कटप्‍पा की मुश्किलें बढ़ी तो मांग रहे हैं माफी, देंखे Video

नई दिल्ली, (राज लक्ष्मी मल्ल) :  बहुचर्चित फिल्म बाहुबली के दूसरे पार्ट यानि ‘बाहुबली – द बिगनिंग’ को लेकर कर्नाटक

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सलमान खान को छिछोरा बोल फंसी ये एक्ट्रेस, खतरे में फ़िल्मी करियर !

नई दिल्ली, (विनीत सिंह) : अभी हाल ही में शाहरुख खान की फिल्म ‘रईस’ से बॉलीवुड में डेब्यू करने वाली

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तसलीमा सुर्खियों में रहना चाहती हैं

बांग्लादेश की विवादास्पद और निर्वासन का दंश झेल रही लेखिका तसलीमा नसरीन ने एक बार फिर से नए विवाद को जन्म दे दे दिया है. तसलीमा ने बंग्ला के मूर्धन्य लेखक और साहित्य अकादमी के अध्यक्ष सुनील गंगोपाध्याय पर यौन शोषण का बेहद संगीन इल्ज़ाम जड़ा है. तसलीमा ने सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर लिखा- सुनील गंगोपाध्याय किताबों पर पाबंदी के पक्षधर रहे हैं.

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बड़ी कठिन है न्‍याय की डगर

सब मानते हैं कि देर से मिला इंसा़फ भी नाइंसा़फी के बराबर होता है. इसके बावजूद हमारे देश में म़ुकदमे कई पीढि़यों तक चलते हैं. हालत यह है कि लोग अपने दादा और परदादा के म़ुकदमे अब तक झेल रहे हैं. इंसान खत्म हो जाता है, लेकिन म़ुकदमा बरक़रार रहता है. इसकी वजह से बेगुनाह लोग अपनी ज़िंदगी जेल की सला़खों के पीछे गुज़ार देते हैं. कई बार पूरी ज़िंदगी क़ैद में बिताने या मौत के बाद फैसला आता है कि वह व्यक्ति बेक़सूर है.

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सुशासन का सच या फरेब

बिहार के चौक-चौराहों पर लगे सरकारी होर्डिंग में जिस तरह सुशासन का प्रचार किया जाता है, वह एनडीए सरकार की शाइनिंग इंडिया की याद दिलाता है. बिहार से निकलने वाले अ़खबार जिस तरह सुशासन की खबरों से पटे रहते हैं, उसे देखकर आज अगर गोएबल्स (हिटलर के एक मंत्री, जो प्रचार का काम संभालते थे) भी ज़िंदा होते तो एकबारगी शरमा जाते. ऐसा लिखने के पीछे तर्क है.

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अंतराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2012 सशक्‍त कृषि नीति बनाने की जरूरत

संसद द्वारा सहकारिता समितियों के सशक्तिकरण के लिए संविधान संशोधन (111) विधेयक 2009 को मंज़ूरी मिलने के बाद भारत की सहकारी संस्थाएं पहले से ज़्यादा स्वतंत्र और मज़बूत हो जाएंगी. विधेयक पारित होने के बाद निश्चित तौर पर देश की लाखों सहकारी समितियों को भी पंचायतीराज की तरह स्वायत्त अधिकार मिल जाएगा. हालांकि इस मामले में केंद्र एवं राज्य सरकारों को अभी कुछ और पहल करने की ज़रूरत है, ख़ासकर वित्तीय अधिकारों और राज्यों की सहकारी समितियों में एक समान क़ानून को लेकर.

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सीएजी, संसद और सरकार

आज़ादी के बाद से, सिवाय 1975 में लगाए गए आपातकाल के, भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाएं और संविधान कभी भी इतनी तनाव भरी स्थिति में नहीं रही हैं. श्रीमती इंदिरा गांधी ने संविधान के प्रावधान का इस्तेमाल वह सब काम करने के लिए किया, जो सा़फ तौर पर अनुचित था और अस्वीकार्य था. फिर भी वह इतनी सशक्त थीं कि आगे उन्होंने आने वाले सभी हालात का सामना किया. चुनाव की घोषणा की और फिर उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

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संघ नहीं चाहता भाजपा मज़बूत हो

यह हमेशा विवाद का विषय रहा है कि विधानसभा का चुनाव मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित करके लड़ा जाए या चुनाव के बाद मुख्यमंत्री चुना जाए. ठीक उसी तरह, जैसे लोकसभा चुनाव में कुछ पार्टियां प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा करके लड़ती हैं, कुछ पार्टियां ऐसा नहीं करती हैं. 2004 में भाजपा ने आडवाणी जी को प्राइम मिनिस्टर इन वेटिंग कहकर चुनाव लड़ा था, जबकि कांग्रेस ने किसी को भी अपना उम्मीदवार नहीं बनाया था.

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सरकार नहीं चाहती मुस्लिमों को आरक्षण मिले

एक बार फिर मुस्लिम आरक्षण को लेकर पूरे देश में विवाद खड़ा हो गया है. कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के समय मुसलमानों को 4.5 फीसदी आरक्षण के रूप में जो लॉलीपॉप दिया था, उसकी सच्चाई उस समय सामने आ गई, जब आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने उसे यह कहकर ख़ारिज कर दिया कि यह धर्म की बुनियाद पर है और संविधान के अनुकूल नहीं है.

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आरटीआई के बाउंसर से कब तक बचेगी बीसीसीआई

इस साल का आईपीएल सीजन फिर विवादों में घिर गया. इस बार खिलाड़ियों के स्पॉट फिक्सिंग में फंसने की बात सामने आई. कुछ खिलाड़ियों ने अनुबंध से ज़्यादा राशि मिलने की बात स्वीकार की. विवाद इतना बढ़ा कि बात संसद के गलियारों तक पहुंच गई.

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नए सेनाध्‍यक्ष की नियुक्ति पर विवादः प्रधानमंत्री की अग्नि परीक्षा

चौथी दुनिया को कुछ ऐसे दस्तावेज़ हाथ लगे हैं, जिनसे हैरान करने वाली सच्चाई का पता चलता है. कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका की सुनवाई हुई, जिसमें लेफ्टिनेंट जनरल बिक्रम सिंह को अगले सेनाध्यक्ष के रूप में नियुक्ति पर सवाल खड़े किए गए.

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सेक्‍स, सीडी और खिलाड़ी

अभिषेक मनु सिंघवी, कांग्रेस के प्रवक्ता और सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं. इससे भी बड़ा परिचय उनका यह है कि वह सांसद हैं. ऐसे-वैसे सांसद नहीं, बल्कि संसद की स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन हैं. वह देश में क़ानून बनाने की प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण और शक्तिशाली केंद्र हैं.

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राष्ट्रमंडल खेल का खुमार

राष्ट्रमंडल खेल समाप्त हुए डेढ़ साल से अधिक समय हो गया, लेकिन अभी भी उससे जुड़े बाबुओं की चर्चा जारी है. हालांकि उसमें शामिल अधिकांश अधिकारियों को उनके पुराने विभाग या मंत्रालय में भेज दिया गया है, लेकिन अभी सब कुछ दांव पर है.

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सेना के आंतरिक कार्यक्षेत्र में अनाधिकृत हस्‍तक्षेप

जिस तरह सेना के नेतृत्व में भ्रष्ट बैंकों, वित्तीय संस्थानों और उद्योगों की साझेदारी से ऊर्जा और अन्य कंपनियों के हितों के लिए अमेरिकी मीडिया व्यवसायिक घरानों का मुखपत्र बन गई थी, उसी तरह भारत में भी व्यवसायिक समूहों के स्वामित्व वाले टीवी चैनलों में नीरा राडिया टेप के केस के दौरान टीवी एंकर कॉर्पोरेट घरानों का रु़ख लोगों के सामने रख रहे थे.

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सेना, साज़िश और सियासत

पिछले तीन सालों में कांग्रेस के नेतृत्व में चल रही सरकार में घट रही घटनाएं और उसके दूरगामी परिणामों से देश की अवाम चिंतित ही नहीं, बेहद परेशान भी है. पिछले दिनों जिस तरह से देश में सैन्य बग़ावत की खबरों की अटकलें लगीं, वे आज़ाद भारत के इतिहास में एक अनहोनी की तरह है.

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विवाद मिलकर सुलझाएं

अदालत ने हॉकी इंडिया और इंडियन हॉकी फेडरेशन (आईएचएफ) से कहा है कि उनकी लड़ाई में खिलाड़ियों के हितों को नुक़सान नहीं होना चाहिए. अदालत ने कहा कि घरेलू सीरीज़ के भविष्य और खिलाड़ियों के हितों को देखते हुए दोनों संस्थाएं मिलकर विवाद सुलझाएं.

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भारत यानी डॉ. जैकेल और मिस्टर हाइड

पाकिस्तान भारत की तरह किस मायने में समान है? इसमें कोई शक नहीं कि वह क्रिकेट में बेहतर है. इंग्लैंड से हुए मुक़ाबले में उसे जीत मिली, जबकि ऑस्ट्रेलिया में भारत का सूपड़ा सा़फ हो गया. जहां तक सुप्रीम कोर्ट का सवाल है तो निश्चित तौर पर वह भी भारत के सुप्रीम कोर्ट की तरह अच्छा है.

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निराशा पैदा करने वाला फैसला

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सभी सम्मान करेंगे. आखिर यह भारत के सुप्रीम कोर्ट का फैसला है, लेकिन इस फैसले से उन लोगों को निराशा हुई, जो ईमानदारी में यक़ीन रखते हैं. देश का सुप्रीम कोर्ट यह कहता है कि हमें ईमानदारी और इंटीग्रिटी से कोई मतलब नहीं है तो फिर सवाल खड़ा होता है कि क्या देश ईमानदारी छोड़ दे, क्या इस देश में उन्हीं लोगों की सुनी जाएगी, जो भ्रष्ट या बेईमान हैं?

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विवाद में फंसी पाकिस्तान सरकार

पाकिस्तान और विवाद का चोली दामन का रिश्ता है. कभी उसे आतंकवाद को समर्थन देने के आरोपों का सामना करना पड़ता है, तो कभी सेना और सरकार के बीच के तनाव के कारण लोकतंत्र ही खतरे में पड़ता मालूम होता है. मेमोगेट का मामला अभी चल ही रहा है कि सरकार को एक अन्य मामले का सामना करना पड़ गया है.

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साहित्य के बहाने सियासी खेल

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल ख़त्म हो गया. जब मैं फेस्टिवल के पहले दिन वहां पहुंचा तो सलमान रश्दी के जयपुर आने-न आने को लेकर खासे विवाद और भ्रम की स्थिति थी, लेकिन दोपहर बाद तक यह साफ हो गया था कि अपने उपन्यास सैटेनिक वर्सेस को लेकर विवादास्पद हुए लेखक सलमान रश्दी जयपुर के दिग्गी पैलेस नहीं आ रहे हैं

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यह सेना की इज्जत की सवाल है

देश के सर्वोच्च न्यायालय में सेना और सरकार आमने-सामने हैं. आज़ादी के बाद भारतीय सेना की यह सबसे शर्मनाक परीक्षा है, जिसमें थल सेनाध्यक्ष की संस्था को सरकार दाग़दार कर रही है. पहली बार सेनाध्यक्ष और सरकार के बीच विवाद का फैसला अदालत में होगा. विवाद भी ऐसा, जिसे सुनकर दुनिया भर में भारत की हंसी उड़ रही है.

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पाकिस्तान : सरकार और सेना आमने-सामने

पाकिस्तान में सरकार और सेना के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. हालांकि सरकार भी यह कोशिश कर रही है कि इस विवाद का ख़ुलासा न हो, इसलिए जैसे ही मीडिया में ख़बर आई कि सरकार सेना प्रमुख एवं आईएसआई प्रमुख को हटाना चाहती है तो प्रधानमंत्री गिलानी ने विरोध में अपना बयान जारी किया कि ऐसी अफवाह सरकार को अस्थिर करने के लिए फैलाई जा रही है.

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अमेरिका-ईरान : तकनीकी श्रेष्ठता दिखाने की कोशिश

अमेरिका और ईरान के बीच का विवाद गहराता जा रहा है. कुछ समय पूर्व अमेरिका का एक ड्रोन (आरक्यू-170 सेंटीनेल) ईरान की सीमा में घुस गया था. ईरान ने अमेरिका के इस मानवरहित विमान को अपने क़ब्ज़े में ले लिया.

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समीक्षा पर घमासान

साहित्य और विवादों का चोली दामन का साथ रहा है. जब से साहित्यिक लेखन की शुरुआत हुई है, तभी से विषयों को लेकर मतांतर भी हैं. उसी मतांतर की परिणति विवादों में होती है. कुछ विवाद घोर साहित्यिक होते हैं

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शीत युद्ध का बढ़ता खतरा

सोवियत संघ के विघटन के बाद माना जाने लगा कि शीत युद्ध ख़त्म हो गया है. ऐसा इसलिए, क्योंकि सोवियत संघ के विघटन के बाद साम्यवादी खेमा कमज़ोर हो गया था. रूस सामरिक तौर पर तो मज़बूत था, लेकिन उसकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह वैश्विक स्तर पर साम्यवाद के प्रसार के लिए मुहिम छेड़ सके.

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फेसबुक नहीं, अन्ना का खौ़फ

अन्ना हजारे के ख़िला़फ सरकारी मुहिम के स्वयंभू अगुवा रहे कपिल सिब्बल लंबे समय से राजनीतिक परिदृश्य से ग़ायब थे. विवाद प्रिय नेता होने के बावजूद सिब्बल की मीडिया और विवाद से दूरी आश्चर्य चकित ही नहीं करती थी, बल्कि चौंका भी रही थी.

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मैच फिक्सिंग का जिन्न

अभी हाल में मैच फिक्सिंग को लेकर पाकिस्तान के तीन प्रमुख खिलाड़ियों को सज़ा मिलने का मामला पूरी तरह से ठंडा भी नहीं पड़ा कि फिक्सिंग से जुड़े और भी कई विवाद जन्म लेने लग गए हैं.

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