इंडियन एक्‍सप्रेस की पत्रकारिता- 2

अगर कोई अ़खबार या संपादक किसी के ड्राइंगरूम में ताकने-झांकने लग जाए और गलत एवं काल्पनिक कहानियां प्रकाशित करना शुरू कर दे तो ऐसी पत्रकारिता को कायरतापूर्ण पत्रकारिता ही कहेंगे. हाल में इंडियन एक्सप्रेस ने एक स्टोरी प्रकाशित की थी, जिसका शीर्षक था, सीक्रेट लोकेशन. यह इस अ़खबार में प्रकाशित होने वाले नियमित कॉलम डेल्ही कॉन्फिडेंशियल का एक हिस्सा थी.

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न थकेंगे, न झुकेंगे

आखिर अन्ना हज़ारे क्या हैं, मानवीय शुचिता के एक प्रतीक, बदलाव लाने वाले एक आंदोलनकारी या भारतीय राजनीति से हताश लोगों की जनाकांक्षा? शायद अन्ना यह सब कुछ हैं. तभी तो इस देश के किसी भी हिस्से में अन्ना चले जाएं, लोग उन्हें देखने-सुनने दौड़े चले आते हैं? उनकी सभाओं में उमड़ने वाली भीड़ को देखकर कई राजनेताओं को रश्क होता होगा.

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जनरल वी के सिंह का आहृवान : भ्रष्‍टाचार के समूल नाश का संकल्‍प लीजिए

देश को बचाने के लिए आज़ादी के संकल्पों को याद करके भ्रष्टाचार के समूल नाश का संकल्प युवा पीढ़ी को लेना होगा, भ्रष्टाचार का कीड़ा देश की रूह को खाए जा रहा है. यह बात पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वी के सिंह ने अयोध्या-फैज़ाबाद दौरे के दौरान कही. उन्होंने कहा कि सेना को उच्च तकनीक का इस्तेमाल करके ख़ुद को मज़बूत करते रहना चाहिए. पड़ोसी देश चीन यदि अपनी सेना को मज़बूत करता है तो यह उसका हक़ है, हमें भी ख़ुद को तैयार करना होगा.

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यह सेना की इज्जत की सवाल है

देश के सर्वोच्च न्यायालय में सेना और सरकार आमने-सामने हैं. आज़ादी के बाद भारतीय सेना की यह सबसे शर्मनाक परीक्षा है, जिसमें थल सेनाध्यक्ष की संस्था को सरकार दाग़दार कर रही है. पहली बार सेनाध्यक्ष और सरकार के बीच विवाद का फैसला अदालत में होगा. विवाद भी ऐसा, जिसे सुनकर दुनिया भर में भारत की हंसी उड़ रही है.

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जनरल वी के सिंह को सुप्रिम कोर्ट जाना चाहिए

केंद्र सरकार सरासर झूठ बोल रही है. भारत के थल सेनाध्यक्ष जनरल वी के सिंह की जन्मतिथि 10 मई, 1951 है, यह बात भारत सरकार और सेना द्वारा दिए गए आधिकारिक उत्तर में है. जिन अधिकारियों ने जवाब दिया है, उनके दस्त़खत हैं. इसके बावजूद भारत सरकार झूठ बोल रही है कि जनरल वी के सिंह की जन्मतिथि 10 मई, 1950 है.

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थल सेनाध्यक्ष के खिलाफ सरकार की साजिश

भारतीय सेना पर लिखने से हमेशा बचा जाता रहा है, क्योंकि सेना ही है जो देश की रक्षा दुश्मनों से करती है, पर पिछले कुछ सालों में सेना में भ्रष्टाचार बढ़ा है. अक्सर खाने के सामान की शिकायतें आती हैं कि वहां घटिया राशन सप्लाई हुआ है. लोग पकड़े भी जाते हैं, सज़ाएं भी होती हैं. सेना में खरीद फरोख्त में लंबा कमीशन चलता है, जिसके अब कई उदाहरण सामने आ चुके हैं. ज़्यादातर मामलों के पीछे राजनेताओं का छुपा हाथ दिखाई दिया है.

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