लालू के बेटों पर किसकी कृपा, लाखों के लोन बिना चुकाए हुए माफ?

नई दिल्ली। 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बेनामी संपत्ति मामले में फंसे राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू यादव के

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बहुचर्चित चारा घोटाला मामले में CBI कोर्ट में पेश हुए लालू यादव

नई दिल्ली : राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें आजकर बढीं हुई हैं. भागलपुर में हुए 47लाख के चारा

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अरविंद केजरीवाल का साथ देने के लिए एक बार आगे आए लालू यादव

नई दिल्ली (ब्यूरो, चौथी दुनिया)। अपने पुराने साथियों से दूर हो रहे अरविंद केजरीवाल को अब नए लोगों का साथ

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जिस गठबंधन को बिहार में नकारा उसे यूपी में स्वीकारा : टूटी डाल पर बैताल

उत्तर प्रदेश में गठबंधन का पूरा चक‘ घूम गया. अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और लखनऊ

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यह राजनीति जनता का विश्वांस समाप्त करेगी

देश की राजनीति का भविष्यदर्शन लगभग हर प्रदेश में हो रहा है. गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार में हो रहा

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बिहार विधानसभा उपचुनाव : महा-गठबंधन का भविष्य

बिहार में भारतीय जनता पार्टी को रोकने के लिए लालू यादव, नीतीश कुमार और कांग्रेस का एकजुट होना भारतीय राजनीति

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राह से भटकी अकादमियां

बिहार भोजपुरी अकादमी ने मशहूर लोकगायिका मालिनी अवस्थी को अंतराष्ट्रीय सांस्कृतिक राजदूत बनाने का ऐलान किया तो भोजपुरी भाषा और

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लालू अगर जेल गए, तो कौन संभालेगा राजद की कमान राबड़ी,: रघुवंश या सिद्दीकी?

पशुपालन घोटाले की आंच आने वाले दिनों में लालू यादव को परेशान कर सकती है. ऐसे में, सबसे बड़ा सवाल

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जब तोप मुकाबिल हो : प्रार्थना कीजिए, सब कुछ अच्छा हो

कांग्रेस सबसे अच्छी स्थिति में है. भारतीय जनता पार्टी की अंतर्कलह ने उसे नया जीवनदान दे दिया है. महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी एवं

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चुनावी सर्वे के खेल में : मोदी और राहुल साथ-साथ है

देश में होने वाले चुनावी सर्वे न स़िर्फ भ्रामक हैं, बल्कि उन्हें राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा

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बिहार में अधिकारियों का राज

बिहार में अधिकारियों की तानाशाही है और वहां के अधिकारी निरंकुश हो गए हैं.राज्य में भ्रष्टाचार चरम पर है. भ्रष्टाचार

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राजनीति के नए सिद्धांत

भारत की राजनीति में नए सैद्धांतिक दर्शन हो रहे हैं. पता नहीं ये सैद्धांतिक दर्शन भविष्य में क्या गुल खिलाएंगे, पर इतना लगता है कि धुर राजनीतिक विरोधी भी एक साथ खड़े होने का रास्ता निकाल सकते हैं. लेकिन लोकसभा या राज्यसभा में क्या अब ऐसी ही बहसें होंगी, जैसी इस सत्र में देखने को मिली हैं. मानना चाहिए कि ऐसा ही होगा. ऐसा मानने का आधार है. दरअसल, अब इस बात की चिंता नहीं है कि हिंदुस्तान में आम जनता का हित भी महत्वपूर्ण है.

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अन्ना और रामदेव की वजह से आशाएं जगी हैं

अन्ना हजारे और बाबा रामदेव जैसे लोगों को सावधान हो जाना चाहिए. इतने दिनों के बाद भी उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा है कि कौन-सा सवाल उठाना चाहिए और कौन-सा नहीं. एक वक़्त आता है, जिसे अंग्रेजी में सेचुरेशन प्वाइंट कहते हैं. शायद जो नहीं होना चाहिए, वह हो रहा है, यानी लोकतंत्र सेचुरेशन प्वाइंट की तऱफ ब़ढ रहा है.

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बिहार में नई सियासी नौटंकी

सियासत में शह-मात का खेल कैसे होता है, पल भर में सियासी समीकरण कैसे बदल जाते हैं. अगर आप यह जानना चाहते हैं तो बिहार की सियासी फिज़ा में फैले शगू़फों पर ग़ौर फरमाने की ज़रूरत है, जहां यारों के बीच ही यानी जद-यू और भाजपा के दरम्यान चेक-मेट का खेल अपने शबाब पर है. कुछ इस तरह से गोटियां बिछाई जा रही हैं कि लगता है कि जैसे उत्तर प्रदेश चुनाव के बाद सियासी जंग की सरज़मीन अब बिहार ही बनने वाला है.

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‘सांस्‍कृतिक क्रांति’ पर बवाल

चौथी दुनिया के अपने इसी स्तंभ में कुछ दिनों पहले मैंने बिहार सरकार के कला और संस्कृति मंत्रालय की कॉफी टेबल बुक-बिहार विहार के बहाने सूबे में सांस्कृतिक संगठनों की सक्रियता, उसमें आ रहे बदलाव और सरकारी स्तर पर उसके प्रयासों की चर्चा की थी.

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अपने हुए पराए

बिहार के जनादेश ने लालू यादव को लेकर कुछ बातों को बिल्कुल सा़फ कर दिया. पहला यह कि समर्थक उनसे दूर हो चुके हैं, बावजूद इसके उन्हें यकीन नहीं हो रहा है कि उनके पैरों के नीचे की जमीन सरक चुकी है. जिस माय यानी मुस्लिम-यादव समीकरण को लेकर उन्होंने 15 सालों तक बिहार पर राज किया, वह समीकरण पूरी तरह दरक चुका है.

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चौथी दुनिया का सर्वेः नीतीश बस थोड़ा आगे

बिहार का चुनाव हमेशा से जटिल रहा है. विजेता कौन होगा, यह रिजल्ट आने के बाद ही पता चल पाता है. चौथी दुनिया के सर्वे के मुताबिक़, जनता दल यूनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन की सीटें घटेंगी, लेकिन वह बहुमत साबित करने में कामयाब हो जाएगा. राष्ट्रीय जनता दल और लोक जनशक्ति पार्टी के गठबंधन की सीटें पिछले चुनाव से ज़्यादा होंगी, लेकिन सबसे बड़ा फायदा कांग्रेस को होने वाला है.

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बिहार चुनावः नीतीश, लालू और राहुल की अग्निपरीक्षा

बिहार के चुनाव पर पूरे देश की नज़र है. क्या नीतीश कुमार फिर से मुख्यमंत्री बन जाएंगे, क्या लालू यादव अपनी खोई हुई लोकप्रियता वापस पाने में कामयाब हो जाएंगे, क्या रामविलास पासवान के पास सरकार बनाने की चाबी आ जाएगी, क्या मुसलमान इस बार भाजपा-जदयू गठबंधन के साथ चले जाएंगे, क्या बिहार के चुनाव में लोग विकास के मुद्दे पर वोट देंगे या फिर जातिवाद का बोलबाला रहेगा, क्या भारतीय जनता पार्टी बिहार में हिंदुत्व के एजेंडे को छोड़ देगी आदि जैसे कई सवाल हैं, जिन पर बिहार ही नहीं, पूरे देश की जनता विचार कर रही है.

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यह लालू, नीतीश और राहुल की अग्निपरीक्षा है

बिहार चुनाव राजनीति की महत्वपूर्ण प्रयोगशाला बन गया है. अगर इसे पुराने बिहार के पैमाने पर देखें तो और मज़ा आएगा. पहले झारखंड के संकेत देखिए. अर्जुन मुंडा ने आडवाणी जी की अनदेखी की. आडवाणी सहित मुरली मनोहर जोशी और सुषमा स्वराज सरकार बनाना नहीं, चुनाव चाहते थे.

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एशिया की सबसे बड़ी बनमनखी चीनी मिलः नीतीश वादा करके भूल गए

पूरे देश में महंगाई को लेकर जनता त्राहिमाम कर रही है. आम जनता को चीनी तक ख़रीदने के लिए अपनी जेब टटोलनी पड़ती है. कुछ महीने पहले देश के कृषि मंत्री शरद पवार ने चीनी की बढ़ती क़ीमतों पर कहा था कि वह कोई ज्योतिषी नहीं हैं, जो यह बताएंगे कि चीनी के दाम कब तक घटेंगे.

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सिल्‍क नगरी का सच

चंपानगर (भागलपुर) निवासी मोहम्मद जावेद अंसारी एक बुनकर है. उसके पास ख़ुद का पावरलूम तो है, लेकिन इतना पैसा नहीं कि वह उसे चला सके. इसके अलावा बिजली की समस्या अलग से. नतीजतन, उसके घर की स्थिति दिनोंदिन दयनीय होती जा रही है.

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बारिश से बेहाल नेता

चुनावी मानसून पता नहीं किस नेता के लिए कामयाबी की फुहारें लाए और किस नेता को वृष्टि छाया क्षेत्र में सूखा छोड़ दे, यह तो समय बताएगा, लेकिन प्राकृतिक बारिश की ठंडी फुहारों के बावजूद कुछ नेताओं के माथे से पसीने का गिरना थम ही नहीं रहा. बारिश से प्रदेश की जनता तो राहत महसूस कर रही है पर नेता आहत.

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राजनीति की काली दुनिया

नेताओं की ग़लतफहमियों ने देश के राजनीतिक पतन का एक नया अध्याय लिख दिया. भारतीय जनता पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल एवं बहुजन समाज पार्टी ने ऐसा घिनौना खेल खेला, जिससे जनता का सिर शर्म से झुक गया. राजनीति का यह शर्मनाक खेल किसी ग़लती की वजह से नहीं, बल्कि नेताओं की ग़लतफहमी की वजह से खेला गया.

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