सुप्रीम कोर्ट के संकेत चिंता का विषय हैं

देश की संसद ठप है. कौन जांच करे, पार्लियामेंट की ज्वाइंट कमेटी या पब्लिक एकाउंट्‌स कमेटी, यह बहस है. दोनों ने नाक का सवाल बना लिया है, पर चिंता का विषय है कि क्यों संसद के बाहर न कोई राजनेता और न राजनैतिक दल, एक लाख छिहत्तर हज़ार करोड़ के भ्रष्टाचार तथा कॉमनवेल्थ खेलों में हुए सत्तर हज़ार करोड़ के ख़र्चों में हुई गड़बड़ी को मुख्य मुद्दा नहीं बना रहे हैं.

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अब हमारा काम बोलेगा-अर्जुन मुंडा

राजनैतिक अस्थिरता और विपरीत परिस्थितियों के कारण ही झारखंड का समुचित विकास नहीं हो पाया. बुनियादी समस्याओं का पूरी तरह निराकरण नहीं हो सका. यहां विकास की रफ़्तार उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ की तुलना में धीमी रही.

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बिहार पूरे देश को सबक दे

हम क्यों बार-बार बिहार के लोगों से अपील कर रहे हैं. यह सवाल उन राजनैतिक व्यक्तियों ने हमसे पूछा है, जो ख़ुद अपने दलों के आलोचक हैं. हालांकि उनका कहना है कि हमारी अपील बिल्कुल सही है और इसका बिहार के लोगों पर असर भी हो रहा है, क्योंकि जनता बातचीत में अपराधियों, दागियों और बाहुबलियों के ख़िला़फ खुलकर बात करने लगी है तथा उनके खिलाफ अपना गुस्सा प्रगट करने लगी है, जिन्होंने अपने परिवार के लोगों को चुनाव में खड़ा किया है.

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अब संभलना बहुत जरूरी है

पहले प्रधानमंत्री और बाद में सोनिया गांधी ने कहा कि कॉमनवेल्थ खेलों को हो जाने दें, भ्रष्टाचार की जांच होगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. दोनों का बयान अच्छा लगा, पर ऐसे बयान तो हमने पहले भी देखे हैं. इन बयानों पर टिप्पणी बाद में, पहले हम राष्ट्रीय मनोविज्ञान की बात करते हैं.

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दिग्गजों के बीच शह-मात का खेल शुरू

छपरा विधान सभा क्षेत्र में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनैतिक गतिविधियां तेज़ हो गई हैं. राजनीतिक रूप से यह क्षेत्र अति संवेदनशील माना जाता है. नए परिसीमन के बाद होने वाले इस विस चुनाव में विभिन्न पार्टियों से जु़डे सक्रिय दावेदारों की फेहरिस्त काफी लंबी है.

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प्रधानमंत्री पद की दौड़ में बाबा रामदेव

जिस काम को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नहीं कर सका, जिसे करने की आस लिए विश्व हिंदू परिषद बू़ढी होने लगी है और भाजपा भावी प्रधानमंत्री का नाम घोषित करने के बाद भी इस सपने की ओर एक क़दम नहीं बढ़ पाई, उस काम को अब एक बाबा पूरा करना चाहता है. इस बाबा ने इंग्लैंड में एक पूरा आइलैंड ख़रीद लिया है, इसने अमेरिका के ह्यूस्टन में लगभग तीन सौ एकड़ ज़मीन ख़रीद ली है.

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ग्‍लोबल वार्मिंग बनाम मानवाधिकार

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए उठाए गए क़दमों की सुस्त चाल से, इससे प्रभावित हो रहे समुदायों में स्वाभाविक रूप से निराशा बढ़ी. परंपरागत राजनैतिक-वैज्ञानिक पद्धतियों पर आधारित उक्त उपाय ज़्यादा प्रभावी साबित नहीं हो रहे थे, पीड़ित लोगों की समस्याओं की अनदेखी हो रही थी और सबसे बड़ी बात यह थी कि मानवीय गतिविधियों के चलते वैश्विक तापमान में हो रही वृद्धि के लिए ज़िम्मेदारी तय करने की कोई व्यवस्था न होने से प्रभावित समुदायों को लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था.

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सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई आशा

चलिए, आशा की किरण तो दिखाई दी. भारत में जैसा राजनैतिक माहौल है और जिस तरह राजनैतिक दल अपनी सोच बदल रहे हैं, उससे नहीं लगता कि कुछ बुनियादी बदलाव आसानी से हो पाएंगे. वाई एस आर ने आंध्र प्रदेश में मुसलमानों को चार प्रतिशत आरक्षण दिया था, जिसका वायदा उन्होंने अपने घोषणापत्र में किया था.

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यह राहुल के लिए है

संसद गरम लावे की तरह सुलग रही है. इस सुलगन का कितना अंदाज़ा सोनिया गांधी, राहुल गांधी और भाजपा के नेताओं को है, हमें नहीं पता पर हम चाहेंगे कि उन्हें पता चले, क्योंकि जो राज्यसभा में हुआ वह अगर आने वाले कल का संकेत है तो हमें यह मान लेना चाहिए कि कुछ अशुभ भविष्य में भी होने वाला है.

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