बांग्लादेश की विवादास्पद और निर्वासन का दंश झेल रही लेखिका तसलीमा नसरीन ने एक बार फिर से नए विवाद को जन्म दे दे दिया है. तसलीमा ने बंग्ला के मूर्धन्य लेखक और साहित्य अकादमी के अध्यक्ष सुनील गंगोपाध्याय पर यौन शोषण का बेहद संगीन इल्ज़ाम जड़ा है. तसलीमा ने सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर लिखा- सुनील गंगोपाध्याय किताबों पर पाबंदी के पक्षधर रहे हैं.
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दुनिया की तक़रीबन आधी आबादी महिलाओं की है. इस लिहाज़ से महिलाओं को तमाम क्षेत्रों में बराबरी का हक़ मिलना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है. कमोबेश दुनिया भर में महिलाओं को आज भी दोयम दर्जे पर रखा जाता है. अमूमन सभी समुदायों में महिलाओं को पुरुषों से कमतर मानने की प्रवृत्ति है, ख़ासकर मुस्लिम समाज में तो महिलाओं की हालत बेहद बदतर है.
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अमृता प्रीतम ने ज़िंदगी के विभिन्न रंगों को अपने शब्दों में पिरोकर रचनाओं के रूप में दुनिया के सामने रखा. पंजाब के गुजरांवाला में 31 अगस्त, 1919 में जन्मी अमृता प्रीतम पंजाबी की लोकप्रिय लेखिका थीं. उन्हें पंजाबी भाषा की पहली कवयित्री माना जाता है. उन्होंने क़रीब एक सौ किताबें लिखीं, जिनमें उनकी आत्मकथा रसीदी टिकट भी शामिल है.
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हर साल 31 जुलाई हिंदी साहित्य के लिए एक बेहद ख़ास दिन होता है. इस दिन हिंदी के महान उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद का जन्मदिन होता है, लेकिन हिंदी पट्टी में अपने इस गौरव को लेकर कोई उत्साह देखने को मिलता हो, यह ज्ञात नहीं है. प्रेमचंद के गांव लमही में कुछ सरकारी किस्म के कार्यक्रम हो जाते हैं, जिनमें मंत्री वग़ैरह भाषण देकर रस्म अदायगी कर लेते हैं.
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विश्व राजनीति के पटल पर क्लियोपेट्रा एक ऐसा नाम है, जिसने अपनी खूबसूरती और अपने शरीर का इस्तेमाल अपने करियर को बढ़ाने में बेहतरीन तरीक़े से किया. उसने सेक्स पॉवर को पहचानते हुए खुलकर उसका उपयोग किया और उसे अपनी सफलता की सीढ़ी बनाकर बुलंदी पर जा पहुंची. उसने सत्ता और शक्ति हासिल करने के लिए अपने भाई से ही विवाह किया और मिस्र की सत्ता हासिल की, लेकिन भाई से मनमुटाव के चलते उसे देश छोड़कर निर्वासित होना पड़ा.
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नवोदित उपन्यासकार महुआ माजी का मानना है कि साहित्यकार समाज सुधारक नहीं होता. वह सिर्फ लिखता है, ताकि लोग उस विषय पर मंथन करें कि क्या सही है और क्या ग़लत. अपने उपन्यास मैं बोरिशाइल्ला के लिए वर्ष 2007 में अंतरराष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान पाने वाली महुआ माजी रांची की रहने वाली हैं.
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क्रिकेट के विश्वकप के शोरगुल में एक अहम घटना दबकर रह गई. यह एक ऐसी घटना है, जो सरकार पोषित संस्था के कार्यकलापों पर सवालिया निशान खड़ा करती है. मैं बात कर रहा हूं ललित कला अकादमी की, जिसके अध्यक्ष हिंदी के वरिष्ठ कवि, आलोचक एवं कला प्रेमी अशोक वाजपेयी हैं. सवाल इसलिए खड़े हो रहे हैं, क्योंकि एक मशहूर चित्रकार डॉक्टर प्रणब प्रकाश ने अकादमी पर मनमानी का आरोप लगाया है.
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चंडीगढ़ में एक सेमिनार में हुर्रियत के नेता मीरवाइज उमर फारुख के साथ धक्कामुक्की की गई और उन्हें भाषण देने से रोकने की कोशिश की गई. हंगामा करने वालों का आरोप था कि वह एक भारत विरोधी सेमिनार में हिस्सा लेने आए थे और भारत विरोधी बातें कह रहे थे. इस मानसिकता के पीछे के कारणों को जानने की ज़रूरत है. लंबे समय से शहर दर शहर घूम-घूमकर भारत विरोधी सेमिनार किए जा रहे हैं. इन सेमिनारों में एक किताब लिखकर अंतरराष्ट्रीय ख्याति हासिल कर लेने वाली लेखिका अरुंधति राय, जिन्हें वन बुक वंडर कह सकते हैं, प्रमुखता से शामिल हो रही हैं.
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नया ज्ञानोदय के अगस्त 2010 अंक में छपे मेरे इंटरव्यू पर हुई प्रतिक्रियाओं से एक बात स्पष्ट हो गई कि मैंने अपनी लापरवाही से एक गंभीर विमर्श का हेतु बन सकने का मौक़ा गंवा दिया. मैंने कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग किया, जिनसे बचा जा सकता था.
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जनता एक ज़िम्मेदार संसद का निर्माण करे |
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