भारत- फ्रांस, दोनों को एक दूसरे की ज़रूरत है

फ्रांस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा को किन अर्थों में देखा जाना चाहिए. क्या यह फ्रांस की रणनीति का हिस्सा

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ज़िंदादिली की मिसाल स्टी़फन हॉकिंग

इंसान चाहे तो क्या नहीं कर सकता. अपनी हिम्मत और लगन के बूते वह नामुमकिन को भी मुमकिन बना सकता है. इसकी एक बेहतरीन मिसाल है स्टी़फन हॉकिंग, जिन्होंने असाध्य बीमारी के बावजूद कामयाबी के आसमान को छुआ. तक़रीबन 22 साल की उम्र में उन्हें एमियो ट्रोफिक लेटरल स्केलरोसिस नामक बीमारी हो गई थी. यह ऐसी बीमारी है, जो कभी ठीक नहीं होती. इसकी वजह से व्यक्ति का पूरा जिस्म अपंग हो जाता है, स़िर्फ दिमाग़ ही काम करने योग्य रहता है. स्टी़फन ने एक बार कहा था कि मैं भाग्यशाली हूं कि मेरा केवल शरीर बीमार हुआ है. मेरे मन और दिमाग़ तक रोग पहुंच नहीं पाया.

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आपके चलने से पैदा होगी बिजली

वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने एक ऐसा जेनरेटर विकसित किया है, जो चहलक़दमी से यांत्रिक ऊर्जा पैदा करेगा. वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम का कहना है कि ये जीवित जेनरेटर वायरस का उपयोग कर जूतों के सोल से बिजली का उत्पादन करते हैं.

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मेहनत रंग लाएगी, लेकिन…

जहां चाह है वहां राह है, लेकिन अपनी मंज़िल की ओर बढ़ना जितना आसान है उतना ही कठिन भी. कुछ ऐसा ही हाल है अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च (आईपी यूनिवर्सिटी, दिल्ली) के 13 छात्रों का, जिन्होंने अपने सपने को साकार करने के लिए दिन रात मेहनत की. मगर हर बार निराशा ही हाथ लगी.

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लॉयनल मेसी : फुटबॉल का स्वर्णिम युग या सर्वश्रेष्‍ठ फुटबॉलर?

फुटबॉल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि वैज्ञानिक किसी खिला़डी के अद्‌भुत खेल का कारण जानना चाहते हैं. इसके लिए उन्होंने लॉयनल मेसी के दिमाग़ का परीक्षण करने का फैसला किया है, क्योंकि मेसी अभी 25 साल के भी नहीं हुए हैं और उन्होंने अपने खेल से पूरी दुनिया को अपना मुरीद बना लिया है.

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शिवरात्रि : एक सार्वभौमिक उत्सव

इसे विडंबना ही कहेंगे कि जिस सर्वशक्तिमान परमात्मा को लोग अपने विचारों एवं भावनाओं में याद करते हैं, उसे यथार्थ रूप से जानते ही नहीं है. सृष्टि के नियंता परमात्मा की अद्भुत रचना को देखकर उसका गुणगान तो बहुत लोग करते आए हैं, किंतु उन्हें उस परम चैतन्य परमात्मा का यथार्थ अलौकिक अनुभव नहीं है. आश्चर्य तो यह है कि परमात्मा को न जानते हुए भी वे उसे याद करते हैं.

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डायनासोर का बाप

हाल में हुआ एक अध्ययन चौंकाने वाला है. जीवाश्म वैज्ञानिकों ने एक ऐसे रेंगने वाले हिंसक एवं हमलावर प्रकृति के प्राणी के जीवाश्म खोज निकाले हैं, जिसके बारे में समझा जाता है कि वह डायनासोर के निवास से क़रीब 26 करोड़ 50 लाख साल पहले धरती पर घूमता था.

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कौवे के इशारे

आपने कौवे को कांव-कांव करते ज़रूर सुना होगा, लेकिन क्या कभी उसके इशारे देखे हैं? नहीं देखे, तो हम बताते हैं कि कौवे की प्रजाति के पक्षी रावेन बात करने के लिए मनुष्यों की तरह इशारे करते हैं, ऐसा वैज्ञानिकों ने अपने शोध में पाया है.

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इलेक्ट्रॉनिक नाक और टीबी

इसे टीबी के मरीज़ों के लिए अच्छी खबर कहा जा सकता है. असल में भारतीय वैज्ञानिकों का दावा है कि वे एक इलेक्ट्रॉनिक नाक बना रहे हैं जिससे सांस का परीक्षण किया जाएगा और ट्यूबरकुलोसिस यानी टीबी का तुरंत पता लगाया जा सकेगा.

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स्पीड का नया दावा

स्विटज़रलैंड में यूरोपीय परमाणु अनुसंधान केंद्र (सर्न) और इटली के वैज्ञानिकों ने घोषणा की है कि उन्हें ऐसे पार्टिकल मिले हैं जो प्रकाश की गति से तेज चलते हैं. वैज्ञानिक ख़ुद भी चकित हुए. पिछले दिनों वैज्ञानिकों ने घोषणा की कि उन्हें न्यूट्रिनो नामक पार्टिकल मिले हैं, जो प्रकाश की गति से भी तेज चलते हैं.

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सूरज का डबल धमाका

यह खोज कुछ नई है. इस बार वैज्ञानिकों ने दो सूरज वाले ग्रह को खोजने का दावा किया है. अंतरिक्ष विज्ञानियों ने एक ऐसा ग्रह खोज निकाला है, जिसके पास दो सूर्य हैं. ग्रह को केपलर 16 बी नाम दिया गया है. आकार में शनि के बराबर का कैपलर 16 बी हमारे सूर्य से छोटे दो तारों की परिक्रमा करता है.

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स्पाइडर और बुलेट प्रूफ स्किन

डच वैज्ञानिकों ने मकड़ी के जाल की मदद से बुलेट प्रूफ त्वचा का निर्माण किया है. मानव शरीर से वैज्ञानिकों ने त्वचा का एक टुकड़ा लिया और बायो इंजीनियरिंग के सहारे उसकी तह में मकड़ी के जाले डाले.

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संकट में विज्ञान पत्रिकाएं

आज देश में राजनीति, खेल, आर्थिक, महिला जगत, घर-परिवार, स्वास्थ्य, ऑटो मोबाइल, कंप्यूटर, पर्यावरण, सूचना प्रौद्योगिकी और फिल्म आदि विषयों पर अनेक पत्रिकाएं प्रकाशित हो रही हैं, किंतु विज्ञान एक ऐसा विषय है, जिसमें सरकारी पहल के बावजूद बहुत प्रगति नहीं हुई.

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ईश्वरीय सेवा के निमित्त

कभी आपने सोचा कि कोई व्यक्ति महात्मा, साधु-संत क्यों बनता है और कोई गृहस्थ व्यापारी, चोर, डाकू, वैज्ञानिक, डॉक्टर या भिखारी क्यों बनता है?

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रहस्य से पर्दा उठा

एक कहावत है कि कुत्ता आदमी से भी ज़्यादा वफादार होता है. ऐसे ही एक वफादार कुत्ते की मौत पर काफी समय से प्रश्नचिन्ह लगा हुआ था, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने जापान के सबसे मशहूर कुत्ते की दशकों पहले हुई मौत के कारणों का पता लगा लिया है.

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ऐसे बनेगी मुसलमानों की तकदीर

अमेरिका स्थित पिऊ रिसर्च सेंटर की हाल में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, पूरे विश्व में एक बिलियन और 570 मिलियन मुसलमान हैं. मतलब दुनिया का हर चौथा आदमी मुसलमान है. क्या इस रिपोर्ट में कुछ ऐसा है, जिस पर खुश हुआ जा सके? मेरे हिसाब से तो नहीं.

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दिमाग़ छोटा हो रहा है

पहले की अपेक्षा आज के इंसान का दिमाग़ धीरे-धीरे छोटा होता जा रहा है. इसकी वजह क्या है और क्या इससे हमारी विचार शक्ति पर असर पड़ रहा है? इस विषय पर दुनिया के वैज्ञानिकों की राय अलग-अलग है.

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अब आम से बनेगी शराब

शोधकर्ताओं ने आम से शराब बनाई है. उन्हें उम्मीद है कि एक दिन यह अंगूर से बनी पारंपरिक शराब को टक्कर दे सकेगी. उत्तर प्रदेश के वैज्ञानिकों ने तीन तरह के आमों को मिलाकर उसमें नशा पैदा किया है. उन्होंने दशहरी, लंगड़ा और चौसा आमों को मिलाकर यह शराब बनाई है.

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अल्ट्रासाउंड से गर्भ निरोध!

अमेरिका में वैज्ञानिक एक शोध कर यह पता लगाने में जुटे हैं कि क्या अल्ट्रासाउंड को पुरुषों के लिए अस्थाई गर्भनिरोधक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.

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बीटी बैगन पर रोक के वैज्ञानिक और लोकतांत्रिक पहलू

बीटी बैगन के इस्तेमाल पर पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने फिलहाल रोक की घोषणा की तो मीडिया में उसके ख़िला़फ आलोचनाओं का अंबार लग गया. कई लोगों ने तर्क दिए कि ऐसे फैसले वैज्ञानिकों के लिए छोड़ दिए जाने चाहिए. लेकिन यह मामला विज्ञान और विज्ञान विरोध का नहीं है.

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ग्‍लोबल वार्मिंग बनाम मानवाधिकार

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए उठाए गए क़दमों की सुस्त चाल से, इससे प्रभावित हो रहे समुदायों में स्वाभाविक रूप से निराशा बढ़ी. परंपरागत राजनैतिक-वैज्ञानिक पद्धतियों पर आधारित उक्त उपाय ज़्यादा प्रभावी साबित नहीं हो रहे थे, पीड़ित लोगों की समस्याओं की अनदेखी हो रही थी और सबसे बड़ी बात यह थी कि मानवीय गतिविधियों के चलते वैश्विक तापमान में हो रही वृद्धि के लिए ज़िम्मेदारी तय करने की कोई व्यवस्था न होने से प्रभावित समुदायों को लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था.

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जीवाश्‍मों की अवैध तस्‍करी

मध्य प्रदेश के धार ज़िले में यत्र-तत्र उपलब्ध साढ़े छह करोड़ वर्ष पुराने जुरासिक काल के जीवाश्मों की बड़े पैमाने पर तस्करी हो रही है. धार ज़िले में डायनासोर जीव के अंडे और कंकाल कई बार मिल चुके हैं. इस वजह से देश-विदेश के पुराजीव वैज्ञानिकों और जीवाश्म शोधकर्ताओं की इस क्षेत्र में रुचि बढ़ी है.

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