गुलज़ार बेहद लोकप्रिय क्यों?

साहित्यकार बिरादरी में प्रतिष्ठा नहीं मिलने के बावजूद गुलज़ार पाठकों और दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहे. आजकल  गुलज़ार जो

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कांग्रेस, भाजपा और तीसरा मोर्चा

नरेंद्र मोदी को भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करेगी या उन्हें उम्मीदवार घोषित किए बिना ही प्रधानमंत्री

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तीसरा मोर्चा संभावनाएं और चुनौतियां

लोकसभा में एफडीआई के मुद्दे पर दो दलों ने जो किया, वह भविष्य की संभावित राजनीति का महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है. शायद पहली बार मुलायम सिंह और मायावती किसी मुद्दे पर एक सी समझ रखते हुए, एक तरह का एक्शन करते दिखाई दिए. यह मानना चाहिए कि अब यह कल्पना असंभव नहीं है कि चाहे उत्तर प्रदेश का चार साल के बाद होने वाला विधानसभा का चुनाव हो या फिर देश की लोकसभा का आने वाला चुनाव, ये दोनों साथ मिलकर भी चुनाव लड़ सकते हैं.

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ममता के बंगाल में मुसलमान

पश्चिम बंगाल के मुसलमानों की बात करनी ज़रूरी इसलिए है, क्योंकि देश में जम्मू-कश्मीर और असम के बाद मुसलमानों की तीसरी सबसे बड़ी आबादी पश्चिम बंगाल में रहती है. राज्य की लगभग साढ़े छह करोड़ की आबादी में मुसलमानों की संख्या दो करोड़ के आसपास है.

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वामपंथियों का लोकतांत्रिक स्टालिनवाद

इस बात पर कोई बाजी नहीं लगाई गई कि पश्चिम बंगाल में मिली बुरी हार के बाद सीपीएम के कितने नेता इसकी ज़िम्मेदारी लेंगे और इस्ती़फा देंगे. ज़ाहिर है, कम्युनिस्ट पार्टी इस तरीक़े से काम भी नहीं करती. भारत में कम्युनिस्ट पार्टी का अस्तित्व थोड़ा दूसरे ढंग का है. यहां के कम्युनिस्टों ने लोकतांत्रिक पद्धति को स्वीकारा, जबकि दुनिया में कहीं भी कम्युनिस्टों ने इस प्रक्रिया को नहीं स्वीकारा, लेकिन जब बात पार्टी के आंतरिक संगठन की आती है तो वहां स्टालिनवाद का ही शासन दिखता है.

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नेपालः हर घर में राजशाही की चर्चा

एकीकृत नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के अध्यक्ष पुष्प दहल प्रचंड के साथ एक गोपनीय समझौते के फलस्वरूप नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी एकीकृत मॉर्क्सवाद-लेनिनवाद (माले) के अध्यक्ष झालानाथ खनाल प्रधानमंत्री तो बन गए, लेकिन देश का संविधान बनाने की दिशा में आज तक कोई सार्थक पहल नहीं हो सकी है.

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जनता बदलाव चाहती है

सत्ता की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप एक आम बात है, लेकिन जब समय चुनाव का हो तो इनकी अहमियत भी बढ़ जाती है. यही आरोप चुनावी मुद्दे तक बन जाते हैं. मसलन, पश्चिम बंगाल में चुनाव का शंखनाद हो चुका है और विपक्ष यानी तृणमूल कांग्रेस वामपंथी शासन की जमकर बखिया उधेड़ने में जुटी हुई है.

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और लाल होगी बंगाल की धरती

कविता-नया साल मैंने कई साल पहले लिखी थी. ये उसी की शुरुआती लाइनें हैं. वह कोई साल होगा, जब नए साल कासूरज हिंसा एवं रक्तपात से गीली हुई धरती के क्षितिज पर उगा होगा. बंगाल के मौजूदा हालात पर यह कविता बिल्कुल फिट बैठती है.

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कांग्रेस के युवराज का नया राजनीतिक पैंतरा

क्‍या राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी के ख़िला़फ अभियान छेड़ दिया है? स्पष्ट शब्दों में कहें तो कांग्रेस के युवराज, जिन्हें उनके कई समर्थक भगवान कृष्ण के आधुनिक अवतार के रूप में देखते हैं, ने कहीं कांग्रेस-नीत सरकार के स्थापित सत्ता केंद्रों को चुनौती देना शुरू तो नहीं कर दिया है? ऐसा सत्ता केंद्र, जिसके शीर्ष पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनके गृह मंत्री पी चिदंबरम बैठे हुए हैं.

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दिल्‍ली का बाबू : नौकरशाहों का शोर-दिल्ली चलो

वामपंथी धड़े से जुड़े राजनीतिज्ञ यदि पूर्वाभासों में भरोसा रखते हैं, तो उन्हें पश्चिम बंगाल और केरल में नौकरशाही के बदले रुख पर गौर करना चाहिए. जैसा कि हमने पहले भी बताया था कि पश्चिम बंगाल कैडर के कई वरिष्ठ अधिकारी राज्य से बाहर प्रतिनियुक्ति के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं. अब तो हालत यह है कि ऐसे नौकरशाहों की संख्या लगातार तेजी से बढ़ती ही जा रही है.

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