नॉर्थ कोरिया ने फिर से उगला ज़हर, भड़क उठे ट्रम्प

अपनी तानाशाही के बलबूते देश के नागरिकों पर ज़ुल्म करने वाला नॉर्थ कोरिया भड़काऊ बयानबाजी करने से पीछे नहीं हट

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इटली की मनमानी – भारत को करारा जवाब देना होगा

अपने नौसैनिकों को न लौटाने का फैसला लेकर इटली ने न केवल भारत के साथ धोखा किया है, बल्कि भारत

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मिराती से राष्ट्रपति भवन तक की गाथा

महापुरुषों की ज़िंदगी एक रौशन चिराग़ की तरह होती है, जो दूसरों को रास्ता दिखाने का काम करता है. तभी

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नाज़ुक मोड़ पर भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध-II

नस्लवाद और भेदभाव की समस्या सभी मुल्कों और समाजों में आम बात है. पर यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यदि इसे ख़त्म नहीं किया जा सकता तो कम कैसे किया जा सकता है या फिर रोका कैसे जा सकता है? जहां तक सवाल ऑस्ट्रेलिया का है, समाधान को तीन स्तरों पर लागू किया जा सकता है,

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क्‍या भारत को हॉलब्रूक की जरूरत है?

अफग़ानिस्तान और पाकिस्तान में तैनात अमेरिकी दूत रिचर्ड हॉलब्रूक अ़फग़ानिस्तान-पाकिस्तान नीति में अमेरिका की जीत के लिए भारत को फ़ायदेमंद मानते हैं. यह कोई पहला मौक़ा नहीं है, जब रिचर्ड हॉलब्रूक ने अ़फग़ानिस्तान-पाकिस्तान नीति में भारत को शामिल किए जाने की पेशकश की है. अपने इस बयान से भले ही उन्होंने सीधा इशारा नहीं किया है, लेकिन इतना ज़रूर सा़फ कर दिया है कि अमेरिका अ़फग़ानिस्तान और पाकिस्तान में हर हालात में जीतना चाहता है और इस जीत के लिए उसे अगर भारत का सहारा लेना पड़ता है तो वह ज़रूर लेगा. हॉलब्रूक का यह बयान ऐसे व़क्‍त में आया है, जब भारतीय विदेश मंत्री अ़फग़ानिस्तान पर आयोजित एक समिट के लिए लंदन रवाना हो रहे थे. इस समिट का आयोजन ब्रिटेन, संयुक्‍त राष्‍ट्र और अ़फग़ानिस्तान की पहल पर हुआ. इसमें दुनिया भर के देशों के विदेश मंत्री इस बात पर चर्चा करेंगे कि किस तरह से अ़फग़ानिस्तान में सैन्‍य और ग़ैर सैनिक संसाधनों का प्रयोग किया जाए और अंतरराष्‍ट्रीय स्तर पर अ़फग़ानिस्तान की समस्‍या से निपटने के लिए नीति बनाई जाए.

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