढ़े छह करोड़ की आबादी में मुसलमानों की संख्या दो करोड़ के आसपास है.

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मदरसों के बच्चे आधुनिक शिक्षा से वंचित हैं

मुसलमान चाहते हैं कि उनके बच्चे आधुनिक शिक्षा ग्रहण करें, ताकि आज के प्रतिस्पर्द्धा के दौर में वे किसी से पीछे न रहें. सरकार भी चाहती है कि कुछ ऐसा हो, लेकिन समुदाय के बुद्धिजीवियों एवं उलेमाओं को यह म़ंजूर नहीं है.

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यूरोप को अपनी मानसिकता बदलनी चाहिए

यूरोप में मुस्लिमों के साथ भेदभाव किए जाने का मामला किसी न किसी स्तर पर उठता रहता है. इस बीच एमनेस्टी इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जो मुसलमान सार्वजनिक तौर पर अपने धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल करते हैं, उनके साथ यूरोप में भेदभाव किया जाता है.

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भारतीय समाज को बेहतर बनाने के लिए आईओएस का 25 वर्षों का प्रयास

भारत में मुसलमान अल्पसंख्यक बिरादरी का दर्जा रखता है. देश के संविधान ने दूसरे वर्गों के साथ-साथ इस देश के मुसलमानों को भी बराबर के अधिकार दिए हैं, लेकिन आज़ादी के 60 साल से भी ज़्यादा का वक़्त गुज़र जाने के बाद भी, आज मुसलमानों को अपना हक़ मांगना पड़ रहा है.

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उत्तर प्रदेश : मुलायम धर्मगुरुओं की चौखट पर

2007 के विधानसभा चुनाव में मुसलमानों की बेरु़खी का नतीजा देख चुके सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव अब कोई ग़लती नहीं करना चाहते हैं. उन्हें पता है कि 2014 के आम चुनाव के मद्देनज़र केंद्र की कांग्रेस सरकार मुसलमानों को रिझाने के मामले में पीछे हटने वाली नहीं है. इसलिए मुलायम सिंह ने अभी से पेशबंदी शुरू कर दी है.

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मुसलमानों का वोट पाने में पार्टियां क्यों चूक गई

उत्तर प्रदेश में चुनाव के परिणाम आ चुके हैं. इस बार के चुनाव में लगभग सभी दलों ने मुस्लिम मुद्दों को जिस तरह उछाला, वैसा पहले कभी नहीं देखा गया था. बसपा, कांग्रेस और सपा ने मुसलमानों को रिझाने में अपनी तऱफ से कोई कोर कसर नहीं छोड़ी, फिर भी सपा को छोड़कर किसी को भी फायदा नहीं हुआ.

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कांग्रेस का मिशन गुजरात और मीडिया का खेल

उत्तर प्रदेश में छठे और सातवें चरण का मतदान बाक़ी था, तभी नेशनल मीडिया से जुड़े पत्रकारों एवं संवाददाताओं ने एक तरह से जैसे गुजरात पर हल्ला बोल दिया. बहाना बनाया गया कि गुजरात दंगों के दस वर्ष पूरे हो रहे हैं, इसलिए देश को इस दंगे की सही तस्वीर दिखानी है, दंगा पीड़ितों के दु:ख-दर्द को पूरे देश के साथ बांटना है.

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वोट पाने के लिए हर हथकंडा

दिल्ली में राहुल की ताजपोशी का लक्ष्य पूरा करने के लिए कांग्रेस हर वह हथकंडा अपना रही है, जिससे मुस्लिमों के वोट फिर से उसकी झोली में आ जाएं. ऐसा करते समय उसे न तो इस बात की चिंता रही कि वह संविधान से खिलवाड़ कर रही है और न इस बात की कि उसके नेताओं के आचरण से चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को ठेस पहुंच रही है.

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उत्तर प्रदेशः क्‍या रशीद मसूद मुख्‍यमंत्री बन सकते हैं

रशीद मसूद का नाम पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसी परिचय का मोहताज नहीं है. सहारनपुर से पांच बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा के सदस्य रह चुके रशीद मसूद समाजवादी पार्टी के अंदर रहकर इतने परेशान हो गए थे कि आखिरकार उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने कांग्रेस का हाथ थाम लिया.

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सियासी दलों के मुस्लिम चेहरे

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र जहां मुलायम सिंह ने मुसलमानों की रहनुमाई का किरदार निभाने के लिए आज़म खां को आगे कर रखा है. खरी बात कहने वाले आज़म खां फायर ब्रांड मुस्लिम नेता हैं. मुलायम के साथ अधिकतर जनसभाओं में मंच पर एक साथ संगत करते हुए देखे जाते हैं.

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उत्तर प्रदेश : मायावती को सत्ता विरोधी लहर का ख़ौफ़

चुनाव आचार संहिता लागू होते ही मायावती राज और 15वीं विधानसभा के कार्यकाल की मियाद ख़त्म हो गई. अब मायावती स़िर्फ केयर टेकर (सीमित अधिकार) मुख्यमंत्री के रूप में काम कर पाएंगी.

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आरक्षण के नाम पर मुसलमानों से धोखा

देश के संविधान में कुछ वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई थी, ताकि सामाजिक तौर पर पिछड़े लोगों को बराबरी के अधिकार दिए जा सकें, उन्हें भी अन्य नागरिकों की तरह तरक्की के अवसर मिल सकें, क्योंकि इतिहास गवाह है कि हमारे यहां जाति और धर्म के नाम पर विभिन्न वर्गों और धर्मों के लोगों के साथ अन्याय होता रहा है.

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