आडवाणी जी, कार्यकर्ता आपकी राह देख रहे हैं

आडवाणी जी को धन्यवाद देना चाहिए कि आखिर उनकी समझ में आ गया कि देश की जनता उनकी पार्टी से खुश नहीं है. उन्हें शायद यह भी समझ में आ गया कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता भी अपने नेतृत्व से खुश नहीं हैं. इस नेतृत्व की परिभाषा क्या है?

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गुस्से में लाखों का नुक़सान

इंसान गुस्से में न जाने क्या-क्या कर बैठता है. उसे यह नहीं पता होता कि वह क्या कर रहा है और अपना ही नुक़सान कर बैठता है. अगर आपकी पत्नी गुस्से में है तो अपने नोटों को बचाने की जुगत लगाना शुरू कर दीजिए. चीन में पति-पत्नी की आपसी अनबन में एक महिला ने 4 लाख रुपये के नोट चिंदी-चिंदी कर डाले. जब उसका पति उन फटे हुए नोटों को लेकर बैंक पहुंचा तो वहां के कर्मचारियों के हाथ-पांव फूल गए.

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सिंह नहीं, किंग महेंद्र

हम और आप केवल कल्पना कर सकते हैं कि क्या कोई शख्स सात बार लगातार राज्यसभा के लिए चुना जा सकता है, लेकिन नज़र जब किंग महेंद्र के चेहरे पर जाकर अटकती है तो लगता है कि इस धरती एवं इस लोकतंत्र में कुछ भी संभव है. इस लंबे दौर में बिहार एवं केंद्र में सत्ता की राजनीति का चेहरा कई बार बदला, पर एक चीज़ नहीं बदली और वह थी किंग महेंद्र की राज्यसभा के लिए दावेदारी.

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कंपनियों का अवतरण

ये मध्यम वर्ग के लोग जो शुरू-शुरू में छुटभैय्या, कारिंदों या मंत्रियों के रूप में सामने आए थे, धीरे-धीरे स्वयं व्यापार करने लगे. एक तऱफ पूंजीपतियों की पूंजी थी, दूसरी तऱफ मज़दूर की मेहनत थी. दोनों का उपयोग करते हुए या दोनों का ही शोषण करके इस वर्ग ने अपना अधिपत्य सारे व्यापार और उद्योग पर जमा लिया.

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ईशा से जुड़े मां के सपने

हेमा मालिनी काफी दिनों से अपनी बेटी ईशा को लेकर व्यस्त हैं, वजह है फिल्मों में उन्हें री-लांच करना. इसलिए हेमा ने ईशा के लिए फिल्म बनाई है टेल मी ओ ख़ुदा. फिल्म को लेकर ईशा से ज़्यादा हेमा उत्साहित हैं

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इतिहास के आईने में

जब भगत सिंह और उनके साथियों को फांसी दी गई तो महात्मा गांधी ने कहा था, भगत सिंह और उनके साथियों को फांसी दे दी गई और वे शहीद हो गए. उनकी मौत कई लोगों के लिए व्यक्तिगत क्षति है.

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गुलाब सी खिली रवीना

रवीना टंडन फिल्म और टेलीविजन इंडस्ट्री में लौट आई हैं. इंडस्ट्री में वापसी के लिए उन्होंने प्लानिंग पहले ही कर ली होगी, क्योंकि उनकी मेहनत का फल उनकी स्किन को देखकर समझा जा सकता है. चेहरे को ख़ूबसूरत और बॉडी को टोंड बनाए रखने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है.

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कर्म, अकर्म और दुष्कर्म

धनिक या समृद्ध व्यक्ति क्या निठल्ला रहता है या आलस्य में कुछ काम करता ही नहीं? अगर वह मेहनत करता है, काम करता है तो फिर धनिक या समृद्ध होने से आप उसे बुरा क्यों कहते हैं? काम करने वाले किसी भी व्यक्ति को बुरा कहने का अधिकार किसी को नहीं है, बशर्ते कि वह काम करता हो देश के लिए, समाज के लिए या अपने परिवार के लिए कुछ भी उपार्जन करने वाले कामों को ही हम काम कहेंगे.

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उत्तर प्रदेश-उत्तराखंडः मेहनतकशों का सम्‍मान नहीं

समाज में स्पष्ट रूप से दो वर्ग देखे जा सकते हैं. एक है पारंपरिक सामंती एवं नव धनाढ्य शासक वर्ग, जिसमें अधिकांश नौकरीपेशा हैं और दूसरा है मेहनतकश वर्ग, जो इंसान की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु भौतिक सामग्रियों का उत्पादन करता है.

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साज़िश ने डुबोया बैंक

बुरहानपुर का सिटीजन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड एक सुनियोजित और सोची समझी साज़िश के तहत डुबाया गया है. इस बैंक में जमा आम जनता की मेहनत की कमाई डूब गई, लेकिन दिन के उजाले में की गई इस स़फेद पोश डक़ैती के लिए अभी तक किसी के खिला़फ कोई कार्यवाही न होना, आश्चर्य का विषय है.

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