मोहनदास करम चंद गांधी यानी महात्मा गांधी के निधन को 65 वर्षों से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज भी वह पूरी दुनिया के लिए उतने ही प्रासंगिक नज़र आते हैं, जितने वह जीते जी हुआ करते थे. गांधी जी की समकालीन कई महान हस्तियां इतिहास के पन्नों तक सिमट कर रह गई हैं, लेकिन गांधी दर्शन आज भी जीने की कला बना हुआ है. कुछ मामलों में तो लगता है कि आज उनकी प्रासंगिकता ज़्यादा बढ़ गई है.
Tags: Congress, Global, Inflation, Mahatma Gandhi, political, unemployment, कांग्रेस, बेरोजगारी, महंगाई, महात्मा गांधी, राजनीतिक, वैश्विक Posted in कला और संस्कृति, कवर स्टोरी-2, कानून और व्यवस्था, मीडिया, राजनीति, विदेश, विधि-न्याय, समाज by Author: अजय कुमार | No Comments » | Read More... |
लंदन 2012 ओलंपिक की मेज़बानी मिलने का जश्न मना भी नहीं पाया था कि वहां अगले ही दिन सीरियल बम धमाके हो गए और देश शोक में डूब गया. ब्रिटेन 2008 की वैश्विक मंदी से किसी तरह उबर पाया था, तभी यूरो जोन संकट आ खड़ा हुआ. देश की रीढ़ हिला देने वाली घटनाओं के बावजूद लंदन ओलंपिक खेलों की मेज़बानी के लिए समय से तैयार हो गया है.
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अभी वैश्विक स्तर पर यह मुहिम चल रही है कि पर्यावरण के नुक़सान को किस तरह से कम किया जाए. विकसित देश यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे पर्यावरण संरक्षण के प्रति का़फी गंभीर हैं. लेकिन उनकी कथनी और करनी में ज़मीन-आसमान का अंतर है. जिस तरह से जहाज़ तो़डने के लिए दक्षिण एशिया की बंदरगाहों का इस्तेमाल किया जा रहा है, उससे तो ऐसा ही लगता है.
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यदि मानवजनित गतिविधियां अपनी मौजूदा गति से जारी रहीं तो औद्योगिक युग से पहले के मुक़ाबले औसत वैश्विक तापमान में सात डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि हो जाएगी. तापमान में यह वृद्धि 15000 साल पहले, आख़िरी हिमयुग (आइस एज) के बाद पृथ्वी के तापमान में आई वृद्धि से भी ज़्यादा है.
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जनता एक ज़िम्मेदार संसद का निर्माण करे |
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