कविता का जन्म कब हुआ, इस बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है. मगर इतना ज़रूर है कि जब से इंसान ने बोलना सीखा और वह अपनी भावनाओं को शब्दों में पिरोने की कला में माहिर हुआ, तभी कविता का जन्म हुआ होगा. दुनिया की हर सभ्यता में काव्य को वह मुक़ाम हासिल है, जिसने [...]
Tags: आनंदवादी, ऋग्वेद मंत्र, कविता, काव्य-चिंतन, काव्यशास्त्र, दस्तावेज़, दुनिया, नैतिक उपयोगितावादी, प्राचीनकाल, भारतीय, मानव, मानव-कल्याण, मानव-समाज, मानवतावादी, मानववादी, मूल्य-चेतना, मूल्य-सिद्धांत, रचना, राजनीतिक, रीतिवादी, लोकमंगलकारी, विचारधारा, संघर्षपरक, सभ्यता, समाज-सापेक्ष, सामाजिक, सामाजिक मूल्यों, साहित्य, सिद्धांत Posted in साहित्य by Author: फ़िरदौस ख़ान | 1 Comment » | Read More... |
भारतीय साहित्य के प्रमुख स्तंभ यानी उर्दू के मशहूर अ़फसानानिग़ार कृष्ण चंदर का जन्म 23 नवंबर, 1914 को पाकिस्तान के गुजरांवाला ज़िले के वज़ीराबाद में हुआ. उनका बचपन जम्मू कश्मीर के पुंछ इलाक़े में बीता. उन्होंने तक़रीबन 20 उपन्यास लिखे और उनकी कहानियों के 30 संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनके प्रमुख उपन्यासों में एक गधे की आत्मकथा, एक वायलिन समुंदर के किनारे, एक गधा नेफ़ा में, तूफ़ान की कलियां, कॉर्निवाल, एक गधे की वापसी, ग़द्दार, सपनों का क़ैदी, स़फेद फूल, प्यास, यादों के चिनार, मिट्टी के सनम, रेत का महल, काग़ज़ की नाव, चांदी का घाव दिल, दौलत और दुनिया, प्यासी धरती प्यासे लोग, पराजय, जामुन का पेड़ और कहानियों में पूरे चांद की रात और पेशावर एक्सप्रेस शामिल है. 1932 में उनकी पहली उर्दू कहानी साधु प्रकाशित हुई. इसके बाद उन्होंने पीछे म़ुडकर नहीं देखा.
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समकालीन हिंदी कहानी के परिदृष्य पर नज़र डालें तो युवा कथाकारों ने अपनी कहानियों में शिल्प के अलावा उसके कथ्य में भी चौंकाने वाले प्रयोग किए हैं. आज की नई पीढ़ी के कहानीकारों के पास अनुभव का एक नया संसार है जिसको वे अपनी रचनाओं में व्यक्त कर रहे हैं. इस व़क्त के जो नए कथाकार हैं, उनके अनुभव में आर्थिक उदारीकरण के बाद देश में जो बदलाव आया है उसको सा़फ तौर पर परिलक्षित किया जा सकता है.
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गीत मन के भावों की सबसे सुंदर अभिव्यक्ति हैं. साहित्य ज्योतिपर्व प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक मेरे गीत में सतीश सक्सेना ने भी अपनी भावनाओं को शब्दों में पिरोकर गीतों की रचना की है. वह कहते हैं कि वास्तव में मेरे गीत मेरे हृदय के उद्गार हैं. इनमें मेरी मां है, मेरी बहन है, मेरी पत्नी है, मेरे बच्चे हैं. मैं उन्हें जो देना चाहता हूं, उनसे जो पानी चाहता, वही सब इनमें है.
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गीतकार शैलेंद्र ने फिल्मों में भी साहित्य की महक को बरक़रार रखा, इसलिए काव्य प्रेमियों ने उन्हें गीतों का राजकुमार कहा है. शैलेंद्र मन से कवि ही थे, तभी तो उनके फिल्मी गीतों में भी काव्य की पावन गंगा बहती है. उनसे प्रभावित होकर उपन्यासकार फणीश्वर नाथ रेणु ने उन्हें कविराज का खिताब दिया था. मुंबई के शैलेंद्र प्रशंसक परिवार ने उनकी याद में एक किताब प्रकाशित की है, जिसका नाम है मौसम सुहाना और ये मौसम हसीं.
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उर्दू और फारसी शायरी के चमन का यह दीदावर यानी मोहम्मद अल्लामा इक़बाल 9 नवंबर, 1877 को पाकिस्तान के स्यालकोट में पैदा हुआ. उनके पूर्वज कश्मीरी ब्राह्मण थे, लेकिन क़रीब तीन सौ साल पहले उन्होंने इस्लाम क़ुबूल कर लिया था
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फैज़ अहमद फैज़ अपनी क्रांतिकारी रचनाओं के लिए जाने जाते हैं. नोबेल पुरस्कार के लिए नामित फैज़ अहमद फैज़ पर साम्यवादी होने और इस्लाम के उसूलों के खिला़फ लिखने के भी आरोप लगते रहे. उनका जन्म 11 फरवरी, 1911 को पाकिस्तान के स्यालकोट शहर में हुआ था.
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अमृता प्रीतम ने ज़िंदगी के विभिन्न रंगों को अपने शब्दों में पिरोकर रचनाओं के रूप में दुनिया के सामने रखा. पंजाब के गुजरांवाला में 31 अगस्त, 1919 में जन्मी अमृता प्रीतम पंजाबी की लोकप्रिय लेखिका थीं. उन्हें पंजाबी भाषा की पहली कवयित्री माना जाता है. उन्होंने क़रीब एक सौ किताबें लिखीं, जिनमें उनकी आत्मकथा रसीदी टिकट भी शामिल है.
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एक अच्छी कोशिश हमेशा प्रशंसनीय होती है, लेकिन जब ऐसी कोई कोशिश नए और संसाधनों का अभाव झेलने वाले लोग करते हैं तो वे दो-चार अच्छे शब्दों और शाबाशी के हक़दार ख़ुद-बख़ुद हो जाते हैं. त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका समसामयिक सृजन इसकी मिसाल है.
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हम सब जानते हैं कि हम परमात्मा की रचना हैं. यह संसार, यह प्रकृति सब उसी की रचना है, लेकिन उसने तो हमसे वादा किया कि अपनी ही तरह वह हमें भी रचयिता बनाता है. तो फिर प्रश्न उठता है कि हमारी रचना कौन है, क्या है? क्या हमारी संतान हमारी रचना है, मगर ऐसा भी नहीं है, क्योंकि संतान उत्पत्ति तो एक शारीरिक प्रक्रिया का परिणाम मात्र है.
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जनता एक ज़िम्मेदार संसद का निर्माण करे |
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