वाजपेयी जी संघ का सभ्य मुखौटा हैं!

अयोध्या की आपराधिक घटना के बाद जल्द ही दिल्ली में उन्होंने एक और नाटक का मंचन किया. उन्होंने घोषणा की कि वह राजनीति से संन्यास ले रहे हैं. अगर कोई बहुत मूर्ख होता (वहां पर्याप्त पत्रकार थे) तो उसे विश्वास होता कि वह राजनीति छोड़ रहे हैं. वाजपेयी जी अपनी ज़ुबान के कितने पक्के थे, यह इस तथ्य से आसानी से समझा जा सकता है कि उन्होंने दो मर्तबा प्रधानमंत्री पद की ज़िम्मेदारी संभाली.

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