बिहार की राजनीति का असली चेहरा

पिछले दिनों राजधानी दिल्ली के तीन मूर्ति भवन में एबीपी न्यूज़ के एग्जीक्यूटिव एडिटर, डॉ. अनिल सिंह की पुस्तक बिहारः

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मोदी की जीत के मायने

मोदी को जीतना था, क्योंकि विपक्ष ने विकल्प नहीं दिया. जीत का अंतर घटता या बढ़ता, जीतना मोदी को ही था. लेकिन जीत के साथ ही भारतीय राजनीति और ख़ासकर भाजपा के भीतर एक नई किस्म की राजनीति ज़रूर शुरू होने वाली है. यह राजनीति राहुल बनाम मोदी के नाम पर हो सकती है. यह राजनीति मोदी बनाम गडकरी की हो सकती है. यह राजनीति एनडीए के भीतर भी हो सकती है.

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न थकेंगे, न झुकेंगे

आखिर अन्ना हज़ारे क्या हैं, मानवीय शुचिता के एक प्रतीक, बदलाव लाने वाले एक आंदोलनकारी या भारतीय राजनीति से हताश लोगों की जनाकांक्षा? शायद अन्ना यह सब कुछ हैं. तभी तो इस देश के किसी भी हिस्से में अन्ना चले जाएं, लोग उन्हें देखने-सुनने दौड़े चले आते हैं? उनकी सभाओं में उमड़ने वाली भीड़ को देखकर कई राजनेताओं को रश्क होता होगा.

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भविष्य के भ्रष्टाचारियों के कुतर्क

बहुत चीजें पहली बार हो रही हैं. पूरा राजनीतिक तंत्र भ्रष्टाचार के समर्थन में खड़ा दिखाई दे रहा है. पहले भ्रष्टाचार का नाम लेते थे, तो लोग अपने आगे भ्रष्टाचारी का तमगा लगते देख भयभीत होते हुए दिखाई देते थे, पर अब ऐसा नहीं हो रहा है. भ्रष्टाचार के ख़िला़फ जो भी बोलता है, उसे अजूबे की तरह देखा जाता है. राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े हुए लोग चाहते हैं कि यह आवाज़ या इस तरह की आवाज़ें न निकलें और जो निकालते भी हैं, उनके असफल होने की कामना राजनीतिक दल करते हैं और राजनीतिक दल से जुड़े हुए लोग इसका उपाय बताते हैं कि भ्रष्टाचार के खिला़फ आवाज़ उठाने वाले लोग कैसे असफल होंगे.

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लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ मत कीजिए

सरकार का संकट उसकी अपनी कार्यप्रणाली का नतीजा है. सरकार काम कर रही है, लेकिन पार्टी काम नहीं कर रही है और हक़ीक़त यह है कि कांग्रेस पार्टी की कोई सोच भी नहीं है, वह सरकार का एजेंडा मानने के लिए मजबूर है. सरकार को लगता है कि उसे वे सारे काम अब आनन-फानन में कर लेने चाहिए, जिनका वायदा वह अमेरिकन फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशंस या अमेरिकी नीति निर्धारकों से कर चुकी है.

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जनता को अखिलेश से बहुत उम्मीदें हैं

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के दो फैसलों पर उनकी आलोचना हो रही है. पहला फैसला उत्तर प्रदेश में शाम सात बजे केबाद बाज़ारों और मॉल को बिजली न देना और दूसरा फैसला, जिसमें उन्होंने विधायकों को विकास निधि से कार खरीदने की अनुमति दी थी. मुख्यमंत्री के ये दोनों फैसले आलोचना का विषय ज़रूर बनते, लेकिन मुख्यमंत्री ने दोनों ही फैसलों को लागू होने के 24 घंटे के अंदर वापस ले लिया.

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इतना न भुलाओ कि ज़माना भूल जाए

आज जिस तरह भारतीयों के लिए खेल का मतलब क्रिकेट और क्रिकेट का मतलब सचिन तेंदुलकर है, उसी तरह आज़ादी के दौर में खेल का मतलब हॉकी और खिलाड़ी का मतलब ध्यानचंद था. हम ध्यानचंद को हॉकी के जादूगर के रूप में जानते हैं और सचिन को क्रिकेट का भगवान मानते हैं. यदि 50 साल बाद क्रिकेट को स़िर्फ सचिन तेंदुलकर के नाम से जाना जाए तो क्या यह गावस्कर, कपिल, द्रविड़, गांगुली, कुंबले के साथ ज़्यादती नहीं होगी, जिन्होंने अपना सारा जीवन क्रिकेट की सेवा में लगा दिया.

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आत्मकथा के बहाने इतिहास

इंद्र कुमार गुजराल से मेरी पहली मुलाकात तब हुई थी, जब संसद के बालयोगी सभागार में संतोष भारतीय ने विश्वनाथ प्रताप सिंह की कविता पाठ का आयोजन किया था. वह एक तरह की अनूठी योजना थी, जिसमें चार पूर्व प्रधानमंत्रियों ने अपने साथी पूर्व प्रधानमंत्री के आयोजन के लिए एक साथ लोगों को आमंत्रित किया था.

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उत्तर प्रदेश : अन्ना और रामदेव, कांग्रेस के लिए ख़तरा

सरकार और राजनेता अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए किस तरह लोगों की छवि धूमिल करते हैं, इसकी ताजा मिसाल हैं समाजसेवी अन्ना हजारे और योग गुरु बाबा रामदेव. कुसूर यह है कि एक जनता को भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने के लिए सख्त क़ानून की वकालत कर रहा है और दूसरा विदेशों में जमा काला धन वापस मंगाने के लिए हाथ-पैर मार रहा है.

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अवैध खनन : सरकार एजेंट की भूमिका निभा रही है

देश में अवैध खनन का कारोबार बदस्तूर जारी है. राजनेताओं के संरक्षण और अ़फसरों की मिलीभगत से खनन मा़फिया देश के खनिज बहुल राज्यों में प्राकृतिक खनिजों को लूटने में जुटे हैं.

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मिले ना मिले हम

काफी दिनों से ख़बर आ रही थी कि कंगना रानावत राजनेता रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान के साथ ज़्यादातर समय बिता रही हैं. बात यह है कि दोनों फिल्म मिले ना मिले हम में साथ काम कर रहे हैं.

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सामूहिक विवाह कार्यक्रम: अगले जन्म मोहे बिटिया ही कीजो

कहते हैं, जिस दिन घर में बेटी पैदा होती है, उसी दिन से बाप की कमर झुक जाती है. बहुत हद तक यह बात भारतीय समाज के लिए सही भी है, क्योंकि दहेज जैसी प्रथा कब एक विकराल सामाजिक समस्या बन गई, पता ही नहीं चला.

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सुप्रीम कोर्ट के संकेत चिंता का विषय हैं

देश की संसद ठप है. कौन जांच करे, पार्लियामेंट की ज्वाइंट कमेटी या पब्लिक एकाउंट्‌स कमेटी, यह बहस है. दोनों ने नाक का सवाल बना लिया है, पर चिंता का विषय है कि क्यों संसद के बाहर न कोई राजनेता और न राजनैतिक दल, एक लाख छिहत्तर हज़ार करोड़ के भ्रष्टाचार तथा कॉमनवेल्थ खेलों में हुए सत्तर हज़ार करोड़ के ख़र्चों में हुई गड़बड़ी को मुख्य मुद्दा नहीं बना रहे हैं.

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टोनी ब्‍लेयर की जर्नी

टोनी ब्लेयर ब्रिटेन के पहले ऐसे राजनेता थे, जो बग़ैर किसी सरकारी अनुभव के सीधे प्रधानमंत्री के पद पर आसीन हुए थे. वह ब्रिटेन के लंबे लोकतांत्रिक इतिहास के दूसरे प्रधानमंत्री थे, जिनके नेतृत्व में पार्टी ने आम चुनाव में लगातार तीसरी बार जीत हासिल की थी. इसके पहले यह गौरव स़िर्फ मारग्रेट थैचर को मिला था. विश्व युद्ध के बाद लेबर पार्टी के नौ नेताओं में स़िर्फ तीन ने आम चुनाव में जीत हासिल की, उनमें से भी टोनी ब्लेयर एक हैं.

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अमेरिकी युद्ध अब पाकिस्‍तान में?

पिछले दस सालों के इतिहास का अवलोकन किया जाए तो यह बात स्पष्ट हो जाती है कि अगर पाकिस्तान की ओर से बिना शर्त सहयोग न मिलता और खुफिया जानकारियां मुहैय्या न कराई गई होतीं तो अमेरिका को हरगिज़ यह साहस न होता कि वह अ़फग़ानिस्तान में अपनी सेना दाख़िल कर सके.

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खेल खत्म नहीं हुआ

हिंदुस्तान के अब तक के सबसे बड़े घोटाले का खेल अभी ख़त्म नहीं हुआ है. अभी तो अंडरवर्ल्ड के किस्से का खुलासा होना बाक़ी है. ललित मोदी बीसीसीआई के पापों का घड़ा फोड़ने की धमकी दे रहे हैं क्योंकि आज हर कोई उनके ख़िला़फ है. आपने मारियो पूजो की किताब पर बनी फिल्म गॉडफादर देखी हो तो यह समझ लीजिए आज हालात उससे ज़्यादा अलग नहीं हैं.

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चौथी दुनिया ने पहले ही किया था खुलासा यह आईपीएल नहीं इंडियन फिक्सिंग लीग है

महाभारत युग में द्रौपदी का चीरहरण कोई अतिश्योक्ति नहीं, बल्कि समाज का एक आईना था, तत्कालीन सामाजिक परिस्थितियों का वास्तविक प्रतिबिंब था. खेल की दुनिया अब दूध की धुली नहीं है और भारत इसका अगला ठिकाना है. क्रिकेट में फिक्सिंग का खेल तो अब कॉरपोरेट का रूप लेता जा रहा है.

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प्रधानमंत्री पद की दौड़ में बाबा रामदेव

जिस काम को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नहीं कर सका, जिसे करने की आस लिए विश्व हिंदू परिषद बू़ढी होने लगी है और भाजपा भावी प्रधानमंत्री का नाम घोषित करने के बाद भी इस सपने की ओर एक क़दम नहीं बढ़ पाई, उस काम को अब एक बाबा पूरा करना चाहता है. इस बाबा ने इंग्लैंड में एक पूरा आइलैंड ख़रीद लिया है, इसने अमेरिका के ह्यूस्टन में लगभग तीन सौ एकड़ ज़मीन ख़रीद ली है.

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उच्च शिक्षा विभाग बदहाली का शिकार

मध्य प्रदेश के किसी विश्वविद्यालय में उप कुलपति बनने से बेहतर है किसी होटल का मैनेजर बनना. यह कथन है लेफ्टिनेंट जनरल (अवकाशप्राप्त) के टी सतारावाला का. इस कथन की पृष्ठभूमि यह है कि 1978 में सतारावाला को जबलपुर विश्वविद्यालय का उप कुलपति नियुक्त किया गया था.

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अमिताभ को अपमानित मत करो

अमिताभ बच्चन को अभी और अपमान सहने पड़ सकते हैं. एक व्यक्ति के नाते उनकी व्यथा को कोई समझना नहीं चाहता. कोई से हमारा मतलब आम जनता से नहीं, बल्कि खास लोगों से है. ये खास लोग कांग्रेस से रिश्ता रखते हैं और किसी हद तक जा सकते हैं, क्योंकि इन्हें लगता है कि इनकी हरकतों से सोनिया गांधी और राहुल गांधी खुश होकर इन्हें शाबाशी देंगे.

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सियासी तैयारियों का केंद्र बन रहा है उत्‍तर प्रदेश

राजनेताओं की अचानक बढ़ी चहलक़दमी से उत्तर प्रदेश का राजनीतिक पारा चढ़ गया है. दरअसल यह तैयारी आने वाले 2012 के विधानसभा चुनाव के लिए है. कांग्रेस ने तो लोकसभा चुनाव के बाद ही राहुल गांधी के नेतृत्व में मिशन 2012 पर काम शुरू कर दिया था, लेकिन बसपा ने 15 मार्च 2010 की महारैली में अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं को आने वाले समय में एकजुट होकर कांग्रेस, समाजवादी और भारतीय जनता पार्टी के कथित दुष्प्रचार से सतर्क रहने की हिदायत देते हुए तैयारी का संकेत दिया है.

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पंचायत चुनाव की कठिन डगर

झारखंड के मुख्यमंत्री शिबू सोरेन 15 जून से पहले पंचायत चुनाव की घोषणा कर चुके हैं और उप मुख्यमंत्री रघुवर दास उनके सुर में सुर मिलाकर बरसात के पहले पंचायत चुनाव करा लेने का दावा कर रहे हैं. हाल में भूरिया आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप सिंह भूरिया एक कार्यशाला में शिरकत करने रांची आए.

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स्वर्णिम नहीं, भ्रष्टतम राज्य कहिए

मध्य प्रदेश में प्रत्येक नागरिक भ्रष्टाचार के बीच जन्म लेता है, भ्रष्टाचार के बीच ही पलता और बड़ा होता है और भ्रष्टाचार को भोगते हुए मर भी जाता है. लेकिन मरने के बाद भी भ्रष्टाचार से उसका पीछा नहीं छूटता. यह किसी दार्शनिक का चिंतन वाक्य नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश के नागरिकों का भोगा हुआ यथार्थ है.

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