जब गलबहियां ले रहे मोदी तो पीछे क्यों रहें योगी

मुकेश अम्बानी दुनिया के कुछ चुनिंदा पूंजीपतियों में भले ही शुमार हों और भले ही उन्हें प्रधानमंत्री का सीधा संरक्षण

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ट्रेनों में होगा अब भरपूर मनोरंजन, देख सकेंगे फिल्म, टीवी सीरियल और कार्टून

नई दिल्ली, (राज लक्ष्मी मल्ल) : भारतीय रेलवे जल्द ही अपने यात्रियों के मनोरंजन के लिए कुछ गिने-चुने ट्रेनों में

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संकट में पाकिस्तानी लोकतंत्र

पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा की स्थिति ऐसी है कि पाकिस्तानी मामलों के विशेषज्ञ तारिक अली जैसे लोग इस नतीजे पर

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ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल: थोड़ी खुशी थोड़े ग़म

ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने मिला जुला प्रदर्शन किया है, परिणाम बहुत बेहतर नहीं हैं कुल मिलाकर प्रदर्शन

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मोहनलालगंज कांड पर राजनाथ मुलायम क्यों…!

राजनीतिक विश्‍लेषकों का तो यह कहना है कि लोस चुनाव में राजनाथ की राह को पहले मुलायम सिंह ने अहम

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लालू और नितीश का मिलाप समाजवाद या अवसरवाद

नीतीश कुमार और लालू प्रसाद बिहार की छात्र राजनीति और जयप्रकाश आंदोलन की उपज हैं. इन दोनों नेताओं ने एक

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सीबीआई की परेशानी

सीबीआई की विवादों में रहने की एक प्रवृत्ति है और वर्तमान सीबीआई प्रमुख रंजीत सिन्हा उस समय विवादों को हवा

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लूट के आरोपी को पुलिस की नौकरी!

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के वर्सोवा इलाके में स्थित मशहूर फिल्म निर्माता साजिद नाडियाडवाला का घर. शाम क़रीब तीन

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हलक़ में अटका हक़

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की एक सौ तेईस वक्फ़ संपत्तियों का मालिकाना हक दिल्ली वक्फ़ बोर्ड को शीघ्र ही सौंपे जाने

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बिहार की राजनीति का असली चेहरा

पिछले दिनों राजधानी दिल्ली के तीन मूर्ति भवन में एबीपी न्यूज़ के एग्जीक्यूटिव एडिटर, डॉ. अनिल सिंह की पुस्तक बिहारः

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टीबी ख़तरनाक है : लाइलाज नहीं

अप्रकट संक्रमण वह है, जब आपको टीबी के कोई लक्षण नहीं दिखते. बैक्टीरिया आपके शरीर में होता तो है, पर

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एफडीआई की मंज़ूरी जनता के साथ धोखा है

देश के ख़ुदरा बाज़ार में एफडीआई की मंजूरी किसानों, मज़दूरों एवं छोटे व्यापारियों के लिए फ़ायदेमंद नहीं है, फिर भी

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अपराध की दुनिया में फंसता बचपन : मासूम या मुजरिम

बदलते परिवेश में बच्चे वक्त से पहले ही ब़डे हो रहे हैं. एक तऱफ वे कम उम्र में तमाम तरह

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सायन-कोलीवाड़ाः मुंबई, जमीन हड़पने की राजधानी बनती जा रही है

उदारीकरण के दौर में ज़मीन सबसे क़ीमती संसाधन बन चुकी है और जहां-जहां लालची बिल्डरों को ज़मीन दिख रही है और यह भी दिख रहा है कि उस ज़मीन पर आम और कमज़ोर आदमी रह रहे हैं, उसे हड़पने के लिए वे पूरी ताक़त लगा रहे हैं. उनके इस कार्य में सरकार से लेकर सरकारी अधिकारी तक उनका साथ दे रहे हैं. सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जगह बिल्डर्स कल्याण ने ले ली है.

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महिला पत्रकार भारतीय मीडिया से ग़ायब हैं

पिछले कुछ वर्षों ख़ासकर नब्बे के दशक के बाद हिंदुस्तान का एक तबक़ा यह मानने लगा कि देश की आत्मा अब दिल्ली और राज्यों की राजधानियों में ही बसने लगी है. उनका मानना है कि महानगरों में महिलाओं को पुरुषों की तरह शिक्षा और रोज़गार के समान अवसर मिल रहे हैं.

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झारखंडः फिर खुलेगी गठबंधन की कलई

प्राकृतिक तापमान में बढ़ोत्तरी के साथ-साथ झारखंड में सियासी गर्मी भी तेज़ी से बढ़ रही है. आगामी 12 जून को होने वाले हटिया विधानसभा क्षेत्र उपचुनाव को लेकर सूबे में राजनीतिक वातावरण बदला-बदला सा दिख रहा है. सत्तारूढ़ एवं विपक्षी पार्टियों ने हटिया के दंगल में उतरने की तैयारी लगभग पूरी कर ली है.

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किराएदारों में खौफ : दिल्ली में प्रॉपर्टी डीलर माफिया बन गए हैं

जिंदगी जीने और सिर छुपाने के लिए एक अदद छत की ज़रूरत होती है, लेकिन अमूमन छोटे शहरों की तरह आसानी से मिलने वाली किराए की छत को दिल्ली में प्रॉपर्टी डीलरों की नज़र लग गई है. तक़रीबन डेढ़ दशक पहले राजधानी दिल्ली में भी निजी पहचान के ज़रिए अथवा ख़ुद सीधे मकान मालिक से संपर्क करके लोग किराए के घर में रहते थे, लेकिन अब यह मुमकिन नहीं है.

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द बैड सेंटा

इटली की राजधानी रोम में बीते दो महीनों में छह बड़ी दुकानों में चोरी हुई. एक दुकानदार ने पुलिस को बताया कि विचित्र वेशभूषा में आए एक व्यक्ति ने बंदूक की नोंक पर कैशियर को लूट लिया. कई दिनों तक माथापच्ची करने के बाद पुलिस को सुराग मिला.

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मितावलीः 9वीं सदी की यह धरोहर संसद भवन जैसी दिखती है

दिल्ली के 100 साल पूरे हो गए. इस जश्न-ए-दिल्ली में सरकारी महकमों से लेकर कई ग़ैर-सरकारी संगठनों ने राजधानी में कई कार्यक्रम आयोजित किए और मशहूर ब्रिटिश वास्तुकार सर एडविन लुटियंस की शान में खूब क़सीदे भी पढ़े.

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अन्ना, अनशन और अवाम

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के मंडी हाउस स्थित नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) के समीप अचानक एक ऑटो रिक्शा वहां खड़े कुछ लोगों के पास आकर रुका. ऑटो चालक ने उनसे पूछा, क्या रामलीला मैदान जाएंगे? वहां मौजूद लोगों ने आश्चर्य भरे लहज़े में कहा, हां जाना तो है, लेकिन कितने पैसे लोगे? इस पर ऑटो चालक बोला, साहब, कमाना-खाना तो रोज है, लेकिन अन्ना जी की मुहिम में हमारा भी कुछ योगदान होना चाहिए.

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देश भर से आई आवाज़: मैं भी अन्ना, तू भी अन्ना

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में भ्रष्टाचार के ख़िला़फ अन्ना हजारे का आमरण अनशन किसी कुंभ से कम नहीं है. जिस तरह कुंभ किसी एक जगह पर न होकर प्रयाग से लेकर नासिक, उज्जैन और हरिद्वार में संपन्न होता है

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नई दिल्‍लीः सौ बरस का सफर

किसी भी भारतीय को यह जानकर हैरानी होगी कि आज की नई दिल्ली किसी परंपरा के अनुसार अथवा स्वतंत्र भारत के राजनीतिक नेताओं की वजह से नहीं, बल्कि एक सौ साल (1911) पहले आयोजित तीसरे दिल्ली दरबार में ब्रिटेन के राजा किंग जॉर्ज पंचम की घोषणा के कारण देश की राजधानी बनी.

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पाटलिपुत्र का दर्द

ईसा से 304 वर्ष पूर्व भारत आए प्रसिद्ध ग्रीक राजदूत मेगास्थनीज ने यदि यह न लिखा होता कि भारत के इस महानतम नगर पाटलिपुत्र (पटना) की सुंदरता और वैभव का मुक़ाबला सुसा और एकबताना जैसे नगर भी नहीं कर सकते, तो शायद आज भारत के गंदे नगरों में गिना जाने वाला पटना कभी इतना सुंदर था, यह मानने के लिए लोग तैयार न होते.

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निराशा से भरा संपादकीय

मीडिया पर वह यहीं नहीं रुकते, उसी में आगे कहते हैं-देश की राजधानी में हर रोज दर्जनों हत्याएं, बलात्कार और लूटपाट की घटनाएं आम हो चुकी हैं. ग़रीबी-अमीरी के बीच की खाई अपराधों और हत्याओं से पाटी जा रही है.

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सीहोर : घर की सुध तो ले लो भैया!

राजधानी भोपाल का पड़ोसी ज़िला सीहोर मध्य प्रदेश के अति पिछड़े और ग़रीब ज़िलों में शुमार है, लेकिन इसे गर्व है कि इसने प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व मुख्यमंत्री सुंदर लाल पटवा एवं वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपना जनप्रतिनिधि चुनकर देश और प्रदेश का भाग्य विधाता बनाया.

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बाबुओं ने किया कायापलट

राजधानी दिल्ली से सटे गाजियाबाद के म्यूनिसिपल अधिकारियों ने, ऐसा लगता है, एक बड़ी पुरानी पहेली का हल ढूंढ लिया है. लंबे समय से लोग यह जानने की कोशिश कर रहे थे कि सरकारी अधिकारियों से काम कराया जाए तो कैसे, लेकिन गाजियाबाद नगर प्रशासन ने इसमें कामयाबी हासिल कर ली है.

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नक्सली राजधानी तक आ गए हैं

छत्तीसगढ़ राज्य में नक्सलियों के हौंसले बुलंद हैं. तमाम कोशिशों के बाद भी प्रशासन और पुलिस उन पर नकेल लगाने में सफल नहीं हुई है. राज्य सरकार ही नहीं, बल्कि भारत सरकार भी नक्सलवादी गतिविधियों पर नियंत्रण पाने के लिए पूरी कोशिश कर रही है लेकिन फिर भी छोटे-छोटे दलों में बंटे नक्सली अपने प्रभाव क्षेत्र को बढ़ाने में सफल हो रहे हैं.

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इस भटकाव की वजह क्या है

बीती 15 नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने एक ऐसे शिक्षक को एक लाख रुपये मुआवजे की सजा से दंडित किया, जिसने आज से 12 वर्ष पहले एक छात्र को पूरे दिन निर्वस्त्र ख़डा रखा था. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रतिभा रानी ने अपने फैसले में उक्त शिक्षक को निर्देश दिया कि वह बतौर मुआवजा एक लाख रुपये पीड़ित छात्र को अदा करे. घटना 25 मई 1997 की है.

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बाबुओं का नया खेल

कामनवेल्थ खेल 2010 की तैयारियों से जुड़े विवाद कई बाबुओं के लिए वरदान बन गए हैं. अब जबकि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि राजधानी में खेलों की तैयारियों को अन्य सभी कार्यों से ज़्यादा प्रमुखता दी जाए, तो ऐसे में तैयारियों से जुड़े कुछ बाबू मौक़े का फायदा उठाते हुए अपनी-अपनी कुर्सियों से चिपक गए हैं. सूत्रों के मुताबिक़, दूरदर्शन की महानिदेशक अरुणा शर्मा ने भी अपना कार्यकाल एक साल और ब़ढाने का प्रबंध कर लिया है. इसके लिए उन्होंने दलील दी है कि वह खेलों के अधिकारिक राज्य प्रसारणकर्ताओं की प्रमुख के तौर पर काम करेंगी.

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