अब अन्ना की नहीं, आपकी परीक्षा है

अन्ना हज़ारे और जनरल वी के सिंह ने बनारस में छात्रों की एक बड़ी सभा को संबोधित किया. मोटे अनुमान के हिसाब से 40 से 60 हज़ार के बीच छात्र वहां उपस्थित थे. छात्रों ने जिस तन्मयता एवं उत्साह से जनरल वी के सिंह और अन्ना हज़ारे को सुना, उसने कई संभावनाओं के दरवाज़े खोल दिए. पर सबसे पहले यह देखना होगा कि आख़िर इतनी बड़ी संख्या में छात्र अन्ना हज़ारे और वी के सिंह को सुनने के लिए क्यों इकट्ठा हुए, क्या छात्रों को विभिन्न विचारों को सुनने में मज़ा आता है, क्या वे नेताओं के भाषणों को मनोरंजन मानते हैं, क्या छात्रों में जनरल वी के सिंह और अन्ना हज़ारे को लेकर ग्लैमरस क्रेज़ दिखाई दे रहा है या फिर छात्र किसी नई खोज में हैं?

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महाराष्ट्र : तीन लाख टन धान सड़ने की कगार पर

सरकार किसानों से बड़ी मात्रा में धान की खरीद तो करती है, लेकिन उसे व्यवस्थित ढंग से रखने के लिए कोई ध्यान नहीं दिया जाता. नतीजतन, वह खुले मैदान में पड़े-पड़े सड़ जाता है.

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हथियार के दलालों का असली चेहरा

अवकाश प्राप्त सैन्य अधिकारी, बड़ी सी तोंद और काम हथियारों की ख़रीद-बिक्री, लेकिन हथियार के ऐसे सौदागर अब ग़ायब हो गए हैं. अब इनकी जगह युवा या कम से कम अधेड़, लेकिन सौम्य चेहरे वाले आर्म्स डीलरों ने ले ली है. ये नए आर्म्स डीलर अपनी फिटनेस का ख़ास ख्याल रखते हैं, गोल्फ क्लबों में जाते हैं, अपने पहनावे पर ख़ास ध्यान देते हैं और इनकी भाषा वैश्विक होती है.

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टो रेसलिंग

इस बार का स्पोट्‌र्स ऑफ द वीक है टो रेसलिंग. रेसलिंग के बारे में तो सभी जानते हैं, लेकिन यह खेल आम रेसलिंग से काफी अलग है. मसलन जिस तरह रेसलिंग में दो प्रतिद्वंद्वी आमने-सामने आकर अपने पूरे शरीर का दम-खम दिखाते हैं, इस खेल में खिलाड़ियों को वैसा नहीं करना पड़ता.

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गौतम का गंभीर प्रयास

गौतम गंभीर ने मैदान के बाहर भी ऐसी मिसाल पेश की, जिसे जिसने भी सुना वह गंभीर के सामने नतमस्तक हो गया. दरअसल, गौतम गंभीर ने अपने अंग दान करने की शपथ ली है. अपने इस फैसले पर गंभीर ने कहा कि अगर उनकी यह छोटी सी कोशिश किसी के अंधेरे जीवन में उजाला ला सकती है तो यह उनके लिए सौभाग्य की बात होगी.

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सोनिया गांधी के भरोसे कांग्रेस

सांसदों से संसद के भीतर अच्छे व्यवहार की उम्मीद कम ही की जाती है. बीते 27 अगस्त को अन्ना हजारे के मुद्दे पर यह देखने को मिला. सांसदों ने अच्छे व्यवहार का प्रदर्शन किया और पूर्व की भांति वे एक-दूसरे पर चीखते-चिल्लाते नज़र नहीं आए, बल्कि उन्होंने एकजुटता दिखाई, लेकिन इसके बाद फिर से सदन की स्थिति वही हो गई है

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