Coal Scam-Supreme Court-Prime Minister
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Gandhi ki dharohar par custom duty
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Breast Cancer
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Breast Cancer [Promo]
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Azadi Ki Doosri Ladai Part-8
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करों द्वारा प्राप्त सरकारी आय
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Posts Tagged ‘राजनीतिक’
वादे से मुकर गए नीतीश?
वादे से मुकर गए नीतीश?

सुप्रीम कोर्ट ने इस पुलिसिया तांडव को जलियावाला बाग से जोड़कर देखा. यह घटना जलियावाला बाग की याद दिला देती है. दरअसल, हम सभी जानते हैं कि पटना की सड़कों पर उस दिन शिक्षकों के साथ क्या हुआ, लेकिन एक दूसरा संकट इन शिक्षकों की पहचान का भी है. आश्‍चर्य की बात तो यह है [...]

Tags: उपमुख्यमंत्री, कर्मचारी, कांग्रेस सरकार, गांधी मैदान, जयप्रकाश नारायण, जलियावाला बाग, नीतीश कुमार, पटना, पुलिसिया तांडव, बजट सत्र, महिला शिक्षकों, मुख्यमंत्री, राजनीतिक, लाठी-गोली, विपक्षी पार्टियां, शिक्षक, शिक्षकों, शिक्षा मंत्री, सड़कों, सरकार, सरकारी कर्मचारी, सुप्रीम कोर्ट, सुशील कुमार मोदी
Posted in कवर स्टोरी-2, राजनीति, राज्य by Author: सरोज सिंह | No Comments » | Read More...
पाश्चारत्य काव्य-चिंतन पर एक दस्तावेज़
पाश्चारत्य काव्य-चिंतन पर एक दस्तावेज़

कविता का जन्म कब हुआ, इस बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है. मगर इतना ज़रूर है कि जब से इंसान ने बोलना सीखा और वह अपनी भावनाओं को शब्दों में पिरोने की कला में माहिर हुआ, तभी कविता का जन्म हुआ होगा. दुनिया की हर सभ्यता में काव्य को वह मुक़ाम हासिल है, जिसने [...]

Tags: आनंदवादी, ऋग्वेद मंत्र, कविता, काव्य-चिंतन, काव्यशास्त्र, दस्तावेज़, दुनिया, नैतिक उपयोगितावादी, प्राचीनकाल, भारतीय, मानव, मानव-कल्याण, मानव-समाज, मानवतावादी, मानववादी, मूल्य-चेतना, मूल्य-सिद्धांत, रचना, राजनीतिक, रीतिवादी, लोकमंगलकारी, विचारधारा, संघर्षपरक, सभ्यता, समाज-सापेक्ष, सामाजिक, सामाजिक मूल्यों, साहित्य, सिद्धांत
Posted in साहित्य by Author: फ़िरदौस ख़ान | 1 Comment » | Read More...
विधाओं के विन्यास का सफ़र
विधाओं के विन्यास का सफ़र

वर्ष दो हज़ार चार में जब मेरे समीक्षात्मक लेखों का पहला संग्रह प्रसंगवश छपा था, तब मेरी रुचि का क्षेत्र हिंदी की साहित्यिक कृतियां ही थीं. लिहाज़ा उस किताब में मैंने गद्य की बहुविध छवियों को समेटा था. दूसरे, साहित्य मुझे विरासत में मिला है. प्रसिद्ध कवि गोपाल सिंह नेपाली मेरे पिताजी प्रो. ब्रजकिशोर सिन्हा [...]

Tags: अंग्रेज़ी, अमिताभ घोष, अमिष त्रिपाठी, अरविंद अडिगा, अरुंधति राय, आत्मकथाओं, आम पाठकों, इंदिरा, कवि, किताब, किरण देसाई, गांधी परिवार, गोपाल सिंह नेपाली, जीवनियों, ताबिश खैर, पंकज मिश्रा, पत्रकारिता, परिचय, पश्चितमी देशों, पुरस्कार, प्रो. ब्रजकिशोर सिन्हा, भारत, रचनाओं, रवीन्द्र कालिया, राजनीतिक, राहुल, शख्सियतों, शास्त्रीय, सलमान रुश्दी, साहित्यिक, सोनिया
Posted in साहित्य by Author: अनंत विजय | 1 Comment » | Read More...
जल, जंगल और ज़मीन बचाने में जुटे आदिवासी
जल, जंगल और ज़मीन बचाने में जुटे आदिवासी

आदिवासियों की पहचान जल, जंगल और ज़मीन से ज़रूर है, लेकिन प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण उन्हें इन दिनों अपने मूल स्थान से विस्थापित होना प़ड रहा है. हालांकि वे अपने अधिकारों के लिए आवाज़ बुलंद कर रहे हैं, लेकिन अफ़सोस कि उनकी आवाज़ नक्कारख़ाने में तूती की आवाज़ ही साबित हो रही [...]

Tags: आज़ादी, आदिवासी, इतिहास, उच्च गुणवत्ता, कंपनियों, काठीकुंड, खनिज, जंगल, जल, ज़मीन, झारखंड, दुमका, देश, पदार्थ, पावर प्लांट, प्रकृति, प्राकृतिक संसाधनों, बिहार, राजनीतिक, राज्य, विरोध, विश्व, सरकारी मशीनरी, स्टील प्लांट
Posted in कवर स्टोरी-2, पर्यावरण, राज्य by Author: शैलेंद्र सिन्हा | No Comments » | Read More...
बांग्लादेश : गृहयुद्ध के हालात
बांग्लादेश : गृहयुद्ध के हालात

बांग्लादेश में हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनमें 80 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. एक तरफ़ विपक्षी दल ट्रिब्यूनल के फैसले को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष का कहना है कि बांग्लादेश की आज़ादी में रुकावट बनने वालों को सज़ा देना ज़रूरी है. कारण [...]

Tags: अपराध, आज़ादी, उम्रकैद, गृहयुद्ध, जमायत ए-इस्लामी, दिलावर हुसैन सईदी, देश, धर्म, नरसंहार, नेता, पाकिस्तान, बलात्कार, बांग्लादेश, भड़क, भारत, महिलाओं, मुक़दमा, मौत, युद्ध, राजनीतिक, लूटपाट, विरोध-प्रदर्शन, शिकार, षड्यंत्र, समर्थक, हड़ताल, हत्या
Posted in कवर स्टोरी-2, चुनाव, राजनीति by Author: राजीव कुमार | No Comments » | Read More...
हमें तीसरे विकल्प की ज़रूरत है
हमें तीसरे विकल्प की ज़रूरत है

बहुत समय के बाद प्रधानमंत्री ने एक राजनीतिक बयान दिया है. हालांकि, इस तरह के बयान के लिए संसद एक सही फोरम नहीं था. उन्होंने कहा कि भाजपा 2004 और 2009 की तरह इस बार भी सत्ता में नहीं आ सकेगी और कांग्रेस एक बार फिर से 2014 में सत्ता में वापस आ जाएगी. उनकी [...]

Tags: अल्पसंख्यकों, आज़ादी, उत्तर भारत, कांग्रेस, क्रांतिकारी, ग़रीबों, घपलों-घोटालों, दक्षिण भारत, दल, दलितों, देश, नरेंद्र मोदी, पूर्वोत्तर भारत, पॉलिसी, प्रधानमंत्री जी, फ्रेमवर्क, बयान, भूमिहीनों, भ्रष्टाचार, राजनीति, राजनीतिक, वर्णित राज्य, विकास, व्यवस्था, शासन, संविधान, समस्याओं, सरकार, सांप्रदायिकता
Posted in राजनीति, स्टोरी-6 by Author: कमल मोरारका | No Comments » | Read More...
किसान क़र्ज़ माफ़ी घोटाला : सच साबित हुई चौथी दुनिया की रिपोर्ट
किसान क़र्ज़ माफ़ी घोटाला : सच साबित हुई चौथी दुनिया की रिपोर्ट

पहले सीडब्लूजी, 2-जी, कोयला और अब सीएजी की एक और रिपोर्ट. न तो घोटालों का सिलसिला थमने का नाम ले रहा है और न ही घोटालेबाज़ों की बेशर्मी कम होने का नाम ले रही है. घोटालेबाज़ों की बेशर्मी की बात इसलिए, क्योंकि इस बार उन लोगों के हिस्से का पैसा लूटा गया है, जो दिन-रात [...]

Tags: क़र्ज़ माफ, कांग्रेस, किसानों, कृषि ऋण, ग़रीब किसानों, घोटाला, घोटालेबाज़ों, घोषणा, चुनाव, बेईमान, बैंक अधिकारियों, मनमोहन सिंह, माफ़ी, यूपीए सरकार, राजनीतिक, राजनीतिक कार्यकर्ताओं, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, लोकसभा चुनाव, सत्तर हजार करोड़, सरकार, सीएजी
Posted in कवर स्टोरी-2, राजनीति by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More...
बंद हो कमोडिटी एक्सचेंज
बंद हो कमोडिटी एक्सचेंज

कमोडिटी एक्सचेंज को अर्थशास्त्री सट्टा बाज़ार मानते हैं, क्योंकि वहां लोगों की गाढ़ी कमाई के साथ खिलवाड़ किया जाता है. खिलाड़ी हैं सटोरिए, देश के कुछ तथाकथित नेता और पूंजीपति. इसलिए चौथी दुनिया का यह मानना है कि यदि कमोडिटी एक्सचेंज बंद हो जाए, तो इससे हमारे देश के किसानों और आम लोगों को फ़ायदा [...]

Tags: अंगे्रजों, अमेरिकी डॉलर, अर्थशास्त्री, आम आदमी, कमोडिटी एक्सचेंज, कारोबार, कारोबारियों, किसान, ख़ून-पसीना, गलियारे, गुजराती व्यापारी, छोटे कारोबारियों, तथाकथित नेता, निर्यातकों, निवेशकों, नेता, ऩुकसान, पी चिदंबरम, पूंजीपति, बजट भाषण, भारत, राजनीतिक, राजनीतिक गलियारे, वित्त मंत्री, विशेषज्ञ, सटोरिए, सट्टा बाज़ार, सरकार, हेजिंग
Posted in Crousel1, कवर स्टोरी, पहला पन्ना by Author: निर्मलेंदु | No Comments » | Read More...
जनतंत्र का आज का स्वरूप

अपने देश में किसी भी राज्य के पंचायत क़ानून ने गांव के सब मतदाताओं को, यानी उनकी मिली हुई ग्रामसभा को कोई अधिकार नहीं दिए हैं, वह हमने देखा. अत: लोग ग्रामसभाओं की बैठक में जाते नहीं. जब ग्रामसभा को स्व-शासन का कोई अधिकार नहीं है, तो लोग इन बैठकों में क्यों उपस्थित रहें? ग्रामसभा [...]

Tags: क़ानून, गांव, गांव के शासन, ग्रामसभा, चुनाव, जन-द्रोही, जनतंत्र, पंचायत, भारत सरकार, भ्रष्टाचार, मतदाताओं, राजनीतिक, राज्य, व्यवस्थाएं, शासन, श्री आर के पाटिल, स्वरूप
Posted in राज्य, समाज by Author: ठाकुर दास बंग | No Comments » | Read More...
लोग तय करते हैं बजट कैसा हो!

बजट एक जटिल विषय है. आम तौर पर बजट कैसे बनता है, इसकी पूरी प्रक्रिया क्या है, इन सब चीजों से आम आदमी का कोई सीधा संबंध नहीं दिखता. और शायद यही वजह भी है कि आम आदमी के लिए बजट एक नीरस एवं उबाऊ घटना बनकर रह जाता है. बजट बनाने की प्रक्रिया से [...]

Tags: अमेरिका, आम आदमी, जन-सुविधाएं, जनसंख्या, झुग्गियों, दक्षिणी अफ्रीका, नगर निगम, न्यूजीलैंड, प्रशासकों, बजट, ब्राजील, भारत, राजनीतिक, लोकतांत्रिक देश, लोग, वर्कर्स पार्टी
Posted in राजनीति by Author: शशि शेखर | No Comments » | Read More...
निर्णयों पर अडिग रहते थे संजय गांधी
निर्णयों पर अडिग रहते थे संजय गांधी

आज़ाद भारत के इतिहास में संजय गांधी ऐसे इकलौते राजनेता हैं, जिनके व्यक्तित्व और क्रियाकलापों के बारे में जानने की जिज्ञासा भारतीय जनमानस में अब भी है, लेकिन उनके बारे में ज़्यादा लिखित सामग्री उपलब्ध नहीं है, लिहाज़ा उनके बारे में सबसे ज़्यादा किंवदंतियां सुनी जाती रही हैं. संजय गांधी ख़ुद कहा करते थे कि [...]

Tags: अटल बिहारी वाजपेयी, अडिग, इंदिरा गांधी, इकलौते, इतिहास, उद्योग मंत्री, जार्ज फर्नांडिस, ज्योतिर्मय बोस, तत्कालीन मुख्यमंत्री, तुर्कमान गेट, निर्णयों, पत्र-पत्रिकाओं, बंसीलाल, भारत, भारतीय जनता पार्टी, युवा कांग्रेस, राज नारायण, राजनीतिक, राजनेता, विनोद मेहता, संजय गांधी, संसद, हरियाणा
Posted in साहित्य by Author: अनंत विजय | No Comments » | Read More...
यह संसद संविधान विरोधी है
यह संसद संविधान विरोधी है

सरकार को आम जनता की कोई चिंता नहीं है. संविधान के मुताबिक़, भारत एक लोक कल्याणकारी राज्य है. इसका साफ़ मतलब है कि भारत का प्रजातंत्र और प्रजातांत्रिक ढंग से चुनी हुई सरकार आम आदमी के जीवन की रक्षा और उसकी बेहतरी के लिए वचनबद्ध है. लेकिन सरकार ने इस लोक कल्याणकारी चरित्र को ही बदल दिया है. सरकार बाज़ार के सामने समर्पण कर चुकी है, लेकिन संसद में किसी ने सवाल तक नहीं उठाया.

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Posted in आंदोलन, कवर स्टोरी, कानून और व्यवस्था, पहला पन्ना, राजनीति, राज्य, विधि-न्याय, समाज by Author: जनरल वी के सिंह | 3 Comments » | Read More...

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Coal Scam-Supreme Court-Prime Minister
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