कोयला महाघोटाला : चौथी दुनिया की रिपोर्ट सच साबित हुई

देश के उच्चतम न्यायालय ने पिछले 17 वर्षों में एनडीए और यूपीए समेत अन्य सरकारों के कार्यकाल के दौरान हुए

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मुस्लिम सशक्तिकरण राजनीतिक फोरम बहुत ज़रूरी

स्वाधीनता के बाद मुसलमान देश की लगभग सभी राजनीतिक पार्टियों, यहां तक कि भाजपा के भी हिस्सा रहे और निर्वाचित-मनोनीत

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इंडियन एक्‍सप्रेस की पत्रकारिता- 2

अगर कोई अ़खबार या संपादक किसी के ड्राइंगरूम में ताकने-झांकने लग जाए और गलत एवं काल्पनिक कहानियां प्रकाशित करना शुरू कर दे तो ऐसी पत्रकारिता को कायरतापूर्ण पत्रकारिता ही कहेंगे. हाल में इंडियन एक्सप्रेस ने एक स्टोरी प्रकाशित की थी, जिसका शीर्षक था, सीक्रेट लोकेशन. यह इस अ़खबार में प्रकाशित होने वाले नियमित कॉलम डेल्ही कॉन्फिडेंशियल का एक हिस्सा थी.

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इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकारिता – 1

भारतीय सेना की एक यूनिट है टेक्निकल सर्विस डिवीजन (टीडीएस), जो दूसरे देशों में कोवर्ट ऑपरेशन करती है. यह भारत की ऐसी अकेली यूनिट है, जिसके पास खुफिया तरीके से ऑपरेशन करने की क्षमता है. इसे रक्षा मंत्री की सहमति से बनाया गया था, क्योंकि रॉ और आईबी जैसे संगठनों की क्षमता कम हो गई थी. यह इतनी महत्वपूर्ण यूनिट है कि यहां क्या काम होता है, इसका दफ्तर कहां है, कौन-कौन लोग इसमें काम करते हैं आदि सारी जानकारियां गुप्त हैं, टॉप सीक्रेट हैं, लेकिन 16 अगस्त, 2012 को शाम छह बजे एक सफेद रंग की क्वॉलिस गाड़ी टेक्निकल सर्विस डिवीजन के दफ्तर के पास आकर रुकती है, जिससे दो व्यक्ति उतरते हैं. एक व्यक्ति क्वॉलिस के पास खड़े होकर इंतज़ार करने लगता है और दूसरा व्यक्ति यूनिट के अंदर घुस जाता है.

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रंगराजन समिति की सिफारिश किसान विरोधी

पिछले दिनों राजधानी दिल्ली में गन्ना उत्पादक किसानों ने संसद का घेराव किया. आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुल्तान अहमद भी खुलकर सामने आए. देश के अलग-अलग राज्यों से आए किसान जब संसद के बाहर आंदोलन कर रहे थे, उसी दिन संसद के भीतर माननीय सदस्य एफडीआई के मुद्दे पर बहस कर रहे थे.

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हम तो ख़ुद अपने हाथों बेइज़्ज़त हो गए

जी न्यूज़ नेटवर्क के दो संपादक पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिए गए. इस गिरफ्तारी को लेकर ज़ी न्यूज़ ने एक प्रेस कांफ्रेंस की. अगर वे प्रेस कांफ्रेंस न करते तो शायद ज़्यादा अच्छा रहता. इस प्रेस कांफ्रेंस के दो मुख्य बिंदु रहे. पहला यह कि जब अदालत में केस चल रहा है तो संपादकों को क्यों गिरफ्तार किया गया और दूसरा यह कि पुलिस ने धारा 385 क्यों लगाई, उसे 384 लगानी चाहिए थी. नवीन जिंदल देश के उन 500 लोगों में आते हैं, जिनके लिए सरकार, विपक्षी दल और पूरी संसद काम कर रही है.

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सीमेंट कारखानों के लिए भूमि अधिग्रहण : किसान आखिरी दम तक संघर्ष करें

देश में जब भी भूमि अधिग्रहण की बात होती है, तो सरकार का इशारा आम आदमी और किसान की तऱफ होता है. आज़ादी के बाद से दस करोड़ लोग भूमि अधिग्रहण की वजह से विस्थापित हुए हैं. अपनी माटी से अलग होने वालों में कोई पूंजीपति वर्ग नहीं होता. विकास की क़ीमत हमेशा आम आदमी को ही चुकानी पड़ी है. जिनके पास धन है, वे दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में अपने मनमाफिक मकान ख़रीद सकते हैं, लेकिन वह आम आदमी, जिसके पास अपनी जीविका और रहने के लिए ज़मीन का एक छोटा सा टुकड़ा है, उसे बेचकर आख़िर वह कहां जाएगा? ऐसे कई ज्वलंत सवालों पर पेश है चौथी दुनिया की यह ख़ास रिपोर्ट…

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यह पत्रकारिता का अपमान है

मीडिया को उन तर्कों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जिन तर्कों का इस्तेमाल अपराधी करते हैं. अगर तुमने बुरा किया तो मैं भी बुरा करूंगा. मैंने बुरा इसलिए किया, क्योंकि मैं इसकी तह में जाना चाहता था. यह पत्रकारिता नहीं है और अफसोस की बात यह है कि जितना ओछापन भारत की राजनीति में आ गया है, उतना ही ओछापन पत्रकारिता में आ गया है, लेकिन कुछ पेशे ऐसे हैं, जिनका ओछापन पूरे समाज को भुगतना पड़ता है. अगर न्यायाधीश ओछापन करें तो उससे देश की बुनियाद हिलती है.

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यूपीए सरकार का नया कारनामा : किसान कर्ज माफी घोटाला

आने वाले दिनों में यूपीए सरकार की फिर से किरकिरी होने वाली है. 52,000 करोड़ रुपये का नया घोटाला सामने आया है. इस घोटाले में ग़रीब किसानों के नाम पर पैसों की बंदरबांट हुई है. किसाऩों के ऋण मा़फ करने वाली स्कीम में गड़बड़ी पाई गई है. इस स्कीम का फायदा उन लोगों ने उठाया, जो पात्र नहीं थे. इस स्कीम से ग़रीब किसानों को फायदा नहीं मिला. आश्चर्य इस बात का है कि इस स्कीम का सबसे ज़्यादा फायदा उन राज्यों को हुआ, जहां कांग्रेस को 2009 के लोकसभा चुनाव में ज़्यादा सीटें मिली. इस स्कीम में सबसे ज़्यादा खर्च उन राज्यों में हुआ, जहां कांग्रेस या यूपीए की सरकार है.

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सेवानिवृत्‍त लेफ्टिनेंट कमांडर बेनीवाल : नियमों के जाल में उलझी पेंशन

तमाम सर्वे बताते हैं कि आज के युवा सेना में नौकरी करने की बजाय अन्य कोई पेशा अपनाना चाहते हैं. ऐसा नहीं है कि सेना की नौकरी के आकर्षण में कोई कमी आई हो या फिर वहां मिलने वाली सुविधाओं में कोई कटौती की गई हो, बावजूद इसके विभिन्न वजहों से सेना में नए अधिकारियों की कमी दिख रही है. उन्हीं वजहों में से एक है पेंशन का मामला. सेना में पेंशन विसंगतियों को लेकर संभवत: पहली बार कोई रिटायर्ड नौसेना अधिकारी सार्वजनिक रूप से सामने आया है. आखिर क्या है पूरी कहानी, पढ़िए चौथी दुनिया की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में….

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एक अफसर का खुलासाः ऐसे लूटा जाता है जनता का पैसा

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एवं शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने अपने पद से इस्ती़फा दे दिया है. हालांकि उनके इस्ती़फे के बाद राज्य में सियासी भूचाल पैदा हो गया है. अजीत पवार पर आरोप है कि जल संसाधन मंत्री के रूप में उन्होंने लगभग 38 सिंचाई परियोजनाओं को अवैध तरीक़े से म़ंजूरी दी और उसके बजट को मनमाने ढंग से बढ़ाया. इस बीच सीएजी ने महाराष्ट्र में सिंचाई घोटाले की जांच शुरू कर दी है.

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किसकी मिलीभगत से चल रहा है नकली नोट का खेल

आरबीआई के मुताबिक़, पिछले 6 सालों में ही क़रीब 76 करोड़ रुपये मूल्य के नक़ली नोट ज़ब्त किए गए हैं. ध्यान दीजिए, स़िर्फ ज़ब्त किए गए हैं. दूसरी ओर संसद की एक समिति की रिपोर्ट कहती है कि देश में क़रीब एक लाख 69 हज़ार करोड़ रुपये के नक़ली नोट बाज़ार में हैं. अब वास्तव में कितनी मात्रा में यह नक़ली नोट बाज़ार में इस्तेमाल किए जा रहे हैं, इसका कोई सही-सही आंकड़ा शायद ही किसी को पता हो.

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सीएजी, संसद और सरकार

आज़ादी के बाद से, सिवाय 1975 में लगाए गए आपातकाल के, भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाएं और संविधान कभी भी इतनी तनाव भरी स्थिति में नहीं रही हैं. श्रीमती इंदिरा गांधी ने संविधान के प्रावधान का इस्तेमाल वह सब काम करने के लिए किया, जो सा़फ तौर पर अनुचित था और अस्वीकार्य था. फिर भी वह इतनी सशक्त थीं कि आगे उन्होंने आने वाले सभी हालात का सामना किया. चुनाव की घोषणा की और फिर उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

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सीएजी के प्रति कांग्रेस का रवैया यह प्रजातंत्र पर हमला है

सीएजी (कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) यानी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट आई तो राजनीतिक हलक़ों में हंगामा मच गया. सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 2006-2009 के बीच कोयले के आवंटन में देश को 1.86 लाख करोड़ का घाटा हुआ. जैसे ही यह रिपोर्ट संसद में पेश की गई, कांग्रेस के मंत्री और नेता सीएजी के खिला़फ जहर उगलने लगे. पहली प्रतिक्रिया यह थी कि सीएजी ने अपने अधिकार क्षेत्र की सीमा का उल्लंघन किया.

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राजस्‍थान का नंदीग्राम नवलगढ़ : सीमेंट फैक्‍ट्री के लिए भूमि अधिग्रहण

बिन पानी सब सून. राजस्थान के अर्द्ध मरुस्थलीय इलाक़े शेखावाटी की हालत कुछ ऐसी ही है. यहां के किसानों को बोरवेल लगाने की अनुमति नहीं है. भू-जल स्तर में कमी का खतरा बताकर सरकार उन्हें ऐसा करने से रोकती है. दूसरी ओर राजस्थान सरकार ने अकेले झुंझुनू के नवलगढ़ में तीन सीमेंट फैक्ट्रियां लगाने की अनुमति दे दी है. इसमें बिड़ला की अल्ट्राटेक और बांगड़ ग्रुप की श्री सीमेंट कंपनी शामिल है.

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आम चुनाव 2014 की तैयारी

अमेरिका में राष्ट्रपति के लिए चुनाव अभियान उसी दिन से शुरू हो जाता है, जिस दिन नया राष्ट्रपति शपथ लेता है. भारत में राष्ट्रपति और लोकसभा के चुनाव के बीच दो साल का अंतराल है और अभी से प्रधानमंत्री पद के लिए अभियान शुरू हो गया है. राष्ट्रपति पद के किसी एक उम्मीदवार को समर्थन देने के मुद्दे पर एनडीए का राज़ी होना मुश्किल है. भाजपा 2014 के आम चुनाव की तैयारी में जुट गई है.

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ममता के बंगाल में मुसलमान

पश्चिम बंगाल के मुसलमानों की बात करनी ज़रूरी इसलिए है, क्योंकि देश में जम्मू-कश्मीर और असम के बाद मुसलमानों की तीसरी सबसे बड़ी आबादी पश्चिम बंगाल में रहती है. राज्य की लगभग साढ़े छह करोड़ की आबादी में मुसलमानों की संख्या दो करोड़ के आसपास है.

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टीम अन्‍ना ने दिया सबूत हर एक रक्षा सौदे के पीछे दलाल है

हथियारों के दलाल ऐसे लोग हैं, जो होते तो हैं, लेकिन दिखते नहीं. अभी कुछ समय पहले ही एक अंग्रेजी पत्रिका ने इसी विषय पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें हथियार दलालों के नाम तो नहीं बताए गए थे, लेकिन इशारों-इशारों में ही बहुत कुछ कहानी कहने की कोशिश की गई थी. इस रिपोर्ट से इतना तो साफ हो गया था कि भारतीय हथियार दलालों के न स़िर्फ हौसले बुलंद हैं, बल्कि उनके रिश्ते भी बहुत ऊपर तक है.

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हंस चुनेगा दाना-तिनका कौआ मोती खाएगा

अजीब इत्ते़फाक़ है. कामिनी जायसवाल ने इस पीआईएल को रजिस्ट्रार के पास जमा किया और अपने केबिन में लौट आईं, इतनी ही देर में यह पीआईएल मीडिया में लीक हो गई. उन्हें किसी ने बताया कि इसमें क्या है, यह मीडिया के लोगों को पता चल चुका है. जब इस पीआईएल की सुनवाई शुरु हुई तो जज ने पहला सवाल कामिनी जायसवाल से पूछा कि किसने लीक की.

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यूरोप को अपनी मानसिकता बदलनी चाहिए

यूरोप में मुस्लिमों के साथ भेदभाव किए जाने का मामला किसी न किसी स्तर पर उठता रहता है. इस बीच एमनेस्टी इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जो मुसलमान सार्वजनिक तौर पर अपने धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल करते हैं, उनके साथ यूरोप में भेदभाव किया जाता है.

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इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शनः अन्‍ना चर्चा समूह, सच बोलना अपराध नहीं है

सेवा में,

श्री वीरभद्र सिंह जी,

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री

1, जंतर मंतर रोड,

नई दिल्ली-110001

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दिमाग की खिड़कियां-दरवाजे खोलिए, वक्‍त बहुत कम है

शरीर के अंग जब कमज़ोर हो जाएं तो उन्हें बाहर से विटामिन की ज़रूरत होती है और कभी-कभी जब वे अंग बिल्कुल ही काम नहीं करते तो बहुत ही कड़े बाहरी तत्व की ज़रूरत होती है, जिसे हम लाइफ सेविंग ड्रग्स कहते हैं. अगर हार्ट सींक करने लगे तो कोरामीन देते हैं, बाईपास सर्जरी होती है.

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समाज को आईना दिखाती रिपोर्ट

हाल में यूनीसेफ द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत में 22 फीसदी लड़कियां कम उम्र में ही मां बन जाती हैं और 43 फीसदी पांच साल से कम उम्र के बच्चे कुपोषण का शिकार हैं. रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकतर बच्चे कमज़ोर और एनीमिया से ग्रसित हैं. इन क्षेत्रों के 48 प्रतिशत बच्चों का वज़न उनकी उम्र के अनुपात में बहुत कम है. यूनिसेफ द्वारा चिल्ड्रन इन अर्बन वर्ल्ड नाम से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरी ग़रीबों में यह आंकड़ा और भी चिंताजनक है, जहां गंभीर बीमारियों का स्तर गांव की तुलना में अधिक है.

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हिंदी पत्रकारिता अपनी जिम्मेदारी समझे

यह महीना हलचल का महीना रहा है. मुझसे बहुत सारे लोगों ने सवाल पूछे, बहुत सारे लोगों ने जानकारियां लीं. लेकिन जिस जानकारी भरे सवाल ने मुझे थो़डा परेशान किया, वह सवाल पत्रकारिता के एक विद्यार्थी ने किया. उसने मुझसे पूछा कि क्या अंग्रेजी और हिंदी पत्रकारिता अलग-अलग हैं. मैंने पहले उससे प्रश्न किया कि आप यह सवाल क्यों पूछ रहे हैं.

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भारतीय सेना को बदनाम करने की साजिश का पर्दाफाश

बीते चार अप्रैल को इंडियन एक्सप्रेस के फ्रंट पेज पर पूरे पन्ने की रिपोर्ट छपी, जिसमें देश को बताया गया कि 16 जनवरी को भारतीय सेना ने विद्रोह करने की तैयारी कर ली थी. इस रिपोर्ट से लगा कि भारतीय सेना देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को समाप्त कर फौजी तानाशाही लाना चाहती है. इस रिपोर्ट ने सारे देश में न केवल हलचल पैदा की, बल्कि सेना को लेकर शंका का वातावरण भी पैदा कर दिया. सभी चैनलों पर यह खबर चलने लगी, लेकिन तीन घंटे बीतते-बीतते सा़फ हो गया कि यह रिपोर्ट झूठी है, बकवास है, किसी खास नापाक इरादे से छापी गई है और इसे छपवाने के पीछे एक बड़ा गैंग है, जो हिंदुस्तान में लोकतंत्र को पसंद नहीं करता.

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चौथी दुनिया की रिपोर्ट सच साबित हुई : कोयला घोटाले का सच

चौथी दुनिया ने अप्रैल 2011 में कोयला घोटाले का पर्दा़फाश किया था. उस व़क्त न सीएजी रिपोर्ट आई थी, न किसी ने यह सोचा था कि इतना बड़ा घोटाला भी हो सकता है. उस व़क्त इस घोटाले पर किसी ने विश्वास नहीं किया. जिन्हें विश्वास भी हुआ तो आधा अधूरा हुआ. चौथी दुनिया ने आपसे अप्रैल 2011 में जो बातें कहीं, उस पर वह आज भी अडिग है.

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अब बच्चों के स्वास्थ्य के बारे में : सरकार भ्रम फैला रही है

साल 2012 में हमें यह सोचकर खुश होना चाहिए कि समाज के कर्णधार यानी हमारी नौजवान पी़ढी अब ज़्यादा स्वस्थ हो रही है. देश के सर्वोच्च स्वास्थ्य संस्थान एम्स द्वारा 19 ब़डे शहरों में किए गए सर्वे के अनुसार, साल 1992 के मुक़ाबले 2012 के युवा ज़्यादा लंबे और वज़न में भारी हो रहे हैं. इसी तथ्य पर सरकार यह मानती है कि पोषण में पौष्टिकता ब़ढने की वजह से बच्चे अब स्वस्थ हो रहे हैं.

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देश का विश्वास टूटने मत दीजिए

वर्ष 2009 में एक बड़ी घटना हुई. चौथी दुनिया ने रंगनाथ मिश्र कमीशन की रिपोर्ट छाप दी और सरकार से कहा कि अगर यह रिपोर्ट झूठी है तो वह कहे कि यह रिपोर्ट झूठी है. उस रिपोर्ट को लेकर राज्यसभा में चार-पांच दिनों तक का़फी हंगामा होता रहा. राज्यसभा के सांसदों ने हमारे ख़िला़फ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव रखा और हमने उस विशेषाधिकार हनन के नोटिस का जवाब भी दिया.

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