मेरठ में शादी के दौरान हड़कंप, दुल्हे ने उतारा चश्मा तो उड़े सब के होश

नई दिल्ली, (विनीत सिंह) : उत्तर प्रदेश के मेरठ में बुधवार को एक ऐसा वाकया सामने आया जिसकी वजह से

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स्मार्ट सिटी में शामिल हुआ लखनऊ, वाराणसी समेत यूपी के 13 और शहर होंगे स्मार्ट : स्मार्ट सिटी बनाम स्मार्ट पॉलिटी

2017 के विधानसभा चुनाव में प्रवेश करते हुए उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का स्मार्ट सिटी के रूप में बदलने

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मेरठ रिलीफ फंड: मदद बहुत आई, ख़र्च नाममात्र

मई 1987 में हाशिमपुरा एवं मलियाना (मेरठ) नरसंहार के बाद मुस्लिम संगठनों के महासंघ ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत के अंतर्गत

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हाशिमपुरा नरसंहार: अदालत में आखिरी सुनवाई जारी है…

गत 13 अगस्त 2014 को बदनामे जमाना हाशिमपुरा नरसंहार से संबंधित 27 वर्षीय पुराने मुकदमे की अंतिम दौर की सुनवाई

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ज़मीनी स्तर पर क़िला मज़बूत करने की तैयारी

आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र उत्तर प्रदेश में सभी दल ज़मीनी कार्यकर्ताओं के संगठनों-प्रकोष्ठों को मज़बूत करने में लगे हैं.

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नहीं रहे डायलॉग डॉन प्राण : आत्मविश्‍वास से भरपूर एक कलाकार

93 साल की उम्र में पिछले दिनों महान फिल्म अभिनेता प्राण की मृत्यु हो गई. आइए, जानते हैं प्राण के

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश : दुधारू पशुओं की क़त्लगाह

दोआब स्थित मेरठ और उसके आसपास के क्षेत्रों में कभी दूध-दही की नदियां बहती थीं. बुलंदशहर, बाग़पत एवं मुज़फ्फरनगर में डेयरी उद्योग चरम पर था. पशुपालन और दुग्धोपार्जन को गांवों का कुटीर उद्योग माना जाता था, लेकिन जबसे यहां अवैध पशु वधशालाएं बढ़ीं, तबसे दूध-दही की नदियों वाले इस क्षेत्र में मांस और शराब का बोलबाला हो गया.

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मंजन और बीवी

अभी तक आपने एक्सट्रा मेराइटल अफेयर को लेकर पति-पत्नी में तलाक या अलगाव होते सुना होगा, लेकिन इस बार कुछ अलग ही वजह है. साफ-सफाई कितनी ज़रूरी है, यह आप इस ख़बर से अंदाज़ा लगा सकते हैं.

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लाइन में खडा़ किया गोली मारी और लाशें बहा दीं

अगर न्याय में देरी का मतलब न्याय से वंचित होना है तो यह कह सकते हैं कि मेरठ के मुसलमानों के साथ अन्याय हुआ है. मई 1987 में हुआ मेरठ का दंगा पच्चीसवें साल में आ चुका है. इस दंगे की सबसे दर्दनाक दास्तां मलियाना गांव और हाशिमपुरा में लिखी गई. खाकी वर्दी वालों का जुर्म हिटलर की नाजी आर्मी की याद दिलाता है.

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ज़ख्म आज भी ताज़ा हैं

वक्त बदला, हालात बदले, लेकिन नहीं बदली तो, ज़िंदगी की दुश्वारियां नहीं बदलीं. आंसुओं का सैलाब नहीं थमा, अपनों के घर लौटने के इंतज़ार में पथराई आंखों की पलकें नहीं झपकीं, अपनों से बिछ़डने की तकली़फ से बेहाल दिल को क़रार न मिला. यही है मेरठ के दंगा पी़डितों की दास्तां. मेरठ के हाशिमपुरा में 22 मई, 1987 और मलियाना गांव में 23 मई, 1987 को हैवानियत का जो नंगा नाच हुआ, उसके निशान आज भी यहां देखे जा सकते हैं.

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बंद कमरे में यौनेच्छा का विस्फोट

हिंदी में अनुवाद की स्थिति अच्छी नहीं है. विदेशी साहित्य को तो छोड़ दें, अन्य भारतीय भाषाओं में लिखे जा रहे श्रेष्ठ साहित्य भी हिंदी में अपेक्षाकृत कम ही उपलब्ध हैं. अंग्ऱेजी में लिखे जा रहे रचनात्मक लेखन को लेकर भी हिंदी के प्रकाशकों में खासा उत्साह नहीं है. हाल के दिनों में पेंग्विन प्रकाशन ने कुछ अच्छे भारतीय अंग्ऱेजी लेखकों की कृति का अनुवाद प्रकाशित किया है, जिनमें नंदन नीलेकनी, नयनजोत लाहिड़ी, अरुंधति राय की रचनाएं प्रमुख हैं. पेंग्विन के अलावा हिंदी के भी कई प्रकाशकों ने इस दिशा में पहल की है, लेकिन उनका यह प्रयास ऊंट के मुंह में जीरे जैसा है.

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