राजनीतिक दलों से लोकलाज और नैतिकता की उम्मीद बेमानी है

वक्त, नैतिकता, नियम-कानून कैसे बदलते हैं, इसका प्रमाण और इसका मनोविज्ञान आज हमारे सामने है. आजादी के बाद देश के

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न्यू इंडिया का मंत्र: बेरोज़गार खत्म, बेरोज़गारी खत्म!

बेरोज़गारी खत्म होना किसी भी सरकार या देश के लिए अच्छी खबर मानी जाती है, लेकिन क्या विडंबना है कि

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सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर परेशान किए जा रहे बोधगया के व्यापारी

जुलाई 2013 में हुए बम विस्फोट तथा जनवरी 2018 में महाबोधि मंदिर को दहलाने की कोशिशों ने बोधगया आने वाले

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कांग्रेस, टीएमसी और आरजेडी ने किया जीएसटी लॉन्चिंग का बायकॉट, टाटा की मौजूदगी रही खास

नई दिल्ली : संसद के ऐतिहासिक सेंट्रल हॉल में हुए कार्यक्रम के साथ ही आधी रात को देश में वस्तु

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मोदी देंगे आडवाणी को गुरुदक्षिणा, बनाएंगे राष्ट्रपति!

चौथी दुनिया ब्यूरो : भाजपा मार्गदर्शक मंडल के सदस्य और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भारत के अगले राष्ट्रपति बन

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साहित्य के नायकों के प्रति उदासीन समाज

जादुई यथार्थवाद के जनक गाब्रिएल गार्सिया मार्केज को श्रद्धांजलि देने के लिए मैक्सिको सिटी के पैलेस ऑफ फाइन आर्ट्स में

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लोकतंत्र के इस महापर्व में निर्वाचन आयोग की भूमिका

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, इसलिए निश्चित रूप से भरतीय आम चुनाव की प्रक्रिया दुनिया के किसी भी

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लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व

राजनीतिक पंडितों की नकारात्मक भविष्वाणियों को ध्वस्त करते हुए आज भारत खुद को एक जीवंत लोकतंत्र के रूप में स्थापित

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इटली की मनमानी – भारत को करारा जवाब देना होगा

अपने नौसैनिकों को न लौटाने का फैसला लेकर इटली ने न केवल भारत के साथ धोखा किया है, बल्कि भारत

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भारत- फ्रांस, दोनों को एक दूसरे की ज़रूरत है

फ्रांस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा को किन अर्थों में देखा जाना चाहिए. क्या यह फ्रांस की रणनीति का हिस्सा

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संसद और सड़क दोनों जगह लड़ेंगे: गुरुदास दासगुप्ता

ट्रेड यूनियनों की दो दिवसीय हड़ताल के पीछे मक़सद क्या था और श्रमिक संगठनों ने बजट सत्र से ठीक पहले

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एक नहीं, देश को कई केजरीवाल चाहिए

साधारण पोशाक में किसी आम आदमी की तरह दुबला-पतला नज़र आने वाला शख्स, जो बगल से गुजर जाए तो शायद उस पर किसी की नज़र भी न पड़े, आज देश के करोड़ों लोगों की नज़रों में एक आशा बनकर उभरा है. तीखी बोली, तीखे तर्क और ज़िद्दी होने का एहसास दिलाने वाला शख्स अरविंद केजरीवाल आज घर-घर में एक चर्चा का विषय बन बैठा है. अरविंद केजरीवाल की कई अच्छाइयां हैं तो कुछ बुराइयां भी हैं. उनकी अच्छाइयों और बुराइयों का विश्लेषण किया जा सकता है, लेकिन इस बात पर दो राय नहीं है कि देश में आज भ्रष्टाचार के खिला़फ जो माहौल बना है, उसमें अरविंद केजरीवाल का बड़ा योगदान है.

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प्रधानमंत्री विदेशी पूंजी लाएंगे

विदेशी पूंजी निवेश के बारे में पिछली बार सरकार ने फैसला ले लिया था, लेकिन संसद के अंदर यूपीए के सहयोगियों ने ही ऐसा विरोध किया कि सरकार को पीछे हटना पड़ा. खुदरा बाज़ार में विदेशी निवेश का विरोध करने वालों में ममता बनर्जी सबसे आगे रहीं. सरकार ने कमाल कर दिया. भारत दौरे पर आई अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ममता से मिलने सीधे कोलकाता पहुंच गईं.

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लक्ष्‍मी सहगल : लड़ाई अब भी जारी है

कैप्टन लक्ष्मी सहगल कभी पहचान की मोहताज नहीं रहीं. उनकी ज़िंदगी का हर पड़ाव उनके राजनीतिक उदय की एक अप्रत्याशित कहानी कहता है. आज़ाद हिंद फौज में कैप्टन बनने से लेकर 2002 में राष्ट्रपति के चुनाव लड़ने तक वह भारतीय राजनीति में सकारात्मक भूमिका निभाती रहीं. नेताजी सुभाष चंद्र बोस की क़रीबी मानी जाने वाली लक्ष्मी सहगल का 94 वर्ष की उम्र में कानपुर में निधन हो गया.

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असफल वित्त मंत्री सक्रिय राष्‍ट्रपति

वर्ष 2008 में ग्लोबल इकोनॉमी स्लो डाउन (वैश्विक मंदी) आया. उस समय वित्त मंत्री पी चिदंबरम थे. हिंदुस्तान में सेंसेक्स टूट गया था, लेकिन आम भावना यह थी कि इस मंदी का हिंदुस्तान में कोई असर नहीं होने वाला है. उन दिनों टाटा वग़ैरह का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा था और एक धारणा यह बनी कि भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व की अर्थव्यवस्था की ज़रूरत नहीं है.

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ओमिता पॉल महान सलाहकार

प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं. ऐसे में उनके चार दशक पुराने राजनीतिक करियर की समीक्षा की जा रही है. देश की वर्तमान खराब आर्थिक हालत और उसमें प्रणब बाबू की भूमिका पर भी खूब चर्चा हो रही है, लेकिन इस सबके बीच एक और अहम मसला है, जिस पर ज़्यादा बात नहीं हो रही है. खासकर ऐसे समय में, जबकि बिगड़ी आर्थिक स्थिति को न सुधार पाने के लिए प्रणब मुखर्जी को ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा हो. यह सवाल सीधे-सीधे वित्त मंत्री के सलाहकार से जुड़ा हुआ है.

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आम चुनाव 2014 की तैयारी

अमेरिका में राष्ट्रपति के लिए चुनाव अभियान उसी दिन से शुरू हो जाता है, जिस दिन नया राष्ट्रपति शपथ लेता है. भारत में राष्ट्रपति और लोकसभा के चुनाव के बीच दो साल का अंतराल है और अभी से प्रधानमंत्री पद के लिए अभियान शुरू हो गया है. राष्ट्रपति पद के किसी एक उम्मीदवार को समर्थन देने के मुद्दे पर एनडीए का राज़ी होना मुश्किल है. भाजपा 2014 के आम चुनाव की तैयारी में जुट गई है.

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प्रणब मुखर्जी सफल राष्ट्रपति साबित होंगे

हिंदुस्तान की राजनीति में इंदिरा जी की हत्या के बाद प्रणब मुखर्जी का एक विशेष स्थान रहा. जब इंदिरा जी की हत्या हुई तो प्रणब मुखर्जी और राजीव गांधी दोनों दिल्ली से बाहर थे. न केवल बाहर थे, बल्कि दोनों साथ थे. वापस लौटते हुए जब बातचीत हुई कि अगला प्रधानमंत्री कौन बनेगा, क्योंकि इंदिरा जी की हत्या हो गई है और उनकी लाश दिल्ली में रखी हुई है तो प्रणब मुखर्जी ने लोगों से कहा कि मैं ही सबसे वरिष्ठ हूं और मुझे ही प्रधानमंत्री बनना चाहिए.

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प्रणब मुखर्जी बधाई के पात्र हैं

प्रणब मुखर्जी को बधाई देनी चाहिए. उन्हें बधाई इसलिए नहीं देनी चाहिए कि वह कांग्रेस के उम्मीदवार हैं, बल्कि उन्हें इसलिए बधाई देनी चाहिए, क्योंकि वह देश में जीवित उन चंद लोगों में से हैं, जिन्हें राजनीतिज्ञ कह सकते हैं.

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मिस्र : हमला लोकतांत्रिक रवैया नहीं

होस्नी मुबारक के विरोध में जब मिस्र में आंदोलन किया गया था, तब ऐसा लगा था कि इस देश में बदलाव आएगा, लोकतंत्र की बहाली होगी, लोगों की भावनाओं का आदर किया जाएगा, लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव होंगे और चुनाव में जनता जिसे समर्थन देगी, उसे सभी दल के लोग मानेंगे, लेकिन राष्ट्रपति के चुनाव के साथ ही दलों की मानसिकता सामने आने लगी है.

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ओलांद के हाथों में फ्रांस की बागडोर

राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव संपन्न हो चुका है. सरकोज़ी चुनाव हार गए हैं और फ्रांस्वा ओलांद अब देश के नए राष्ट्रपति होंगे. सोशलिस्ट पार्टी के ओलांद ने फ्रांस की जनता से कुछ वायदे किए हैं. अब उन वायदों को पूरा करना उनकी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी होगी. सरकोज़ी की हार की सबसे बड़ी वजह यूरो ज़ोन का आर्थिक संकट और उससे निपटने में नाकामयाबी है. यूरोप के राष्ट्र आर्थिक संकट से बाहर आने के लिए मितव्ययता की नीति अपना रहे हैं.

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