Santosh Bhartiya Remembers Late Shri VP Singh on the eve of his Birthday

बीबीसी के साथ एक साक्षात्कार में, वरिष्ठ पत्रकार और चौथी दुनिया के प्रधान संपादक श्री संतोष भारतीय ने पूर्व प्रधानमंत्री

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यह खामोशी देश के लिए खतरनाक है

कोयला घोटाला अब स़िर्फ संसद के बीच बहस का विषय नहीं रह गया है, बल्कि पूरे देश का विषय हो गया है. सारे देश के लोग कोयला घोटाले को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि इसमें पहली बार देश के सबसे शक्तिशाली पद पर बैठे व्यक्ति का नाम सामने आया है. मनमोहन सिंह कोयला मंत्री थे और यह फैसला चाहे स्क्रीनिंग कमेटी का रहा हो या सेक्रेट्रीज का, मनमोहन सिंह के दस्तखत किए बिना यह अमल में आ ही नहीं सकता था.

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जन्‍मदिन पर विशेषः अन्‍ना और रामदेव वी पी सिंह से सीख लें

उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद तहसील की दो रियासतें थीं, डैया और मांडा. विश्वनाथ प्रताप सिंह का जन्म इसी डैया के राजघराने में 25 जून, 1931 को हुआ था. डैया के बगल की रियासत मांडा के राजा थे राजा बहादुर राम गोपाल सिंह. वह नि:संतान थे. उन्होंने वी पी सिंह को गोद ले लिया. 1955 में वी पी सिंह ने बाकायदा कांग्रेस की सदस्यता ली और सक्रिय राजनीति में आए.

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वी पी सिंह का सपना पूरा हुआ

किसानों ने अपना रुख़ तय करना प्रारंभ कर दिया है. स्वर्गीय प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह का शायद यही सपना था. उन्होंने दिल्ली के पास दादरी में किसानों के ज़मीन अधिग्रहण के ख़िला़फ सफल लड़ाई लड़ी. उनके देहांत के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला आया कि किसान अगर ज़मीन नहीं देना चाहते तो उनकी ज़मीन वापस कर दी जाए. मौत के बाद भी वी पी सिंह जीत गए, रिलायंस हार गया.

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भाजपा और संघ की दु:ख भरी कहानी

यह कहानी न भारतीय जनता पार्टी की है और न उसे अपना राजनैतिक चेहरा मानने वाले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की है. यह कहानी उस दर्द की है, जिसे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का सच्चा स्वयं सेवक और भारतीय जनता पार्टी का सच्चा कार्यकर्ता पिछले पंद्रह सालों से भोग रहा है.

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यह वी पी सिंह की जीत है

भारतीय राजनीति की दिशा और दशा बदलने वाले वी पी सिंह कई वर्षों से किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे, लेकिन उन्होंने किसान आंदोलन का जो बीज बोया है, उसके फलने-फूलने का समय आ गया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद देश भर के किसानों की आशा जगी है.

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