सरकार ग़रीबों को तमाचा मारना बंद करे

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद कई बच्चों की मौत हो गई है, यूपीए-1 की तुलना में यूपीए-2 के कार्यकाल में रेल दुर्घटनाएं बढ़ गई हैं, पर इस तऱफ तृणमूल कांगे्रस के रेल मंत्री का ध्यान नहीं है, लेकिन शरद पवार को लगा एक थप्पड़ सबका ध्यान आकर्षित कर रहा है.

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झारखंड: रेल परियोजनाओं की कछुआ चाल

खनिज संसाधनों के मामले में देश के सबसे धनी सूबे झारखंड में शायद ही ऐसी कोई योजना है, जो समय पर पूरी हुई हो. एक वर्ष के भीतर पूरी हो जाने वाली योजनाएं 3 से लेकर 5 साल तक खिंच जाती हैं. योजना के लिए प्राक्कलित राशि भी दोगुनी से तीन गुनी हो जाती है. राजनीतिक अस्थिरता, सुस्त एवं भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारी, असामाजिक तत्वों का हस्तक्षेप और शासन में इच्छाशक्ति का अभाव जैसे कारण इस समस्या के मूल में हैं.

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विकास दर धीरे-धीरे गिरने लगी है

वेन जियाबाओ पिछले दिनों लंदन गएऔर वहां उन्होंने ब्रिटिश प्रधानमंत्री को इस बात के लिए फटकारा कि उन्हें अपने अतिथि के सामने मानवाधिकार पर भाषण नहीं देना चाहिए, लेकिन तब ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के पास जियाबाओ की बात सुनने के अलावा कोई विशेष चारा नहीं था, क्योंकि वह चीन से व्यापार और निवेश को इच्छुक थे.

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दिल्‍ली का बाबूः तीव्र सुधार

दीदी के कोलकाता जाने के बाद से रेल मंत्रालय का कार्यभार पीएमओ संभाल रहा है, कम से कम मंत्रिमंडल में नए बदलाव होने तक. इससे मनमोहन सिंह को उन सुधारों को लागू करने का अवसर मिल गया है, जिन्हें दीदी ने रोक रखा था. अभी हाल में मनमोहन सिंह ने रेलवे के उच्चाधिकारियों के साथ एक बैठक की.

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जज्बे को सलाम

राजधानी दिल्ली के नज़दीक ग्रामीणों ने ख़ुद पैसे एकत्र करके एक रेलवे स्टेशन बनाया है. सीमावर्ती गुड़गांव इलाक़े के गांव ताजनगर और आसपास के लोगों ने दो प्लेटफ़ॉर्म के निर्माण के लिए 20,80,786 रुपये का चंदा इकट्ठा किया. पूरा काम ख़त्म होने में सात महीने लगे.

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समस्तीपुर रेलवे कारखाना बंदी की कगार पर

वर्ष 1881 में ब्रिटिश सरकार द्वारा स्थापित समस्तीपुर रेलवे कारखाना सरकारी उदासीनता के चलते बंदी की कगार पर पहुंच गया है. यह उत्तर बिहार का इकलौता रेलवे कारखाना है. यहां 1907 में हुई हड़ताल ट्रेड यूनियन आंदोलन की अमूल्य धरोहर है. इस कारखाने के अधिकांश कार्य गोरखपुर और इज्जत नगर स्थित कारखानों को सौंप दिए गए हैं.

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गोधरा फ़ैसला: छलनी से ज्यादा छेद

बीती 22 फ़रवरी को सत्र न्यायालय ने गोधरा रेल आगज़नी मामले में अपना फैसला सुनाया. अदालत ने गुजरात सरकार के इस आरोप को सही ठहराया कि स्थानीय मुसलमानों ने साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में आग लगाने का षड्‌यंत्र रचा था. जिन 94 आरोपियों पर मुक़दमा चल रहा था, उनमें से 63 को बरी कर दिया गया और 31 को साज़िश के तहत कारसेवकों को ज़िंदा जलाने का दोषी ठहराया गया

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कहीं सपना ही न रह जाए

पूर्वोतर रेलवे के गोरखपुर नरकटियागंज खंड स्थित पनियहवा-छितौनी-तमकुही रोड बड़ी रेल लाइन राजनीतिक दांव-पेंच का शिकार होकर रह गई है. तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद ने 20 फरवरी 2007 को इसका शिलान्यास किया था.

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रांची-कोडरमा रेल परियोजनाः भूमिगत आग और भू-धसान के खतरे से बेखबर सरकार

झारखंड की सबसे बड़ी रेल परियोजना पर भूमिगत आग और भू-धसान का गंभीर खतरा मंडरा रहा है, लेकिन रेल मंत्रालय एवं झारखंड सरकार के कानों पर जू नहीं रेंग रही. आज़ादी के बाद से ही झारखंड के सबसे पुराने ज़िले हज़ारीबाग को रेल लाइन से जोड़ने की ज़ोरदार मांग उठती रही है, क्योंकि हज़ारीबाग देश का अकेला प्रमंडलीय मुख्यालय है, जो रेल लाइन से अभी तक जुड़ा नहीं है.

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बिना इंजन के दानापुर रेलमंडल

दानापुर रेलमंडल हीरक जयंती मनाने की ओर अग्रसर हो रहा है, लेकिन आज भी इस मंडल के पास एक भी अपना इंजन नहीं है. नतीजा यह है कि मंडल के अधीन चलने वाली मेल एक्सप्रेस और सवारी गाड़ियों के साथ-साथ मालगाड़ियों का परिचालन दूसरे मंडल के इंजन की सहायता से किया जा रहा है.

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सरकारी घोषणाएं कहां और क्यों गुम हो जाती हैं?

आमतौर पर एक सरकार जनता की सुविधाओं के लिए कोई योजना बनाती है या उसकी घोषणा करती है और बाद की कोई सरकार आकर उस योजना को ठंडे बस्ते में डाल देती है. इसके अलावा कई मौक़ों पर (ख़ासकर किसी आपदा के व़क्त) सरकार की तऱफ से मदद की घोषणा की जाती है, लेकिन व़क्त बीतने के साथ ही वह अपना वायदा भूल जाती है.

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सार–संक्षेप: तीस करोड़ रुपयों का चावल गोदामों में ख़राब हो रहा है

मध्य प्रदेश में सरकारी गोदामों में लगभग 20 हज़ार टन चावल पिछले डेढ़ वर्ष से पड़ा है. उचित रखरखाव के अभाव में इस चावल की गुणवत्ता दिनों-दिन ख़राब हो रही है. इस चावल का मूल्य लगभग 30 करोड़ बताया जाता है. यह चावल दिसंबर 2008 से जून 2009 के बीच समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान से तैयार किया गया था. उस समय ज़्यादा खरीदी होने के कारण चावल का़फी मात्रा में एकत्रित किया गया.

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सतना पुलिस चौकी को अस्तित्व की तलाश

सतना स्टेशन स्थित जीआरपी पुलिस की चौकी अंग्रेज़ों के राज्य में 160 साल पहले स्थापित की गई थी. मुंबई-हावड़ा प्रमुख रेल मार्ग से गुज़रने वाली सभी ट्रेनें इस चौकी से होकर ही गुज़रती थी. चौकी की स्थापना के समय सतना रेलवे स्टेशन से काशी एक्सप्रेस, मुंबई हाबड़ा मेल, इटारसी इलाहाबाद पेसेंजर और बाम्बे जनता मेल ही गुज़रता था.

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भाजपा और कांग्रेस में रेलवे ट्रैक पर श्रेय की दौड़

ग्‍वालियर से श्योपुर तक चलने वाली छोटी लाईन रेल को बड़ी लाईन में किसने परिवर्तित करवाया, इसका श्रेय लेने के लिए इन दिनों कांग्र्रेस और भाजपा के मध्य संघर्ष चल रहा है. भाजपा के नेता इसे अपनी मांग की पूर्ति बताकर विजयी मुद्रा में खड़े हैं, तो वहीं क्षेत्र के प्रभावशाली केंद्रीय मंत्री सिंधिया भी अन्य केंद्रीय मंत्रियों से अपनी वाहवाही का गान करवा रहे है.

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ऑपरेशन ग्रीन हंट सफलता पर सवालिया निशान

काफी जद्दोजहद के बाद झारखंड में ऑपरेशन ग्रीन हंट शुरू हुआ. केंद्र सरकार के दिशानिर्देश पर सूबे में उग्रवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने और नक्सलियों पर नकेल कसने के उद्देश्य से यह अभियान जारी है.

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मुख्‍यमंत्री की कुर्सी अभी दूर है

रेलवे परियोजनाओं के उद्घाटन की हड़बड़ी के कारण एक रोचक वाकया हो गया. 20 मार्च को महाराजा एक्सप्रेस के उद्घाटन समारोह के लिए अख़बारों को जो विज्ञापन जारी किया गया, उसके ऩक्शे में दिल्ली को पाकिस्तान और कोलकाता को बंगाल की खाड़ी में दिखाया गया.

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ममता दीदी, जरा नज़र इधर भी डालें

देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहलाने वाली भारतीय रेल में कल्याणकारी योजना के तहत कई अर्द्धसरकारी संस्थाएं चलाई जाती है जिनमें रेलवे मनोरंजन संस्थान, कैंटीन, को-ऑपरेटिव, सिलाई सेंटर, आर्युवेदिक एवं होम्योपैथिक स्वास्थ्य केंद्र आदि हैं. इन संस्थानों में हज़ारों श्रमिक कार्यरत हैं लेकिन विडंबना है कि रेलवे के इन उपक्रमों में कार्यरत श्रमिकों को जो मासिक वेतन दिया जा रहा है उसमें श्रम अधिनियम एवं रेलवे बोर्ड के नियमों की खुल्लम-खुल्ला अवहेलना की जा रही है.

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दिल्‍ली का बाबू : हरित ऊर्जा को अपनाएं

हालांकि सरकार हरित ऊर्जा के प्रयोग को बढ़ावा देने की पूरी कोशिश कर रही है, लेकिन पर्यावरण के अनुकूल प्रौद्योगिकी और ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देने में मुश्किलें आ रही हैं. हालांकि न्यू एंड रीन्यूवल एनर्जी विभाग के मंत्री ने विभिन्न मंत्रालयों को इस मुद्दे पर पत्र लिखा है, जिनमें रक्षा, रेल और पर्यटन मंत्रालय शामिल हैं.

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नैनो नहीं तो रेल ही सही

सिंगुर एक बार फिर सुर्खियों में है. बंगाल की सबसे बड़ी घटना से झुलसे सिंगुर के दिन फिरने वाले हैं. पिछले लोकसभा चुनावों में टाटा की नैनो फैक्ट्री के गुजरात चले जाने से वाममोर्चा को जिस राजनीतिक लाभ की उम्मीद थी, वह तो बदलाव की आंधी में उड़ गया. वाममोर्चा ने ममता की उद्योग विरोधी छवि बनाकर खासकर शहरी मतदाताओं को लुभाने की पुरज़ोर कोशिश की, पर उसे हार का ऐसा सदमा पहुंचा कि ज़मीन विवाद वाली ज़्यादातर परियोजनाओं को राज्य सरकार ने रद्द कर दिया या फिर ठंडे बस्ते में डाल दिया है.

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