भारत-इजरायलः रक्षा और कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ने के आसार

भारत और इजरायल के संबंध दो दशक पुराने हैं. अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में भारत और इजरायल के

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राजनीति के नए सिद्धांत

भारत की राजनीति में नए सैद्धांतिक दर्शन हो रहे हैं. पता नहीं ये सैद्धांतिक दर्शन भविष्य में क्या गुल खिलाएंगे, पर इतना लगता है कि धुर राजनीतिक विरोधी भी एक साथ खड़े होने का रास्ता निकाल सकते हैं. लेकिन लोकसभा या राज्यसभा में क्या अब ऐसी ही बहसें होंगी, जैसी इस सत्र में देखने को मिली हैं. मानना चाहिए कि ऐसा ही होगा. ऐसा मानने का आधार है. दरअसल, अब इस बात की चिंता नहीं है कि हिंदुस्तान में आम जनता का हित भी महत्वपूर्ण है.

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सरकार जवाब दे यह देश किसका है

हाल में देश में हुए बदलावों ने एक आधारभूत सवाल पूछने के लिए मजबूर कर दिया है. सवाल है कि आखिर यह देश किसका है? सरकार द्वारा देश के लिए बनाई गई आर्थिक नीतियां और राजनीतिक वातावरण समाज के किस वर्ग के लोगों के फायदे के लिए होनी चाहिए? लाजिमी जवाब होगा कि सरकार को हर वर्ग का ख्याल रखना चाहिए. आज भी देश के साठ प्रतिशत लोग खेती पर निर्भर हैं. मुख्य रूप से सरकारी और निजी क्षेत्र में काम कर रहा संगठित मज़दूर वर्ग भी महत्वपूर्ण है.

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प्रधानमंत्री विदेशी पूंजी लाएंगे

विदेशी पूंजी निवेश के बारे में पिछली बार सरकार ने फैसला ले लिया था, लेकिन संसद के अंदर यूपीए के सहयोगियों ने ही ऐसा विरोध किया कि सरकार को पीछे हटना पड़ा. खुदरा बाज़ार में विदेशी निवेश का विरोध करने वालों में ममता बनर्जी सबसे आगे रहीं. सरकार ने कमाल कर दिया. भारत दौरे पर आई अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ममता से मिलने सीधे कोलकाता पहुंच गईं.

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असफल वित्त मंत्री सक्रिय राष्‍ट्रपति

वर्ष 2008 में ग्लोबल इकोनॉमी स्लो डाउन (वैश्विक मंदी) आया. उस समय वित्त मंत्री पी चिदंबरम थे. हिंदुस्तान में सेंसेक्स टूट गया था, लेकिन आम भावना यह थी कि इस मंदी का हिंदुस्तान में कोई असर नहीं होने वाला है. उन दिनों टाटा वग़ैरह का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा था और एक धारणा यह बनी कि भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व की अर्थव्यवस्था की ज़रूरत नहीं है.

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साठ साल का युवा

यह विचार कि भारत में संसदीय लोकतंत्र होगा और यह साठ वर्षों तक चलेगा तथा उसके बाद और ज़्यादा मज़बूत होता जाएगा, न केवल विंस्टन चर्चिल, बल्कि विश्व के कई देशों के नेताओं को हैरान कर सकता है. मुझे याद है कि पहले मेरे कुछ संबंधी यह तर्क देते थे कि भारत की ज़रूरत राजतंत्र है. यहां तक कि 1857 के विद्रोह का आधार भी मुग़ल शासन को फिर से स्थापित करना था, लेकिन भारत एक लोकतंत्र बना.

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कुंभलगढ नेशनल पार्क : फ़िक्र जानवरों की, आदिवासियों की नहीं

राजस्थान में केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने हज़ारों लोगों को विस्थापित करने की पूरी तैयारी कर ली है. इस बार विस्थापन का यह खेल किसी उद्योगपति को काऱखाना लगाने के नाम पर ज़मीन मुहैया कराने के लिए नहीं खेला जा रहा. दरअसल,एक उद्यान का दायरा बढ़ाकर उसे राष्ट्रीय उद्यान (नेशनल पार्क) बनाने की ख़ातिर आदिवासियों को उनके घरों से खदेड़ने का फरमान जारी कर दिया गया है.

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बीपीएल पर फिक्सिंग का साया

संदेहास्पद गतिविधियों में लिप्त होने के कारण एक पाकिस्तानी नागरिक की गिरफ्तारी के बाद बांग्लादेश प्रीमियर लीग (बीपीएल) पर मैच फिक्सिंग के बादल मंडराने लगे हैं. पाकिस्तान के साजिद ख़ान को मीरपुर में चटगांव किंग्स और बारिसाल बर्नर्स के बीच खेले गए मैच के दौरान खिलाड़ियों के क्षेत्र में जाने की कोशिश करते हुए गिरफ्तार किया गया.

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पुणे को पांचवां विदेशी नहीं मिलेगा

बेसहारा पुणे वारियर्स को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के पांचवें सत्र के अंतिम एकादश में चार विदेशी खिलाड़ियों से ही संतोष करना पड़ सकता है. बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, आईपीएल संचालन परिषद ने साफ तौर पर कहा कि पुणे वारियर्स की मांग तभी मानी जाएगी, जब बाक़ी फ्रेंचाइजी सैद्धांतिक तौर पर तैयार हों.

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वाइफ कैरिंग (भारयस्यमीथम)

इस बार के स्पोर्टस ऑफ द वीक का नाम है वाइफ कैरिंग. यानी अपनी बीबी को अपने कंधों में उठाना. स़िर्फ उठाना ही नहीं उसे अपने कंधों पर सवार करके एक रेस भी लगानी होती है इस खेल में. यह खेल दुनिया भर के खेलों में काफी दिलचस्प माना जाता है. मूलरूप से फिनलैंड में जन्मे इस खेल की लोकप्रियता दिनोंदिन बढ़ती जा रही है. आज यह स्पोर्ट कई विदेशी मुल्कों से निकलकर भारत में भी पहुंच चुका है.

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डायस्पोरस या डायस्प्रोवेस : मातृभूमि का गौरव या कलंक कहना काफ़ी नहीं है

हाल में पिछले दशक में भारतीय प्रवासियों पर उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट-2001 आने के बाद से और भारतीय नीति के परिप्रेक्ष्य में मील का पत्थर साबित होने वाले कुछ संक्रमणों के साथ भारत सरकार दुनिया भर में फैले अनिवासी भारतीयों और भारतीय मूल के अत्यंत कुशल भारतीय प्रवासियों को अपनी पहुंच के भीतर लाने का प्रयास कर रही है.

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अब कोच की निगरानी

खेल मंत्रालय ने अब अनुबंधित विदेशी प्रशिक्षकों की कोचिंग की समीक्षा के निर्देश दिए हैं. मंत्रालय ने टीमों के साथ जुड़े भारतीय प्रशिक्षकों का भी मूल्यांकन करने को कहा है. लंदन ओलंपिक तक उन्हीं खिलाड़ियों को विदेशी दौरे कराने को कहा गया है, जो लंदन का टिकट हासिल कर चुके हैं या फिर ओलंपिक क्वालीफाई करने का माद्दा रखते हैं.

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ख़त्म होता नक्सलियों का ख़ौ़फ

जन लोकपाल बिल पर सरकार और टीम अन्ना के बीच जारी बवाल, रिटेल में विदेशी निवेश पर सरकार, उसके सहयोगी दलों एवं विपक्ष के बीच मचे घमासान और गृहमंत्री चिदंबरम पर एक के बाद एक लग रहे आरोपों के बीच देश में कई अहम खबरें गुम सी हो गईं.

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सरकार को जनता के बीच जाना चाहिए

यह बड़ी राहत की बात है कि सरकार ने खुदरा क्षेत्र में विदेशी कंपनियों को लाने (एफडीआई) के अपने निर्णय को फिलहाल स्थगित कर दिया है. इस पर कॉरपोरेट सेक्टर और शेयर बाज़ार की प्रतिक्रिया प्रतिकूल रही.

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सरकार को स्थगन प्रस्ताव मानना चाहिए

खुदरा बाज़ार में विदेशी निवेश पर सरकार ने जो निर्णय लिया कि इसे आगे नहीं बढ़ाएंगे, यह फैसला तो सही किया, लेकिन प्रणव मुखर्जी का जो बयान है, उसकी खास बात यह है कि वह नहीं चाहते थे कि लोकसभा भंग करने का दबाव बढ़े और जल्दी चुनाव कराना पड़े.

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विदेशी आर्थिक सहायता शुद्ध स्वार्थ से प्रेरित

कोई भी पूंजीवादी उद्योगपति, किसी भी देश का वासी क्यों न हो, अपनी पूंजी तब ही लगाएगा, जब उसे उसकी सुरक्षा और उससे लाभ होने का पूरा विश्वास हो. अगर भारत सरकार की नीति उद्योगों के राष्ट्रीयकरण की रही तो कोई भी बाहरी पूंजीवादी अपना एक रुपया भी भारत में नहीं लगाएगा.

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खुदरा बाज़ार में विदेशी निवेश : सरकार देश को गुमराह कर रही है

खुदरा व्यापार का मतलब है कि कोई दुकानदार किसी मंडी या थोक व्यापारी के माध्यम से माल या उत्पाद खरीदता है और फिर अंतिम उपभोक्ता को छोटी मात्रा में बेचता है. खुदरा व्यापार का मतलब है कि वैसे सामानों की खरीद-बिक्री, जिन्हें हम सीधे इस्तेमाल करते हैं.

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क्या बड़े खुदरा व्यापारी भारत के लिए फायदेमंद साबित होंगे?

घरेलू खुदरा बाज़ार के क्षेत्र में अचानक बड़े विदेशी खिलाड़ियों को आमंत्रित करने के सरकारी फैसले से विवाद का पिटारा खुल गया है. इन बड़े-बड़े खुदरा व्यापारियों (विदेशी रिटेलर्स) के नफे-नुक़सान पर एक विस्तृत चर्चा होनी चाहिए.

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लड़की या बुलेट

बॉलीवुड की फिल्मों में पिछले कुछ समय से ट्रेंड चल गया है विदेशी फिल्म इंडस्ट्री की हिरोइंस को लेकर फिल्म बनाने का, लेकिन बॉलीवुड न केवल विदेशी हिरोइंस को प्रोमोट करता रहा है, बल्कि देश की दूसरी भाषाओं की फिल्म इंडस्ट्री से भी हिरोइंस को मौक़ा देता रहा है. उदाहरण के तौर पर अजय देवगन की फिल्म सिंघम की काजल अग्रवाल को देख सकते हैं.

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पेरिस हिल्टन को इंडिया पसंद है

जबसे बॉलीवुड में विदेशी सुंदरियों का जलवा नज़र आने लगा है, और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से बाहर की सुंदरियों को लोकप्रियता का ब़ढिया प्लेटफार्म मिलने लगा है तब से हॉलीवुड की अभिनेत्रियों की नज़र सिल्वर स्क्रीन पर पड़ने लगी है.

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भारत में पहली बार फॉर्मूला रेस : कहीं इसमें कोई ब्रेकर तो नहीं

आगामी 30 तारी़ख को कई भारतीय शूमाकर फॉर्मूला ट्रैक पर रेसिंग करते दिखाई देंगे. यह रेस इस बार भारतीय मेजबानी के तहत ग्रेटर नोएडा के बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर होगी. यह भारत के लिए पहला मौक़ा होगा, जब इस देश में फॉर्मूला रेस होगी.

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जिसेले का जादू

बॉलीवुड ने कई विदेशी बालाओं को सहारा दिया है. अब बॉलीवुड में करियर की ऊंचाइयों पर पहुंचने की तैयारी मे हैं ब्राजीलियन मॉडल जिसेले मोंटेरियो, जिनकी ख़ूबसूरती सबकी नज़र में आ चुकी है, दीपिका पादुकोण और सैफ अली ख़ान स्टारर फिल्म लव आजकल के छोटे से किरदार हरलीन कौर से. अ

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प्रजातंत्र की लडा़ई में विदेशी ताकतें

लीबिया के हालात अभी भी गंभीर बने हुए हैं. न तो देश की जनता का विश्वास खो देने वाले मुअम्मर ग़द्दा़फी पीछे हटने को तैयार हैं और न जनता की तऱफ से सत्ता परिवर्तन के लिए लड़ रहे लड़ाके. इस बीच संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव से लैस नाटो की सेनाएं भी लड़ाकों के साथ मिलकर गद्दा़फी की सत्ता पलटने में जुट गई हैं. यह परिस्थिति अपने आप में विस्मयकारी है.

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पाकिस्तान के अस्तित्व पर खतरा

लिस्बन में पिछले नवंबर में हुई नाटो देशों के मुखियाओं की बैठक में यह फैसला लिया गया कि बाहरी देशों की सेनाएं अ़फग़ानिस्तान से 2014 के अंत तक हटा ली जाएंगी और देश की सुरक्षा का ज़िम्मा वहीं के सुरक्षातंत्र के हाथों में सौंप दिया जाएगा. हम बाद में इसका विश्लेषण करेंगे.

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विदेशी मुद्रा में तपोभूमि में हलचल

बौद्धों के काग्यू कर्मा पंथ के धर्मगुरु 17वें करमापा पद को लेकर वर्षों से चले आ रहे विवाद से बौद्ध धर्मावलंबियों के साथ-साथ तथागत की तपोभूमि बोधगया तप ही रही थी कि इसी बीच चीन से भागकर आए और तिब्बत की निर्वासित सरकार के राष्ट्राध्यक्ष दलाई लामा का समर्थन लेकर भारत में शरण पाए 17वें करमापा उग्येन त्रिनले दोरजे के हिमाचल स्थित मठ से करोड़ों कीविदेशी मुद्रा पाए जाने और चीन के लिए जासूसी करने के संदेह ने शेष बौद्ध देशों को भी हतप्रभ कर दिया है

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सासाराम का मकबराः आ रहे हैं विदेशी सैलानी

साढ़े चार सौ वर्षों से ज़्यादा का इतिहास संजोए सासाराम की धरती पर खड़ा शेरशाह सूरी का मक़बरा अब सात समंदर पार बैठे सैलानियों को भी लुभाने लगा है. तभी तो वर्ष 2011 की शुरुआत होते ही जर्मनी एवं स्विटजरलैंड के सैलानियों का दल आ पहुंचा, जिसने विश्व के ऐतिहासिक धरोहरों में नामित इस पुरातात्विक खंड की चर्चा देखी व सुनी थी

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विदेशी बालाएं फ्लॉप होती अदाएं

पिछले कुछ वर्षों से बॉलीवुड में विदेशी बालाओं का जादू निर्माता-निर्देशकों के सिर चढ़ कर बोल रहा है. चाहे उनका रोल नायिका का हो या आइटम डांसर का, हिंदी फिल्मों में उनको शामिल करना मानो एक मजबूरी सी बन गई है.

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मुझे ख़ुद से प्यार है

बॉलीवुड में इस समय विदेशी बालाओं की एंट्री ज़ोरों पर हैं. सलमान ख़ान की खोज कैटरीना एवं ज़रीन ख़ान से लेकर रामू की जिया एवं निगार ख़ान तक, सभी बॉलीवुड में अपनी दुकान जमाए हुए हैं. एक व़क्त था, जब स़िर्फ हेलन ही थीं, जो इन विदेशी बालाओं की जगह अकेले टिकी थीं.

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आग पर झरिया

कोयले की राजधानी झरिया की आग को बुझाने में देश ही नहीं विदेशी एजेंसियां भी हाथ आजमाती रही हैं, लेकिन अरबों रुपए खर्च करने के बाद भी आग दहकती ही जा रही है. अब हालत यह है कि जहां-तहां बेक़ाबू आग धरती का सीना चीरकर बाहर भी झांकने लगती है. उसके बाद अचानक धरती नीचे धंस जाती है. ऐसे में जानमाल कुछ भी सुरक्षित नहीं है.

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भारत और विदेशी लेखक

भारतीय संस्कृति और इस देश के धर्म एवं उसमें व्याप्त रीतियां-कुरीतियां विदेशी लेखकों को बहुत प्रिय हैं. पहले भी कई लेखकों ने इस देश और धर्म पर लिखा है. अपने छात्र जीवन के दौरान मैंने ए एल बैशम की किताब अ वंडर दैट वॉज इंडिया देखा पढ़ी थी और उस लेखन से कई सालों तक अभिभूत भी रहा. बाद के दिनों में भी इस देश की विविधताओं से विषय उठाकर अनेक किताबें लिखी गईं.

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