महाराष्ट्र: लैंबोर्गिनी से विधानसभा पहुंचे बीजेपी विधायक

नई दिल्ली : एक तरफ प्रधानमंत्री अपने नेताओं से लगातार ये आग्रह करते रहते हैं की नेता ज़मीन से जुड़े

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इंसाफ के लिए कहां जाएं

हमें अपनी सोच और समाज की मानसिकता में बदलाव लाना ही होगा, ताकि लोग महिलाओं के  साथ गरिमामय और सौहार्द्रपूर्ण

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बिहार में अधिकारियों का राज

बिहार में अधिकारियों की तानाशाही है और वहां के अधिकारी निरंकुश हो गए हैं.राज्य में भ्रष्टाचार चरम पर है. भ्रष्टाचार

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प्रधानमंत्री के नाम अन्ना की चिट्ठी

सेवा में,

श्रीमान् डॉ. मनमोहन सिंह जी,

प्रधानमंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली.

विषय : गैंगरेप-मानवता को कलंकित करने वाली शर्मनाक घटना घटी और देश की जनता का आक्रोश सड़कों पर उतर आया. ऐसे हालात में आम जनता का क्या दोष है?

महोदय,

गैंगरेप की घटना से देशवासियों की गर्दन शर्म से झुक गई.

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मत भूलिए, आप सरकार के चेहरे हैं

बीते 5 जून को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में बीडीसी की बैठक के दौरान ब्लॉक प्रमुख राजेश यादव से कहासुनी हो जाने पर समाजवादी पार्टी के विधायक हाजी इऱफान के भाई हाजी उस्मान एवं उनके समर्थकों ने गोलीबारी कर दी, जिससे कई लोग जख्मी हो गए.

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बिहारः इंतिहा हो गई इंतज़ार की

दरभंगा स्थित अशोक पेपर मिल प्रबंधन और मज़दूर कामगार यूनियन के बीच शुरू हुई तक़रार थमने का नाम नहीं ले रही है. मज़दूर कामगार यूनियन के नेताओं द्वारा जहां मिल प्रबंधन पर औज़ारों एवं मशीनों की चोरी के साथ-साथ राशि डकारने का आरोप लगाया जा रहा है, वहीं मिल प्रबंधन द्वारा कामगारों के विरुद्ध दमनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है. इसके चलते अशोक पेपर मिल प्रबंधन और मज़दूर कामगार यूनियन आमने-सामने आ गए हैं.

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उत्तर प्रदेशः घोटालों के गुरुघंटाल

सामाजिक एवं राजनीतिक मंच पर एक-दूसरे की टांग खींचने और खून के प्यासे लगने वाले नेताओं का असली चेहरा जनता कभी-कभी देख पाती है. सबके अपने-अपने स्वार्थ हैं, जो उन्हें एक-दूसरे के क़रीब लाते हैं. नेताओं की मिलीभगत के चलते उत्तर प्रदेश की पहचान आज घोटालों के प्रदेश के रूप में होती है. पिछले 20-25 वर्षों में तो घोटालों की बाढ़ सी आ गई.

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अराजकतावादी नक्सलवाद : पुनर्विचार की ज़रूरत

नक्सलवादियों की हाल-फिलहाल की गतिविधियों से ऐसा लगता है कि वे अपने उद्देश्यों से भटकते जा रहे हैं. कुछ समय पहले मलकानगिरी के ज़िलाधिकारी का अपहरण कर लिया गया, उड़ीसा में एक विधायक और इटली के दो नागरिकों का अपहरण कर लिया गया.

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फसल बीमा योजना किसानों के साथ छलावा है

हमारे मुल्क में किसानों की हालत सुधारने या उन्हें राहत देने के मक़सद से सरकारी स्तर पर कई पहल हुई हैं. एक दशक पहले शुरू हुई राष्ट्रीय फसल बीमा योजना ऐसी ही एक पहल है. इस योजना का सीधा-सीधा मक़सद फसल नष्ट होने की स्थिति में क्षतिपूर्ति करना और किसान को मदद पहुंचाना है. अपने घोषित मक़सद की वजह से ज़ाहिर है कि यह योजना काफी लोकलुभावनी दिखाई देती है, लेकिन हक़ीक़त इसके उलट है.

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कांग्रेस ऐसे हारी

दिग्विजय सिंह और परवेज़ हाशमी को फांसी की सज़ा सुनाने की तैयारी हो चुकी है. कांग्रेस हाईकमान ने इन दोनों की राजनीतिक ज़िंदगी पर एक लंबा पूर्ण विराम लगाने का फैसला ले लिया है. बस इसका औपचारिक ऐलान बाक़ी है. उत्तर प्रदेश के अधिकांश कांग्रेस कार्यकर्ता कह रहे हैं कि दिग्विजय सिंह ने पहले कांग्रेस का संगठन चौपट किया, ग़लत पीसीसी मेंबर बनाए.

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उत्तर प्रदेश और निर्दलीय उम्मीदवार : कभी घी घना, कभी मुट्ठी भर चना, कभी वह भी मना

सूबे में गठबंधन राजनीति का दौर क्या आया, निर्दलीयों की अहमियत में चार चांद लग गए, उनका मोल लगने लगा. हालांकि निर्दलीयों के लिए ऐसा अवसर कई बार आया, जब सत्ता की दावेदारी रखने वालों ने उन्हें लालबत्ती से नवाज़ कर कैबिनेट मंत्री तक का दर्जा दिया, लेकिन पूर्ण बहुमत की सरकारों में उन्हें अहमियत नहीं मिली.

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विधायक जी बैठक से गायब क्यों थे

जनता और जनप्रतिनिधियों का आमना-सामना पांच सालों में स़िर्फ एक बार ही होता है. वह तब, जब विधायक जी विधायक बनने की आस में जनता के आगे हाथ फैलाकर वोटों की भीख मांगते हैं. चुनाव खत्म होते ही जनप्रतिनिधि असली रंग रूप में आ जाते हैं.

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सत्ता का दुरुपयोग रोकना होगा

क्या यह चौंकाने वाली बात नहीं है कि गुजरात के दो विधायक अहमदाबाद के पास उत्पात मचाते हुए पाए गए. जब पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया तो वे हिंसा पर उतारू हो गए. इसकी खबर जब नरेंद्र मोदी तक पहुंची तो वह पुलिस स्टेशन गए तथा विधायकों को गिरफ्तार करने वाले पुलिस कर्मियों को डांट लगाई और विधायकों को छुड़ाया.

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राइट टू रिकॉल और राइट टू रिजेक्‍ट के बिना यह प्रजातंत्र अधुरा है

अन्ना हजारे मूल बातें कहते हैं, इसलिए बड़े-बड़े विद्वान उनसे बहस नहीं कर सकते. सांसद सेवक हैं और देश की जनता मालिक है. अगर सेवक मालिक की बात न माने तो मालिक को यह हक़ है कि वह उसे बाहर कर दे. यही दलील अन्ना हजारे की है. देश को भ्रष्ट सांसदों से छुटकारा दिलाने के लिए राइट टू रिकॉल और राइट टू रिजेक्ट की मांग लेकर अन्ना हजारे और उनकी टीम आंदोलन करने वाली है.

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आप भी भ्रष्टाचार से लड़ सकते हैं

भ्रष्टाचार देश को घुन की तरह खा रहा है. अ़फसर से लेकर नेता तक हर कोई लूट के खेल में लगा हुआ है. विधायकों एवं सांसदों का वेतन-भत्ता सुरसा के मुंह की तरह बढ़ता जा रहा है. रातोंरात बनते इनके महल और करोड़ों-अरबों की संपत्ति देखकर तो यही लगता है. जिस जनता के वोटों से ये चुने जाते हैं, वही इनसे यह नहीं पूछ पाती कि आखिर कुछ ही समय में इनके पास इतना पैसा कहां से आ गया.

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पूर्णिया उपचुनावः विपक्ष का गुरूर चकनाचूर

पूर्णिया उपचुनाव में विपक्ष के नेताओं ने यह साबित कर दिया कि वे सुधरने वाले नहीं हैं. विधानसभा चुनाव में पस्त हो चुके लालू प्रसाद एवं राम विलास पासवान का अहंकार उन्हें अगर आने वाले समय में राजनीतिक हाशिए पर डाल दे तो कोई हैरानगी की बात नहीं होगी, क्योंकि लगता है, उन्होंने आपस में ही लड़ने की कसम खा ली है.

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मुख्‍यमंत्री जी, यह कैसी कैबिनेट है

बिहार की जनता ने ऐतिहासिक और अविश्वसनीय जनादेश दिया. चुनाव के परिणामों से बिहार की जनता में खुशी की लहर दौड़ गई. पूरे देश में बिहार इस नतीजे की वजह से चर्चा का विषय बना रहा. चारों तऱफ नीतीश कुमार और बिहार की जनता की जय-जयकार हुई.

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सवर्ण आयोगः विवादों का पिटारा

पिछली विधानसभा में विधायक अवनीश कुमार सिंह ने अंतिम संस्कार में आरक्षण के अनुपालन की मांग करते हुए कह डाला कि बांसघाट के शवदाह गृह में भी आरक्षण दिया जाना चाहिए. इस बात ने सबको हैरत में डाल दिया था. पूरा सदन सकते में था.

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आंदोलन के बहाने देशी शिक्षा

इतिहास गवाह है कि जब भी किसी देश को ग़ुलाम बनाया गया तो उसकी शिक्षा पद्धति में सबसे पहले परिवर्तन किया गया. आज़ादी के का़फी पहले से देश के विद्वानों और आंदोलनकारियों ने इस बात को समझ लिया था.

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विधायकों की बल्‍ले-बल्‍ले

फंड खत्म करने को लेकर विधायकों के दिलों में जो मलाल था, वह अब बहुत जल्द दूर होने वाला है. नए साल के तोह़फे के तौर पर सरकार विधायकों के वेतन को लगभग दोगुना करने पर गंभीरता से विचार कर रही है. इसके साथ ही विधायकों को मिलने वाले रेल कूपन एवं हवाई यात्रा के लिए मिलने वाली राशि में भी इज़ा़फा किया जा रहा है.

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केसरी हत्‍याकांडः कई और चेहरे बेनकाब होंगे

भाजपा विधायक राजकिशोर केसरी की हत्या के कारणों को लेकर पूर्णिया सहित पूरे सूबे में अटकलों का दौर जारी है. मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं, जबकि उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने राजकिशोर केसरी को क्लीन चिट देते हुए हत्या को अंजाम देने वाली महिला रूपम पाठक को ब्लैकमेलर कहा.

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राजनीति है, रिश्तों का क्या

उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव में दोस्ती की नई बुनियाद पड़ चुकी है. इस दोस्ताने में बसपा फायदे में है तो कांग्रेस हाथ मलती नज़र आ रही है. यह संबंध बसपा के स्वामी प्रसाद मौर्या और कांग्रेस की राजकुमारी रत्ना सिंह के बीच क़ायम हुआ है.

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सियासत की सीढ़ी बनी शीलू

चोरी के आरोप में सलाखों के पीछे पड़ी शीलू को न्याय दिलाने के लिए राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों में होड़ मची है. सपा, भाजपा और कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर धरना-प्रर्दशन कर रहे हैं. गुलाबी गैंग पहले ही उसकी मदद का ऐलान कर चुकी है और अब निषाद महासभा और अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा भी मैदान में आ गई है.

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आ़खिर क्यों मानें क़ानून?

वैसे तो कहा जाता है कि क़ानून अंधा होता है, जिसका तात्पर्य यह है कि क़ानून का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध न्यायिक प्रक्रिया बिना भेदभाव के चलनी चाहिए पर यह कथन केवल कथन मात्र ही है. वास्तविकता इससे अलग है. तुलसीदास जी की चौपाई समरथ को नहीं दोष गोसाईं इसी यथार्थ का सर्मथन करती है.

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खुद को मसीहा समझते हैं जन प्रतिनिधि

असम में विधायकों के निवास पर ग्रामीणों की भीड़ सहज ही देखी जा सकती है. पार्टी के कैडर प्रत्येक आगंतुक की व़फादारी की जांच करते हैं, फिर उसके आवेदन को आगे बढ़ाने की स़िफारिश करते हैं. यह ग्रामीण असम का चिर परिचित मंजर है.

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करगहरः कौन बनेगा पहला विधायक?

नए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आए करगहर में चर्चा है कि यहां का पहला विधायक कौन बनेगा? यहां से खम ठोक रहे जदयू के रामधनी सिंह, लोजपा के शंकर कुशवाहा, कांग्रेस के आलोक सिंह, कांग्रेस (जे) के रमेश तिवारी उ़र्फ टाइगर एवं अपना दल के मनोज कुमार मतदाताओं के बीच अपनी बात रख रहे हैं.

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