गोरखपुर हादसे में डॉ कफील को लेकर कई खुलासे: हीरो या विलेन?

नई दिल्ली। गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में जो हादसा हुआ, उसकी परते अब वक्त के साथ उधड़ती जा रही है।

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बांग्लादेश : गृहयुद्ध के हालात

बांग्लादेश में हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनमें 80 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. एक तरफ़ विपक्षी

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सेहत से खिलवाड़

भारत दवाओं का एक ब़डा बाज़ार है. यहां बिकने वाली तक़रीबन 60 हज़ार ब्रांडेड दवाओं में महज़ कुछ ही जीवनरक्षक हैं. बाक़ी दवाओं में ग़ैर ज़रूरी और प्रतिबंधित भी शामिल होती हैं. ये दवाएं विकल्प के तौर पर या फिर प्रभावी दवाओं के साथ मरीज़ों को ग़ैर जरूरी रूप से दी जाती हैं. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लिए गठित संसद की स्थायी समिति की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, दवाओं के साइड इफेक्ट की वजह से जिन दवाओं पर अमेरिका, ब्रिटेन सहित कई यूरोपीय देशों में प्रतिबंधित लगा हुआ है, उन्हें भारत में खुलेआम बेचा जा रहा है.

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कर्ज का कुचक्र और किसान

बीते 22 जुलाई को उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद जनपद की तहसील रुदौली के सिठौली गांव में ज़मीन नीलाम होने के डर के चलते किसान ठाकुर प्रसाद की मौत हो गई. ठाकुर प्रसाद का बेटा अशोक गांव के एक स्वयं सहायता समूह का सदस्य था. उसने समूह से कोई क़र्ज़ नहीं लिया था. समूह के जिन अन्य सदस्यों ने क़र्ज़ लिया था, उन्होंने अदायगी के बाद नो ड्यूज प्रमाणपत्र प्राप्त कर लिया था.

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दहेज प्रथा की शिकार बेटियां

हिंदुस्तानी मुसलमानों में दहेज का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है. हालत यह है कि बेटे के लिए दुल्हन तलाशने वाले मुस्लिम अभिभावक लड़की के गुणों से ज़्यादा दहेज को तरजीह दे रहे हैं. एक तऱफ जहां बहुसंख्यक तबक़ा दहेज के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद कर रहा है, वहीं मुस्लिम समाज में दहेज का दानव महिलाओं को निग़ल रहा है. दहेज के लिए महिलाओं के साथ मारपीट करने, उन्हें घर से निकालने और जलाकर मारने तक के संगीन मामले सामने आ रहे हैं.

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सीवर सफाईकर्मी : पेट की खातिर मौत से पंजा लड़ाने की मजबूरी

सीचिपियाना (ग़ाज़ियाबाद) निवासी फुट सिंह वाल्मीकि ऐसे पिता हैं, जिनके पांच जवान बेटों की मौत सीवर की स़फाई करते समय हो गई. सबकी उम्र 20 से 35 वर्ष के बीच थी. फुट सिंह की पांच विधवा बहुए हैं. इसी तरह 40 वर्षीय तारी़फ सिंह सीवर स़फाई का काम करते थे. वह घर से काम पर निकले थे. शाम को घर पर खबर आई कि तारी़फ सिंह की काम के दौरान हालत बिगड़ गई है, वह अस्पताल में हैं.

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आत्‍महत्‍या की कीमत हम सब चुकाते हैं

वर्ष 2006 में मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री नवीन जिंदल ने संसद में एक मुद्दा उठाया कि भारतीय छात्रों द्वारा आत्महत्या की घटनाओं की वजह क्या है और सरकार किस तरह आत्महत्या के आंकड़े बढ़ने से रोक सकती है. इसके बाद संसद की तऱफ से कुछ विशेष क़ानून बनाए गए. सबसे पहले तो परीक्षाओं से जुड़ी हेल्पलाइन शुरू की गई, जो परीक्षा से पहले विद्यार्थियों को फोन पर साइकोलॉजिकल एडवाइस देती है.

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राजस्‍थान में मौत का पुल

न जांच, न कोई बातचीत सबसे पहले क्लीनचिट. लगता है सरकार ने ग़रीबों की लाशों पर भी निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने की नीति बना ली है. जब भी विवाद अमीर और ग़रीब के बीच का होता है, तो पूरी सत्ता अमीर के साथ खड़ी हो जाती है. ग़रीब मरते हैं तो सरकार को अ़फसोस नहीं होता. उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं होता. एक निर्माणाधीन पुल ताश के पत्तों की तरह गिर जाता है. सौ से ज़्यादा लोग इसकी चपेट में आ जाते हैं. जांच का आदेश दे दिया जाता है, लेकिन जांच रिपोर्ट आने से पहले ही पुल बनाने वाली कंपनियों को देश के आलाधिकारी क्लीन चिट दे देते हैं.

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समाज को आईना दिखाती रिपोर्ट

हाल में यूनीसेफ द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत में 22 फीसदी लड़कियां कम उम्र में ही मां बन जाती हैं और 43 फीसदी पांच साल से कम उम्र के बच्चे कुपोषण का शिकार हैं. रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकतर बच्चे कमज़ोर और एनीमिया से ग्रसित हैं. इन क्षेत्रों के 48 प्रतिशत बच्चों का वज़न उनकी उम्र के अनुपात में बहुत कम है. यूनिसेफ द्वारा चिल्ड्रन इन अर्बन वर्ल्ड नाम से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरी ग़रीबों में यह आंकड़ा और भी चिंताजनक है, जहां गंभीर बीमारियों का स्तर गांव की तुलना में अधिक है.

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जलती लाशों के बीच नाचती बार बालाएं

किसी व्यक्ति की मौत होने पर वहां मातम का माहौल होता है. सगे-संबंधी और रिश्तेदार उसकी मौत पर आंसू बहाते हैं, पर आपने कभी किसी की मौत पर और उसकी जलती हुई लाश के बीच बार-बालाओं को नाचते हुए देखा या सुना है? यदि नहीं तो हम आपको बताते हैं. यूपी की धार्मिक नगरी वाराणसी में कुछ ऐसा ही होता है.

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रफ्तार के जानलेवा खेल

जहां एक तऱफ भारत में पहली बार फॉर्मूला रेसिंग के आयोजन को लेकर लोगों में उत्साह और खुशी है. वहीं बहुत सारे देश ऐसे भी हैं, जहां रफ्तार के इस खेल ने लोगों को मातम में डूबो दिया. जी हां, बात चाहे फॉर्मूला रेस की हो या फिर बाइक रेसिंग की, दोनों ही खेलों ने हाल में कई घरों के चिराग़ बुझा दिए हैं.

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मौसम

एक एक्टर के रूप में पंकज कपूर कितने बेहतरीन हैं, यह बताने की ज़रूरत नहीं है. जाने भी दो यारों, एक डॉक्टर की मौत, एक रुका हुआ फैसला और धर्म जैसी कई फिल्में इस बात की गवाह हैं. टीवी धारावाहिक करमचंद और ऑफिस-ऑफिस के ज़रिए उन्होंने काफी लोकप्रियता हासिल की

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शेहला मसूद: सूचना का एक और सिपाही शहीद

भ्रष्टाचार की भंडाफोड़ कोशिशें जानलेवा साबित हो रही हैं. भोपाल की आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद की हत्या से पूरे देश में सूचना के अधिकार के तहत जानकारियां लेने का जोख़िम उठा रहे कार्यकर्ता हैरान हैं.

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उत्तर प्रदेश: हर तरफ पानी ही पानी

बाढ़ और पानी से शहरी जनता हलकान है, वहीं किसान परेशान. किसी के खेत पानी में डूब गए हैं तो किसी का घर-मकान और राशन-पानी बाढ़ लील गई. क़रीब 24 ज़िले बाढ़ से प्रभावित हैं. लोग छतों पर तिरपाल लगाकर, स्कूलों के बरामदों में, कुछ नहीं तो खुले में ही जीवनयापन कर रहे हैं.

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फ़र्ज़ी एंकाउंटर: दोषी पुलिसवालों को फांसी हो

गत दिनों राजस्थान में दारा सिंह की फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त लहजे का प्रयोग करते हुए कहा है कि फ़र्ज़ी मुठभेड़ों में संलिप्त पुलिस वालों को फांसी पर लटका देना चाहिए. दारा सिंह एक संदिग्ध डाकू था, जिसकी राजस्थान पुलिस ने 23 अक्टूबर को एक फ़र्ज़ी मुठभेड़ के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी थी.

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ड्रैगन के निशाने पर पाक

भारत सालों से पाकिस्तान में आतंकी अड्डे और आतंकियों की शरणस्थली होने की बात कहता आ रहा है, लेकिन अमेरिका सहित दुनिया को इस बात में तब दम नज़र आया जब ओसामा बिन लादेन के ठिकाने के बारे में पता चला. अब चीन के जिनजियांग प्रांत में आतंकी हमले हुए तो वह भी पाकिस्तान पर आरोप लगा रहा है.

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उत्तराखंडः पूर्णानंद दिलाएंगे निगमानंद के हत्यारों को सजा

धर्मनगरी हरिद्वार में गंगा और पर्यावरण की रक्षा की मांग को लेकर शहादत देने वाले युवा संत निगमानंद की समाधि की मिट्टी अभी सूखी भी नहीं थी कि मातृ सदन के दूसरे युवा संत स्वामी पूर्णानंद सरस्वती ने अपने गुरुभाई की मौत के लिए ज़िम्मेदार लोगों को सज़ा दिलाने और गंगा रक्षा के संकल्प के साथ सत्याग्रह शुरू कर दिया. गंगा की रक्षा के लिए मातृ सदन अब तक दो शहादत दे चुका है.

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हाथियों का हत्‍यारा कौन

नेपाल सीमा से लगे उत्तर प्रदेश के जनपद खीरी के दुधवा नेशनल पार्क में पिछले दिनों बिजली के हाईटेंशन तारों के कारण एक साथ तीन हाथियों की दर्दनाक मौत हो गई. इस घटना में सबसे हृदय विदारक मौत उस गर्भवती हथिनी की हुई, जिसकी कोख से अपरिपक्व बच्चा बिजली के तेज़ झटके लगने के कारण मां के पेट से बाहर आ गया.

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मैं ज़िंदा हूं!

कभी-कभी ऐसा होता है कि जिसे हम मुर्दा समझते हैं, वह असल में जीवित होता है. एक दक्षिण अफ्रीकी व्यक्ति की जब नींद खुली तो उसने खुद को मुर्दाघर के फ्रीजर में पाया. क़रीब एक दिन पहले उसके परिवारवालों ने सोच लिया था कि वह मर गया है. स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता शिज्वे कुपेलो ने बताया कि यह व्यक्ति अचानक उठ बैठा.

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नार्वेः मौत का तांडव

विश्व के बेहद शांतिप्रिय देशों में शुमार नार्वे के लोगों को 22 जुलाई का दिन हमेशा याद रहेगा. यह नार्वे के लिए एक काला दिन था. द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद देश को पहली बार इतनी बड़ी त्रासदी का सामना करना पड़ा. इस दिन प्रधानमंत्री कार्यालय से महज़ कुछ दूर स्थित एक सरकारी भवन के पास एक ज़ोरदार बम धमाका हुआ. यह बम एक कार में रखा हुआ था.

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चमत्‍कार को नमस्कार

कहते हैं कि चमत्कार को नमस्कार. फिर अगर बात भारत की हो तो फिर चमत्कार होना आम बात है. ऐसा आपने अक्सर फिल्मों में ही देखा होगा कि किसी व्यक्ति को मरा समझ कर नदी में बहा दिया जाता है और कई साल बाद वह वापस घर लौट आता है. एक ऐसा ही मामला असल में उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में सामने आया है.

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उत्तर प्रदेश में पत्रकारों पर हमलाः सच कहने की सजा

मायावती सरकार और उसके नुमाइंदों ने हर उस आवाज़ को कुचल देने की कसम खाई है, जो मुख्यमंत्री मायावती या उनके राजकाज के ख़िला़फ उठाई गई हो. विरोधियों पर लाठी-डंडों की बौछार और व्यापारियों का उत्पीड़न करने, क़ानून के रक्षकों एवं शिक्षा मित्रों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटने वाले मायावती के कथित गुर्गों का निशाना अबकी बार मीडिया बना.

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संत निगमानंद की मौत पर राजनीति

गंगा को बचाने के लिए जान देने वाले संत निगमानंद की मौत पर राजनीति शुरू हो गई है. इस मामले को लेकर जहां प्रदेश की निशंक सरकार पर सवालिया निशान लगाए जा रहे हैं, वहीं संत के परिवार वालों ने मातृ सदन पर भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं. संत के परिवार वालों का कहना है कि निगमानंद पर अनशन का दबाव था.

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पत्रकारिता की क़ीमत जान हो सकती है

पत्रकारिता एक ऐसा पेशा है, जिसकी क़ीमत क्या है, अभी यह तय नहीं हुआ है. पत्रकारिता में जो लोग आते हैं उन्हें कम से कम यह ध्यान में रखकर आना चाहिए कि पत्रकारिता के पेशे की क़ीमत उनकी अपनी जान हो सकती है. मुंबई में मिड डे के पत्रकार जेडे की हत्या इस सत्य को एक बार फिर रेखांकित कर रही है.

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मरती नदियां, उजड़ता बुंदेलखंड

चंबल, नर्मदा, यमुना और टोंस आदि नदियों की सीमाओं में बसने वाला क्षेत्र बुंदेलखंड तेज़ी से रेगिस्तान बनने की दिशा में अग्रसर है. केन और बेतवा को जोड़कर इस क्षेत्र में पानी लाने की योजना मुश्किलों में फंस गई है. जो चंदेलकालीन हज़ारों तालाब बुंदेलखंड के भूगर्भ जल स्रोतों को मज़बूती प्रदान करते थे, वे पिछले दो दशकों के दौरान भू-मा़फिया की भेंट चढ़ गए हैं.

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देश में जल्लादों की कमी: अब कौन देगा फांसी

मम्मू जल्लाद नहीं रहा. बड़े-बड़े अपराधियों को फांसी के फंदे पर लटकाने वाले मम्मू को देश की दुर्दशा का काफी मलाल था. राजनेताओं की लूट-खसोट से वह भी उतना ही आहत रहता था, जितना एक आम आदमी. अब उसके परिवार में इस पेशे को कोई नहीं अपनाएगा. मम्मू के दादा रामरखा ने अंग्रेजी हुकूमत में जल्लाद का काम शुरू किया था. पिता कल्लू के सहयोग से मम्मू ने 1973 में पहली बार एक अपराधी को फांसी के फंदे पर लटकाया.

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लाइन में खडा़ किया गोली मारी और लाशें बहा दीं

अगर न्याय में देरी का मतलब न्याय से वंचित होना है तो यह कह सकते हैं कि मेरठ के मुसलमानों के साथ अन्याय हुआ है. मई 1987 में हुआ मेरठ का दंगा पच्चीसवें साल में आ चुका है. इस दंगे की सबसे दर्दनाक दास्तां मलियाना गांव और हाशिमपुरा में लिखी गई. खाकी वर्दी वालों का जुर्म हिटलर की नाजी आर्मी की याद दिलाता है.

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वादों का मारा बुंदेलखंड

बुंदेलखंड में चित्रकूट के घाट पर न तो संतों की भीड़ है और न चंदन घिसने के लिए तुलसीदास जी हैं. हां, बुंदेलखंड की व्यथा सुनने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एवं कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ज़रूर बांदा आए. उन्होंने पानी की सुविधा के लिए दो सौ करोड़ रुपये देने का वादा करके आंसू पोंछने की कोशिश की है, लेकिन यहां की जनता के दु:ख-दर्द दूर होते नज़र नहीं आ रहे हैं.

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फेसबुक में मौत का खेल

इंटरनेट पर लोग प्लैंकिंग से जुड़ी तस्वीरें अपलोड करते हैं. ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, इंटरनेट के एक अजीब खेल के चलते एक इमारत की सातवीं मंज़िल से गिरकर एक व्यक्ति की मौत हो गई. यह व्यक्ति प्लैंकिंग नामक खेल खेल रहा था और इसके चलते उसने बालकनी की रेलिंग पर ख़तरनाक परिस्थितियों में लेटकर फोटो खिंचवाने की कोशिश की.

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