लाल किले की प्राचीर से : वादाख़िलाफ़ी के दस साल

वैसे तो सामान्य परिस्थितियों में हमारे यहां प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति द्वारा देश को संबोधित करने की परंपरा नहीं है. राष्ट्रीय

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जनलोकपाल के लिए प्रधानमंत्री को अन्ना की चिट्ठी

सेवा में, सम्मानीय मनमोहन सिंह जी प्रधानमंत्री, भारत सरकार सस्नेह वन्दे.   आपके कार्यालय द्वारा श्री वी नारायण सामी जी

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भविष्य के भ्रष्टाचारियों के कुतर्क

बहुत चीजें पहली बार हो रही हैं. पूरा राजनीतिक तंत्र भ्रष्टाचार के समर्थन में खड़ा दिखाई दे रहा है. पहले भ्रष्टाचार का नाम लेते थे, तो लोग अपने आगे भ्रष्टाचारी का तमगा लगते देख भयभीत होते हुए दिखाई देते थे, पर अब ऐसा नहीं हो रहा है. भ्रष्टाचार के ख़िला़फ जो भी बोलता है, उसे अजूबे की तरह देखा जाता है. राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े हुए लोग चाहते हैं कि यह आवाज़ या इस तरह की आवाज़ें न निकलें और जो निकालते भी हैं, उनके असफल होने की कामना राजनीतिक दल करते हैं और राजनीतिक दल से जुड़े हुए लोग इसका उपाय बताते हैं कि भ्रष्टाचार के खिला़फ आवाज़ उठाने वाले लोग कैसे असफल होंगे.

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भंवर में अन्ना

एक सच्ची घटना है- कुत्ता क्यों मरा? पंजाब के सबसे क़द्दावर मुख्यमंत्री थे सरदार प्रताप सिंह कैरो. स्वतंत्रता सेनानी के साथ-साथ बड़े क़द्दावर नेता थे. एक बार दिल्ली से चंडीगढ़ जा रहे थे. उनके साथ उनके संसदीय सचिव देवीलाल भी थे. सरदार कैरो की गाड़ी तेज़ी से भाग रही थी कि एक कुत्ता बीच में आ गया. कुत्ते की मौत हो गई. सरदार कैरो ने थोड़ी दूर जाकर गाड़ी रुकवाई.

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लोकपाल बिलः यह जनता के साथ धोखा है

सरकार ने लोकपाल बिल का मसौदा तैयार कर लिया है. इस मसौदे की एक रोचक जानकारी-अगर कोई व्यक्ति किसी अधिकारी के खिला़फ शिकायत करता है और वह झूठा निकला तो उसे 2 साल की सज़ा और अगर सही साबित होता है तो भ्रष्ट अधिकारी को मात्र 6 महीने की सज़ा. मतलब यह कि भ्रष्टाचार करने वाले की सज़ा कम और उसे उजागर करने वाले की सज़ा ज़्यादा.

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अन्ना का प्रस्ताविक आमरण अनशन: सरकारी दमन से निपटने की तैयारी क्या है

अन्ना ने मज़बूत लोकपाल बिल पेश न किए जाने की स्थिति में आगामी 16 अगस्त से आमरण अनशन की घोषणा की है. सरकार ने अनशन न करने देने का मन बना रखा है. बाबा रामदेव और उनके साथी आंदोलनकारियों को लाठी के दम पर खदेड़ कर सरकार ने सा़फ कर दिया है कि उसे अन्ना और उनके समर्थकों को खदेड़ने में कोई वक़्त नहीं लगेगा.

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इनके लिए अनशन कौन करेगा

यह ज़रूरी नहीं है कि सभी अनशन प्रभावकारी साबित हों या वे नैतिक दृष्टि से सही माने जाएं. जब ब्रिटिशों ने अछूतों (जैसा कि उन्हें उस व़क्त कहा जाता था) के लिए अलग निर्वाचक मंडल की घोषणा की, तब गांधी जी ने अनशन किया था.

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अन्‍ना का आंदोलनः कुछ सवालों के जवाब जरूरी हैं

अन्ना का आंदोलन किस दिशा में जा रहा है? टीम अन्ना अपने बयानों में, अपनी बातों में और अपने विचारों में कितनी समानता रखती है? अन्ना रामदेव के साथ रामलीला मैदान में बैठने की बात करते हैं तो स्वामी अग्निवेश इसका विरोध करते हैं. फिर अगले ही दिन अन्ना रामलीला मैदान में रामदेव के सत्याग्रह पर हुई पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में 8 जून को जंतर-मंतर पर एक दिन के अनशन की घोषणा करते हैं.

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जन्‍मदिन पर विशेषः अन्‍ना और रामदेव वी पी सिंह से सीख लें

उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद तहसील की दो रियासतें थीं, डैया और मांडा. विश्वनाथ प्रताप सिंह का जन्म इसी डैया के राजघराने में 25 जून, 1931 को हुआ था. डैया के बगल की रियासत मांडा के राजा थे राजा बहादुर राम गोपाल सिंह. वह नि:संतान थे. उन्होंने वी पी सिंह को गोद ले लिया. 1955 में वी पी सिंह ने बाकायदा कांग्रेस की सदस्यता ली और सक्रिय राजनीति में आए.

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आरोप लगाने से ज़्यादा कठिन है शासन करना

वर्ष 1970 की बात है. एडवर्ड हीथ प्रधानमंत्री पद की दौड़ में हैरल्ड विल्सन के ख़िला़फ खड़े थे और लोगों से यह वादा कर रहे थे कि मैं महंगाई कम कर दूंगा. जब वह जीत गए, प्रधानमंत्री बन गए, तब उन्हें पता चला कि विपक्ष में रहकर आरोप लगाने से ज़्यादा कठिन सत्ता में आने के बाद काम करना होता है, अपने वादों को पूरा करना होता है.

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गांधी, हजारे और भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग

अन्ना हजारे दूसरे गांधी के रूप में उभर रहे हैं. हर अख़बार उनके स्तुतिगान से लबरेज है. लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने वाली समिति में सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों को शामिल करने की अन्ना की मांग यूपीए सरकार ने मंजूर कर ली.

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अन्ना को विजय हजारे की तरह खेलना होगा

जिस हजारे को मैंने सबसे पहले आदर देना शुरू किया था, वह अन्ना नहीं, विजय सैम्युअल हजारे थे. वह रणजी ट्रॉफी में बड़ौदा की ओर से खेलते थे. फिर 1950 की शुरुआत में भारत के लिए भी खेले. वह चौथे नंबर पर बैटिंग के लिए जाते थे और अपनी पूरी ताक़त लगा देते थे. तब भारत को क्रिकेट मैच में लगातार हार का मुंह देखना पड़ता था, जबकि हजारे हमेशा यह कोशिश करते थे कि कम से कम मैच को ड्रा कर दिया जाए बजाय हारने के.

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