कॉल अन्ना को सफल बनाया बिग वी टेलीक़ॉम ने

अन्ना हजारे द्वारा लड़ी गई जनलोकपाल की निर्णायक लड़ाई के दौरान समूचे देश को अन्ना से जोड़ने और उनके विचारों

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किसानों पर गोलियां चलाने से हल नहीं निकलेगा

भारत भी अजीब देश है. यहां कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्हें फायदा पहुंचाने के लिए सरकार सारे दरवाज़े खोल देती है. कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्हें लाभ पहुंचाने के लिए नियम-क़ानून भी बदल दिए जाते हैं. कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनके हितों की रक्षा सरकारी तंत्र स्वयं ही कर देता है, मतलब यह कि किसी को कानोंकान खबर तक नहीं होती और उन्हें बिना शोर-शराबे के फायदा पहुंचा दिया जाता है.

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जनरल की जंग जारी है

जनरल वी के सिंह भारतीय सेना के इतिहास के एक ऐसे सिपाही साबित हुए हैं, जिसने सेना में रहते हुए भी देश हित में भ्रष्टाचार के खिला़फ जंग लड़ी और सेना से रिटायर होने के बाद भी अपनी उस लड़ाई को जारी रखा. जनरल वी के सिंह जब तक सेना में रहे, वहां व्याप्त भ्रष्टाचार के खिला़फ आवाज़ उठाते रहे और पहली बार ऐसा हुआ कि सेना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के बारे में उस आम आदमी को पता चला, जिसके पैसों की खुली लूट सेना में मची हुई थी तथा अभी भी जारी है.

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लोकतंत्र की इस लड़ाई में भारत कहां है

अमेरिका किसी भी हाल में नहीं जीत सकता. यदि वह किसी देश के आंतरिक मामलों में दखल देता है तो उसकी निंदा होती है. लेकिन यदि, जैसा कि मिस्र में हो रहा है, अमेरिका ने जल्द ही हस्तक्षेप नहीं किया तो होस्नी मुबारक जैसे एक अलोकप्रिय तानाशाह को हटाना मुश्किल हो जाएगा.

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क्रांतिकारियों का पहला धमाका

22 जून, 1897 को रैंड को मौत के घाट उतार कर भारत की आज़ादी की लड़ाई में प्रथम क्रांतिकारी धमाका करने वाले वीर दामोदर पंत चाफेकर का जन्म 24 जून, 1869 को पुणे के ग्राम चिंचवड़ में प्रसिद्ध कीर्तनकार हरिपंत चाफेकर के ज्येष्ठ पुत्र के रूप में हुआ था. उनके दो छोटे भाई क्रमशः बालकृष्ण चाफेकर एवं वासुदेव चाफेकर थे.

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आतंकवाद के खिलाफ जंगः रणनीति में खामी

आतंकवाद के खिला़फ चल रही जंग की रणनीति में कुछ ऐसी आधारभूत खामियां हैं कि इस जंग में जीत हासिल करने का भी शायद ही कोई फायदा हो. युद्ध की रणनीति बनाते समय अमेरिका और पाकिस्तान इस तथ्य को नज़रअंदाज़ कर गए कि यह एक बहुआयामी लड़ाई है.

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क्या पाकिस्तान बदलाव के लिए तैयार है?

अमेरिकी विदेश मंत्रालय में तीन सौ से ज़्यादा विदेशी पाकिस्तानियों के साथ खड़े मेरे जेहन में कुछ ऐसे ही ख्याल आ रहे थे. अमेरिका-पाकिस्तान के बीच हुई रणनीतिक बैठक के दौरान एक समारोह में सारे लोग एकत्र हुए थे. पाकिस्तानी दूतावास के कर्मचारी बातचीत के माहौल से खासे उत्साहित थे.

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बुंदेलखंड के पत्‍थर खदान मजदूरों का दर्द

गगनचुंबी इमारतों एवं सड़कों की ख़ूबसूरती बढ़ाने के लिए पत्थर का सीना चाक करनेऔर नदी से बालू निकालने वाले मज़दूरों को दो जून की रोटी के बदले सिल्कोशिस नामक रोग मिल रहा है. विंध्याचल पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य स्थित बुंदेलखंड में उत्तर प्रदेश भाग के ललितपुर, झांसी, महोबा, हमीरपुर, बांदा एवं चित्रकूट आदि ज़िले पूरे भारत में पत्थरों के लिए प्रसिद्ध हैं.

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