अपने नौसैनिकों को न लौटाने का फैसला लेकर इटली ने न केवल भारत के साथ धोखा किया है, बल्कि भारत का अपमान भी किया है. ऐसे में भारत को भी अपने अपमान का बदला लेने के लिए इटली को जवाब देना चाहिए और उसके ख़िलाफ़ कठोर कार्रवाई भी करनी चाहिए, अन्यथा वैश्विक स्तर पर भारत [...]
Tags: अंतरराष्ट्रीय न्यायालय, इटली, देवब्रत साहा, नौसैनिकों, भाजपा, भारत, भारतीय क़ानून, भारतीय प्रधानमंत्री, भारतीय मछुआरों, भारतीय राजदूत, मनमोहन सिंह, मारियो मोंटी, मालवाहक जहाज, यूपीए सरकार, राजदूत, राष्ट्रपति, विदेश मंत्रालय, विदेश मंत्री, विश्व, समुद्री सीमा, स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र Posted in राजनीति, विदेश, स्टोरी-6 by Author: राजीव कुमार | No Comments » | Read More... |
फ्रांस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा को किन अर्थों में देखा जाना चाहिए. क्या यह फ्रांस की रणनीति का हिस्सा है या फिर फ्रांस के नए राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद को ऐसा लगा कि अभी भारत का साथ अन्य देशों की अपेक्षा ज़्यादा लाभकारी हो सकता है. भारत के साथ फ्रांस के अपने हित जुड़े हुए [...]
Tags: अंतरिक्ष, अनुसंधान एवं विकास, अमेरिकी राष्ट्रपति, ओलांद, चीन, ज़रूरत, परियोजनाओं, पाकिस्तान, फ्रांस, भारत, रणनीति, राष्ट्रपति, रेलवे के विकास, वैज्ञानिक, शिक्षा, समझौता, सांस्कृतिक विनिमय, सुरक्षा, हस्ताक्षर Posted in कवर स्टोरी-2, राजनीति, विदेश by Author: राजीव | No Comments » | Read More... |
ट्रेड यूनियनों की दो दिवसीय हड़ताल के पीछे मक़सद क्या था और श्रमिक संगठनों ने बजट सत्र से ठीक पहले सड़कों पर उतरने का फ़ैसला क्यों किया, इसी मुद्दे पर चौथी दुनिया संवाददाता अभिषेक रंजन सिंह ने ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) के राष्ट्रीय महासचिव और सीपीआई सांसद गुरुदास दासगुप्ता से विस्तृत बातचीत की, [...]
Tags: अधिकारों की लड़ाई, एकजुटता, कम्युनिस्ट पार्टियां, किसानों, गुरुदास दासगुप्ता, भ्रष्टाचार, मज़दूरों, महंगाई, यूपीए सरकार, राष्ट्रपति, राष्ट्रीय महासचिव, संसद, संसद और सड़क, सड़क, सरकार, सीपीआई सांसद, हड़ताल Posted in आंदोलन, स्टोरी-6 by Author: अभिषेक रंजन सिंह | 1 Comment » | Read More... |
यूपीए 2 के लिए बुरा वक्त अभी ख़त्म नहीं हुआ है. पहले सॉलिसिटर जनरल रोहिंटन फली नरीमन ने इस्तीफ़ा दिया. इस्तीफ़ा इसलिए, क्योंकि क़ानून मंत्री के साथ उनके किसी मुद्दे पर मतभेद थे. सत्ता के गलियारों में यह चर्चा थी कि उनके विचारों में मतभेद का कारण कॉरपोरेट हाउस से संबंधित था. ज़ाहिर तौर पर [...]
Tags: अफजल गुरु, क़ानून मंत्री, घोटाला, चुनाव, प्रधानमंत्री, भारतीय परंपरा, यूपीए 2, राष्ट्रपति, रिश्ववतखोरी, सीबीआई Posted in राजनीति, राज्य, स्टोरी-6 by Author: कमल मोरारका | No Comments » | Read More... |
विदेशी पूंजी निवेश के बारे में पिछली बार सरकार ने फैसला ले लिया था, लेकिन संसद के अंदर यूपीए के सहयोगियों ने ही ऐसा विरोध किया कि सरकार को पीछे हटना पड़ा. खुदरा बाज़ार में विदेशी निवेश का विरोध करने वालों में ममता बनर्जी सबसे आगे रहीं. सरकार ने कमाल कर दिया. भारत दौरे पर आई अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ममता से मिलने सीधे कोलकाता पहुंच गईं.
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कैप्टन लक्ष्मी सहगल कभी पहचान की मोहताज नहीं रहीं. उनकी ज़िंदगी का हर पड़ाव उनके राजनीतिक उदय की एक अप्रत्याशित कहानी कहता है. आज़ाद हिंद फौज में कैप्टन बनने से लेकर 2002 में राष्ट्रपति के चुनाव लड़ने तक वह भारतीय राजनीति में सकारात्मक भूमिका निभाती रहीं. नेताजी सुभाष चंद्र बोस की क़रीबी मानी जाने वाली लक्ष्मी सहगल का 94 वर्ष की उम्र में कानपुर में निधन हो गया.
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वर्ष 2008 में ग्लोबल इकोनॉमी स्लो डाउन (वैश्विक मंदी) आया. उस समय वित्त मंत्री पी चिदंबरम थे. हिंदुस्तान में सेंसेक्स टूट गया था, लेकिन आम भावना यह थी कि इस मंदी का हिंदुस्तान में कोई असर नहीं होने वाला है. उन दिनों टाटा वग़ैरह का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा था और एक धारणा यह बनी कि भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व की अर्थव्यवस्था की ज़रूरत नहीं है.
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प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं. ऐसे में उनके चार दशक पुराने राजनीतिक करियर की समीक्षा की जा रही है. देश की वर्तमान खराब आर्थिक हालत और उसमें प्रणब बाबू की भूमिका पर भी खूब चर्चा हो रही है, लेकिन इस सबके बीच एक और अहम मसला है, जिस पर ज़्यादा बात नहीं हो रही है. खासकर ऐसे समय में, जबकि बिगड़ी आर्थिक स्थिति को न सुधार पाने के लिए प्रणब मुखर्जी को ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा हो. यह सवाल सीधे-सीधे वित्त मंत्री के सलाहकार से जुड़ा हुआ है.
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अमेरिका में राष्ट्रपति के लिए चुनाव अभियान उसी दिन से शुरू हो जाता है, जिस दिन नया राष्ट्रपति शपथ लेता है. भारत में राष्ट्रपति और लोकसभा के चुनाव के बीच दो साल का अंतराल है और अभी से प्रधानमंत्री पद के लिए अभियान शुरू हो गया है. राष्ट्रपति पद के किसी एक उम्मीदवार को समर्थन देने के मुद्दे पर एनडीए का राज़ी होना मुश्किल है. भाजपा 2014 के आम चुनाव की तैयारी में जुट गई है.
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हिंदुस्तान की राजनीति में इंदिरा जी की हत्या के बाद प्रणब मुखर्जी का एक विशेष स्थान रहा. जब इंदिरा जी की हत्या हुई तो प्रणब मुखर्जी और राजीव गांधी दोनों दिल्ली से बाहर थे. न केवल बाहर थे, बल्कि दोनों साथ थे. वापस लौटते हुए जब बातचीत हुई कि अगला प्रधानमंत्री कौन बनेगा, क्योंकि इंदिरा जी की हत्या हो गई है और उनकी लाश दिल्ली में रखी हुई है तो प्रणब मुखर्जी ने लोगों से कहा कि मैं ही सबसे वरिष्ठ हूं और मुझे ही प्रधानमंत्री बनना चाहिए.
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प्रणब मुखर्जी को बधाई देनी चाहिए. उन्हें बधाई इसलिए नहीं देनी चाहिए कि वह कांग्रेस के उम्मीदवार हैं, बल्कि उन्हें इसलिए बधाई देनी चाहिए, क्योंकि वह देश में जीवित उन चंद लोगों में से हैं, जिन्हें राजनीतिज्ञ कह सकते हैं.
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जनता एक ज़िम्मेदार संसद का निर्माण करे |
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