भारत लोकतंत्र का आदर्श बन सकता है?

idleफॉरेन अफेयर्स जर्नल के मई-जून अंक में प्रकाशित अपने लेख द एंड ऑफ़ द डेमोक्रेटिक सेंचुरी में यशा मोंक और

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लोकतंत्र में सरकार मतवाला हाथी नहीं हो सकती

सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों ने पहली बार मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा और प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर उसे सार्वजनिक

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अमित शाह जी, अग्निपरीक्षा की जगह साधारण जांच ही करा लीजिए

भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष के साथ बहुत शिक्षाप्रद घटना घटी और यह बहुत बड़ी सीख देती है. सीख ये

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भारत : एक बाज़ार या एक राष्ट्र?

पिछली सरकार ने कॉरपोरेट को बाज़ार आधारित अर्थव्यवस्था में कार्य करने की अनुमति दे दी और सोचा कि ग़रीबों की

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लोग मरते रहे और महामहिम व्यस्त हैं

यह कहानी है लोक बनाम तंत्र के बीच जिद की. लोक की जिद है कि वह तंत्र से मिलकर ही

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कांग्रेस का नेता प्रतिपक्ष पद पर नैतिक?अधिकार नहीं

देश में 16वीं लोकसभा अस्तित्व में आ चुकी है. इसके साथ ही एक बड़ी समस्या सामने आई है कि आख़िर विपक्ष

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अल्पसंख्यकों का विश्‍वास जीतने की कोशिश

नीतीश कुमार के इस्ती़फे के बाद जीतनराम मांझी ने प्रदेश की कमान संभाली. बतौर मुख्यमंत्री उनके समक्ष क्या चुनौतियां हैं.

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कमज़ोर विपक्ष कितना कारगर

राजनीतिक लोकतंत्र का इतिहास जितना पुराना है, उतना ही पुराना है सरकार और विपक्ष के बीच का अंतर. भारत की

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भारतीय मुसलमान और 2014 का आम चुनाव

भारत की 16वीं लोकसभा का चुनाव कथित भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है. गत दस वर्षों की

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स़िर्फ हंगामा खड़ा करना जिनका मकसद था

2010 में 2जी मामले पर जेपीसी के गठन के लिए विपक्ष ने क़रीब-क़रीब पूरे शीतकालीन सत्र के दौरान काम नहीं

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लोक के लिए या लोभ के लिए

चौदहवीं लोकसभा के बाद जब देश में पंद्रहवीं लोकसभा का गठन हो रहा था और नई सरकार बनी, तब ऐसा

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राजनीति नहीं, लोकनीति चाहिए

व्यवहार में यह होगा कि हर गांव एवं टोला संगठित होगा और उसमें रहने वाले बालिग स्त्री-पुरुषों को मिलाकर ग्रामसभा

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अमन की ओर बढ़ते क़दम

म्यांमार में दशकों से अल्पसंख्यकों के साथ वहशियाना व्यवहार होता रहा है. वर्तमान सरकार ने वहां के अल्पसंख्यकों की स्वतंत्रता

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कमज़ोर हो रहा है लोकतंत्र

लोकसभा और राज्य विधान-मंडलों की शक्ति बराबर क्षीण होती जा रही हैं. 1980 से लोकसभा के काम करने के दिन

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अभिव्यक्ति पर हमला : बोलने की आज़ादी पर बढ़ते ख़तरे

एशियाई देशों में कट्टरपंथी संगठनों द्बारा लेखकों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं पर हमले ब़ढ रहे हैं. अफगानिस्तान में भारतीय लेखिका सुष्मिता

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आज़ादी के लिए ख़तरे

आज हिंदुस्तान में गरीबी रेखा के नीचे करीब-करीब उतने ही लोग हैं, जितनी आजादी के समय देश की कुल आबादी

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जब तोप मुक़ाबिल हो : महाभारत के संकेत नजर आ रहे हैं

संसदीय लोकतंत्र को प्रदूषित करना और उसका इस्लेमाल करना, जहां कांग्रेस की कुशलता है, वहीं संसद में बैठे राजनीतिक दलों

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विदेशी भगाओ-स्वदेशी अपनाओ की नीति पर अमल हो

हो सकता है कि सरकार क़ानूनों के तहत जबर्दस्ती अनाज ले जाए, लेकिन क्या 55 साल पूर्व बारडोली में ब्रिटिश सरकार

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संविधान में राजनीतिक दल का जिक्र नहीं है : जीवन की सामाजिक-आर्थिक असमानताएं ख़त्म करना ज़रूरी

भारत 26 जनवरी, 1950 को एक प्रजातांत्रिक देश बन गया, लेकिन उससे पूर्व कई आशंकाएं संविधान निर्माताओं को चिंतित कर

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संविधान में राजनीतिक दल का जिक्र नहीं है : राजनीतिक दलों की राय का औचित्य

भाग-3 मैं संविधान पर किसी भी आलोचना को चुनौती देता हूं कि दुनिया की कोई भी संविधान सभा इस बात

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भूटान में संसदीय चुनाव : भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण

भूटान में चल रहे संसदीय चुनाव निकटतम प़डोसी भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण इसलिए है, क्योंकि दोनों देशों में अनेक

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सरकारी अस्पताल में अगर दवाई न मिले…

इस अंक में सरकारी दवाओं के बारे में चर्चा की गई है. आम लोगों की सरकारी अस्पताल के मामले में

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पाकिस्तान में नवाज शरीफ का राज: बहेगी अमन की बयार !

पाकिस्तान में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब कोई व्यक्ति, यानी नवाज शरीफ तीसरी बार प्रधानमंत्री बन रहे हों.

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संविधान और जनता को धोखा

भारत का संविधान 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ. लेकिन आश्‍चर्य की बात तो यह है कि बिना जनता को

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यूपीए सरकार का उपहार – घूस घोटाला भ्रष्टाचार

केंद्र की सत्ता में यूपीए सरकार पिछले दस सालों से आसीन है. आम तौर पर किसी सरकार के कार्यकाल का

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हमारा लोकतंत्र भ्रष्टाचार बनाए रखने का हथियार है

काम तो सचमुच कमाल के हो रहे हैं. सीबीआई सुप्रीम कोर्ट को स्टेटस रिपोर्ट सौंपती है, जिसका रिश्ता 26 लाख

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गांवों की पुरातन व्यवस्था

गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका से लौटकर भारत का वर्ष भर दौरा किया. भारत के ग्रामीणों की दुर्दशा देखी. उनके

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राजनीतिक दलों का रवैया गुस्सा दिलाता है

महाभारत शायद आज की सबसे बड़ी वास्तविकता है. इस महाभारत की तैयारी अलग-अलग स्थलों पर अलग तरह से होती है और लड़ाई भी अलग से लड़ी जाती है, लेकिन 2013 और 2014 का महाभारत कैसे लड़ा जाएगा, इसका अंदाज़ा कुछ-कुछ लगाया जा सकता है, क्योंकि सत्ता में जो बैठे हुए लोग हैं या जो सत्ता के आसपास के लोग हैं, वे धीरे-धीरे इस बात के संकेत दे रहे हैं कि वे किन हथियारों से लड़ना चाहते हैं.

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लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ मत कीजिए

सरकार का संकट उसकी अपनी कार्यप्रणाली का नतीजा है. सरकार काम कर रही है, लेकिन पार्टी काम नहीं कर रही है और हक़ीक़त यह है कि कांग्रेस पार्टी की कोई सोच भी नहीं है, वह सरकार का एजेंडा मानने के लिए मजबूर है. सरकार को लगता है कि उसे वे सारे काम अब आनन-फानन में कर लेने चाहिए, जिनका वायदा वह अमेरिकन फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशंस या अमेरिकी नीति निर्धारकों से कर चुकी है.

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संसद ने सर्वोच्च होने का अधिकार खो दिया है

भारत की संसद की परिकल्पना लोकतंत्र की समस्याओं और लोकतंत्र की चुनौतियों के साथ लोकतंत्र को और ज़्यादा असरदार बनाने के लिए की गई थी. दूसरे शब्दों में संसद विश्व के लिए भारतीय लोकतंत्र का चेहरा है. जिस तरह शरीर में किसी भी तरह की तकली़फ के निशान मानव के चेहरे पर आ जाते हैं, उसी तरह भारतीय लोकतंत्र की अच्छाई या बुराई के निशान संसद की स्थिति को देखकर आसानी से लगाए जा सकते हैं.

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