कोयला महाघोटाला : चौथी दुनिया की रिपोर्ट सच साबित हुई

देश के उच्चतम न्यायालय ने पिछले 17 वर्षों में एनडीए और यूपीए समेत अन्य सरकारों के कार्यकाल के दौरान हुए

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सच्चर रिपोर्ट का सच : मुसलमानों को धोख़ा दे रही है कांग्रेस

2004 में कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए के सत्ता में आते ही रंगनाथ मिश्रा आयोग और अगले साल सच्चर कमेटी

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उबल रहा है भारतीय जनमत : पाकिस्तान को मुंहतो़ड जवाब आखिर कब

सितम्बर महीने में संयुक्त राष्ट्र की आम बैठक होने वाली है. इस बैठक में भारत के प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह

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पारदर्शिता की पक्षधर नहीं है सरकार

सूचना का अधिकार क़ानून 2005 में लागू हुआ. इस क़ानून ने पिछले 8 सालों से लोगों में एक नई आशा, एक नई उम्मीद जगाने का

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कौन देगा देश को बेहतर भविष्य

आम चुनावों में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है. कांग्रेस धर्मनिरपेक्षता की बात कर रही है, तो बीजेपी नरेन्द्र मोदी

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तीसरा मोर्चा : कैसे बनेंगे प्रधानमंत्री

यूं तो तीसरा मोर्चा बनाने की नूरा-कुश्ती हिंदुस्तान की सियासत में पिछले पच्चीस सालों से चल रही है, लेकिन इस

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खाद्य सुरक्षा बिल : रोटी से खेलने वाला कौन है देश की संसद मौन है …..

ईस्ट इंडिया कंपनी की लूट को भी पीछे छोड़ चुकी कांग्रेस सरकार दरअसल सरकार नहीं, परिवार चला रही है. भ्रष्टाचार

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रंगराजन समिति की सिफारिश किसान विरोधी

पिछले दिनों राजधानी दिल्ली में गन्ना उत्पादक किसानों ने संसद का घेराव किया. आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुल्तान अहमद भी खुलकर सामने आए. देश के अलग-अलग राज्यों से आए किसान जब संसद के बाहर आंदोलन कर रहे थे, उसी दिन संसद के भीतर माननीय सदस्य एफडीआई के मुद्दे पर बहस कर रहे थे.

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48 लाख करोड़ का महाघोटाला

जबसे यूपीए सरकार बनी है, तबसे देश में घोटालों का तांता लग गया है. देश के लोग यह मानने लग गए हैं कि मनमोहन सिंह सरकार घोटालों की सरकार है. एक के बाद एक और एक से बड़ा एक घोटाला हो रहा है. चौथी दुनिया ने जब 26 लाख करोड़ रुपये के कोयला घोटाले का पर्दाफाश किया था, तब किसी को यह यकीन भी नहीं हुआ कि देश में इतने बड़े घोटाले को अंजाम दिया जा सकता है.

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यूपीए सरकार का नया कारनामा : किसान कर्ज माफी घोटाला

आने वाले दिनों में यूपीए सरकार की फिर से किरकिरी होने वाली है. 52,000 करोड़ रुपये का नया घोटाला सामने आया है. इस घोटाले में ग़रीब किसानों के नाम पर पैसों की बंदरबांट हुई है. किसाऩों के ऋण मा़फ करने वाली स्कीम में गड़बड़ी पाई गई है. इस स्कीम का फायदा उन लोगों ने उठाया, जो पात्र नहीं थे. इस स्कीम से ग़रीब किसानों को फायदा नहीं मिला. आश्चर्य इस बात का है कि इस स्कीम का सबसे ज़्यादा फायदा उन राज्यों को हुआ, जहां कांग्रेस को 2009 के लोकसभा चुनाव में ज़्यादा सीटें मिली. इस स्कीम में सबसे ज़्यादा खर्च उन राज्यों में हुआ, जहां कांग्रेस या यूपीए की सरकार है.

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सीएजी के प्रति कांग्रेस का रवैया यह प्रजातंत्र पर हमला है

सीएजी (कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) यानी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट आई तो राजनीतिक हलक़ों में हंगामा मच गया. सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 2006-2009 के बीच कोयले के आवंटन में देश को 1.86 लाख करोड़ का घाटा हुआ. जैसे ही यह रिपोर्ट संसद में पेश की गई, कांग्रेस के मंत्री और नेता सीएजी के खिला़फ जहर उगलने लगे. पहली प्रतिक्रिया यह थी कि सीएजी ने अपने अधिकार क्षेत्र की सीमा का उल्लंघन किया.

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प्रधानमंत्री विदेशी पूंजी लाएंगे

विदेशी पूंजी निवेश के बारे में पिछली बार सरकार ने फैसला ले लिया था, लेकिन संसद के अंदर यूपीए के सहयोगियों ने ही ऐसा विरोध किया कि सरकार को पीछे हटना पड़ा. खुदरा बाज़ार में विदेशी निवेश का विरोध करने वालों में ममता बनर्जी सबसे आगे रहीं. सरकार ने कमाल कर दिया. भारत दौरे पर आई अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ममता से मिलने सीधे कोलकाता पहुंच गईं.

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राहुल कांग्रेस को कैसे बचाएंगे

राजनीति में राहुल गांधी की सक्रिय भूमिका हो, राहुल गांधी को बड़ी ज़िम्मेदारियां सौंपी जाएं, राहुल गांधी पार्टी और सरकार में प्रभावशाली रूप से दखल दें, कांग्रेस की तऱफ से समय-समय पर ऐसे बयान आते रहते हैं. पिछले कुछ सालों से कांग्रेस में यह एक रिवाज़ सा हो गया है. इस बार कुछ नया है, क्योंकि पहली बार राहुल गांधी ने कहा कि वह अब राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे.

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गांधी परिवार का प्रभाव घट रहा है

यह कहना कि यूपीए सरकार अपनी दिशा खो रही है, कमबयानी होगा. लेकिन यही कमबयानी राजनीतिक और राष्ट्रीय स्तर पर कुछ महत्वपूर्ण सवालों को रेखांकित भी करती है. क्या हम भारतीय राजनीति में नेहरू-गांधी परिवार के प्रभाव के खत्म होने की शुरुआत तो नहीं देख रहे हैं? क्या लोगों की एक ब़डी संख्या, जो हमेशा से गांधी खानदान के प्रति व़फादार रही है, अब दूसरी पार्टियों की ओर रु़ख कर रही है? निश्चित तौर पर यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के प्रभाव में कमी दिख रही है.

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आम चुनाव 2014 की तैयारी

अमेरिका में राष्ट्रपति के लिए चुनाव अभियान उसी दिन से शुरू हो जाता है, जिस दिन नया राष्ट्रपति शपथ लेता है. भारत में राष्ट्रपति और लोकसभा के चुनाव के बीच दो साल का अंतराल है और अभी से प्रधानमंत्री पद के लिए अभियान शुरू हो गया है. राष्ट्रपति पद के किसी एक उम्मीदवार को समर्थन देने के मुद्दे पर एनडीए का राज़ी होना मुश्किल है. भाजपा 2014 के आम चुनाव की तैयारी में जुट गई है.

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कांग्रेस और मुलायम की नज़दीकी

पिछले साल अगस्त में जब संसद में लोकपाल पर बहस हो रही थी तो सुषमा स्वराज ने कांग्रेस को निशाना बनाते हुए कहा था कि सामान्य तौर पर प्रधानमंत्री बोलते नहीं हैं और अगर बोल रहे हैं तो सभी को ज़रूर सुनना चाहिए. यही सलाह प्रणव मुखर्जी के लिए भी दी जा सकती है.

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यूपीए-2 के तीन साल : सत्ता के संवेदनहीन होने की कहानी

22 मई की रात. तीन साल पूरे होने के अवसर पर यूपीए-2 सरकार ने एक डिनर पार्टी का आयोजन किया. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एवं यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत सारे महत्वपूर्ण नेता इस पार्टी में शामिल थे. उसी दिन सुबह एक खबर आई थी, हुबली-बंगलुरु एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से 25 लोगों की मौत हो गई. लेकिन सुबह की उस दुर्घटना का रात की डिनर पार्टी पर कोई असर नहीं था.

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क्या स्वयं को बनाए रखना एक रणनीति है?

महान फ्रांसीसी कूटनीतिज्ञ टेलेरां से जब पूछा गया कि उन्होंने फ्रांसीसी क्रांति के समय क्या किया, तो उनका उत्तर था कि उन्होंने अपना अस्तित्व बचाए रखा. अपने तीसरे साल में यूपीए-2 सरकार के लिए यह सबसे बेहतर उत्तर हो सकता है. 2014 तक वह दस साल पूरे कर लेगी, जो कि नरसिम्हाराव और राजीव गांधी के कार्यकाल से अधिक है.

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